अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप की हो या डेमोक्रेट जो बाइडन जीतें, दोनों स्थिति में भारत के हित सुरक्षित रहेंगे। विदेश मामलों के विशेषज्ञों का दावा है कि भारी बहुमत न होने के कारण राष्ट्रपति मनमानी नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा चिंता इसलिए भी नहीं है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र्र मोदी के रिपब्लिकन ट्रंप और डेमोक्रेट राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा दोनों से साथ अच्छे संबंध रहे हैं।
पूर्व राजनयिक पवन वर्मा के मुताबिक किसी देश की विदेश नीति सत्ता के साथ नहीं बदलती। उसमें निरंतरता रहती है। अमेरिका की विदेश नीति में भारत अहम भूमिका है और यह आगे भी रहेगी। चीन और पाकिस्तान को लेकर लगातार ट्रंप भारत के साथ मजबूती से खड़े दिखे। चाहे लद्दाख का मामला हो या दक्षिण चीन सागर का भारत और अमेरिका के बीच चीन को लेकर बेहतर समझ कायम हुई है।
पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार कहते हैं कि पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद में अमेरिका ने कटौती की और पाकिस्तान को आतंकवाद को फंडिंग करने वाले देशों की सूची में रखा। पिछले 4 वर्षों में अमेरिका ने अनुच्छेद 370 और नागरिकता कानून जैसे भारत के घरेलू मामलों पर बोलने से लगातार परहेज रखा। सज्जनहार के मुताबिक मजबूत विपक्ष के रूप में रिपब्लिकन हमेशा अमेरिका की सरकार पर नियंत्रण रखेंगे। प्रशासनिक भी और नैतिक भी। यानी भारत के हित हर हाल में सुरक्षित रहेंगे।
ट्रंप से भारत को यह लाभ मिला
ट्रंप ‘नमस्ते ट्रंप’ के लिए भारत आए तो शाहीन बाग में धरना चल रहा था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने उस बारे में कुछ नहीं बोला। उनका मानना है कि भारत परिपक्व लोकतंत्र है और वह अपनी आंतरिक समस्याओं को खुद हल करने में सक्षम है।
हालांकि ट्रंप ने भारत के खिलाफ व्यापार नीति और एच1बी वीजा को लेकर सख्त रुख अपनाया और पर्यावरण समझौते में शामिल होने के भारत के आग्रह को भी साफ तौर पर ठुकरा दिया था।
बाइडन के जीतने से भारत का यह फायदा
जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो अमेरिका पर्यावरण समझौते में शामिल हो सकता है, जिससे ट्रंप इनकार कर चुके हैं। इसके अलावा बाइडन ईरान पर लगे प्रतिबंध में लचीला रुख अपनाकर भारत को बड़ी व्यापारिक राहत दे सकते हैं। वह एच1बी वीजा और ऊंचे व्यापार करों में कटौती लाकर भी भारत को फायदा पहुंचा सकते हैं।
चीन के मुद्दे पर बाइडन राज में होगी मुश्किल
बाइडन के आने पर भारत के लिए चीन के मुद्दे पर मुश्किल हो सकती है। चीन और पाकिस्तान को लेकर डेमोक्रेट सरकार का लचीला रवैया भारत को चिंता में डाल सकता है। बाइडन के बेटे के चीन से व्यापारिक संबंधों की वजह से उनका चीन की ओर झुकाव संभव है।
ओबामा ने दूसरे कार्यकाल में भारत यात्रा के दौरान धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाकर अंदरूनी मामलों में दखल देने की कोशिश की थी। बिडेन से भी कुछ इसी तरह का अंदेशा है।