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क्या है मिग-21 और क्यों बना हुआ है सुर्खियों में

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Mon, 02 Sep 2019 05:06 PM IST
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वायुसेना प्रमुख के साथ अभिनंदन - फोटो : PTI

गणेश चतुर्थी यानी दो सितंबर को वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ और वीर चक्र से सम्मानित पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने मिलकर मिग-21 उड़ाया। अभिनंदन ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान F-16 को मार गिराया था। वायुसेना प्रमुख के साथ उनकी यह उड़ान पठानकोट वायुसेना अड्डे से भरी गई।

पाकिस्तानी एफ-16 जेट को मार गिराने वाले मिग-21 बाइसन को लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मिग-21 की खासियत क्या है और क्यों इसे उड़ने वाला ताबूत भी कहा जाता रहा है। आइए जानते हैं भारत के इस फाइटर जेट की खूबियांः

युद्ध में सबसे ज्यादा इस्तेमाल

भारत के पास कई लड़ाकू विमान हैं। लेकिन ज्यादातर मौकों पर मिग-21 का इस्तेमाल किया है। यह भारत का एक सबसे पुराना फाइटर जेट है। इस फाइटर जेट का इस्तेमाल दुश्मन को सीमा पर रोकने के लिए होता है। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से एफ-16 लड़ाकू विमान आए वैसे ही भारत ने अपने मिग-21 रवाना कर दिए। जिसके बाद उन्होंने कुछ ही मिनटों में सीमा पर पहुंचकर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया।

जानिए क्या है मिग-21 बाइसन की खासियत

  • यह फाइटर जेट सोवियत जेट का एक अपग्रेडेड वर्जन है।
  • मिग-21 बाइसन शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज एयरक्राफ्ट मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है।
  • अपग्रेड होने के बाद यह पाकिस्तानी एफ-16 जैसे फाइटर जेट को टक्कर दे सकता है।
  • पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग-21 ने अहम भूमिका निभाई थी।
  • मिग-21 बाइसन ने वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमानों का भी सामना किया था।
  • भारतीय वायुसेना ने साल 2013 में मिग-21 के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया था।
  • हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 1967 में सोवियत संघ से मिग-21 बनाने का लाइसेंस मिला था।

मिग विमानों की बात की जाए तो ये हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। वायु सेना में होने वाले लड़ाकू विमान हादसों और उसकी वजह से पायलटों की जान का नुकसान सबसे ज्यादा इन्हीं विमानों की वजह से हुआ है। मिकोयन गुरेविच (Mikoyan-Gurevich) को ही मिग-21 विमान कहा जाता है।

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वायुसेना प्रमुख के साथ अभिनंदन - फोटो : PTI
गणेश चतुर्थी यानी दो सितंबर को वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ और वीर चक्र से सम्मानित पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने मिलकर मिग-21 उड़ाया। अभिनंदन ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान F-16 को मार गिराया था। वायुसेना प्रमुख के साथ उनकी यह उड़ान पठानकोट वायुसेना अड्डे से भरी गई।

पाकिस्तानी एफ-16 जेट को मार गिराने वाले मिग-21 बाइसन को लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मिग-21 की खासियत क्या है और क्यों इसे उड़ने वाला ताबूत भी कहा जाता रहा है। आइए जानते हैं भारत के इस फाइटर जेट की खूबियांः

युद्ध में सबसे ज्यादा इस्तेमाल

भारत के पास कई लड़ाकू विमान हैं। लेकिन ज्यादातर मौकों पर मिग-21 का इस्तेमाल किया है। यह भारत का एक सबसे पुराना फाइटर जेट है। इस फाइटर जेट का इस्तेमाल दुश्मन को सीमा पर रोकने के लिए होता है। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से एफ-16 लड़ाकू विमान आए वैसे ही भारत ने अपने मिग-21 रवाना कर दिए। जिसके बाद उन्होंने कुछ ही मिनटों में सीमा पर पहुंचकर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया।

जानिए क्या है मिग-21 बाइसन की खासियत

  • यह फाइटर जेट सोवियत जेट का एक अपग्रेडेड वर्जन है।
  • मिग-21 बाइसन शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज एयरक्राफ्ट मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है।
  • अपग्रेड होने के बाद यह पाकिस्तानी एफ-16 जैसे फाइटर जेट को टक्कर दे सकता है।
  • पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग-21 ने अहम भूमिका निभाई थी।
  • मिग-21 बाइसन ने वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमानों का भी सामना किया था।
  • भारतीय वायुसेना ने साल 2013 में मिग-21 के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया था।
  • हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 1967 में सोवियत संघ से मिग-21 बनाने का लाइसेंस मिला था।
मिग विमानों की बात की जाए तो ये हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। वायु सेना में होने वाले लड़ाकू विमान हादसों और उसकी वजह से पायलटों की जान का नुकसान सबसे ज्यादा इन्हीं विमानों की वजह से हुआ है। मिकोयन गुरेविच (Mikoyan-Gurevich) को ही मिग-21 विमान कहा जाता है।

1964 से हो रहे हैं इस्तेमाल

मिग-21 - फोटो : File
रूस और चीन के बाद भारत मिग-21 (MiG-21) का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है। 1964 में इस विमान को पहले सुपरसॉनिक फाइटर जेट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। भारत ने सोवियत रूस से इस विमान को देश में ही असेंबल करने का अधिकार और तकनीक हासिल की थी। तब से लेकर अब तक इस विमान ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध समेत कई अहम मौकों पर अहम भूमिका निभाई है।

रूस ने तो 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया, लेकिन भारत इसके अपग्रेडिड वेरिएंट का इस्तेमाल करता आ रहा है। सितंबर, 2018 तक वायु सेना के पास तकरीबन 120 मिग-21 विमान थे। इन्हें 2021-22 तक सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा।

177 करोड़ रुपये है एक प्लेन की कीमत

मिग-21 सोवियत संघ का उत्पाद है। इसे मिकोयन गुरेविच डिजाइन ब्यूरो (Mikoyan-Gurevich Design Bureau) ने 1950 में डिजायन किया था। यह एक इंजन वाला लड़ाकू विमान है और जब इसका निर्माण शुरू हुआ तब इसकी कीमत तकरीबन 20 करोड़ रुपये (29 लाख डॉलर) थी। मौजूदा समय में इसकी कीमत 177 करोड़ रुपये (25.1 अरब डॉलर) है।
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