चुनाव परिणाम हमारे सामने हैं। उसे देखते हुए अब यह बात स्वीकार करने के ठोस कारण हैं कि चुनाव में सुरक्षा का विषय बेहद अहम मुद्दा बनकर उभरा। अपराधियों पर कार्रवाई करने के कारण सरकार आम जनता के बीच खासी लोकप्रिय रही और महिलाओं ने उसे इस मुद्दे पर बढ़-चढ़कर वोट किया। लेकिन इसी कार्यकाल में यूपी ने हाथरस कांड और गोरखपुर में पुलिस के द्वारा व्यापारी की हत्या किए जाने की घटना भी देखी है। इन घटनाओं का सबसे दुखद पहलू यह रहा है कि गोरखपुर कांड में पुलिस स्वयं अपराध करने में संलिप्त दिखाई दी तो हाथरस में वह अपराधियों पर कार्रवाई करने की बजाय घटना पर पर्दा डालने में व्यस्त रही।
कोई सरकार सौ फीसदी अपराध रोकने में समर्थ नहीं हो सकती। लेकिन योगी आदित्यनाथ प्रशासनिक अमले को इतन चुस्त-दुरूस्त तो कर ही सकते हैं कि वह स्वयं अपराध में लिप्त न हो, अपराधी किसी भी जाति-वर्ग या समुदाय का हो, उस पर तत्काल कार्रवाई हो। यदि सरकार अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई करने की नीति अपनाए तो उसे इससे जनता भी खुश होगी, इस चुनाव की तरह उसे इसका राजनीतिक लाभ भी अवश्य मिलेगा।
ठाकुरशाही चलाने के आरोप
योगी आदित्यनाथ सरकार पर गंभीर आरोप लगे थे कि मुख्यमंत्री एक जाति और एक संप्रदाय विशेष के अपराधियों पर कार्रवाई करते हैं, जबकि दूसरे समुदाय के अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। कुंडा के राजा भैया और बाहुबली पूर्व विधायक धनंजय सिंह पर अब तक कोई कार्रवाई न होने को भी जातिवादी राजनीति से जोड़कर देखा जाता रहा है। क्या योगी आदित्यनाथ 2.0 के कार्यकाल में किसी भी समुदाय के किसी भी अपराधी पर समान रूप से कार्रवाई होते हुए दिखाई पड़ेगी?
बेसहारा पशुओं की समस्या
योगी आदित्यनाथ सरकार ने अवैध बूचड़खाने बंद करने का आदेश जारी किया था। तर्क दिया गया था कि इससे प्रतिबंधित पशुओं की अवैध हत्या रुकेगी, साथ ही कत्लखानों में मशीनों के माध्यम से पशुओं की कटाई होने से आम जनता को साफ-सुथरा मांस खाने को मिलेगा। लेकिन सरकार के इस फैसले से दोहरा नुकसान हुआ। एक तरफ तो अनुपयोगी पशुओं को बेचकर किसानों को होने वाली आय बंद हो गई, वही बेसहारा पशु किसानों के खेत चरकर उनके लिए बड़ी समस्या बन गए। इससे पशुओं के मांस बिक्री से जुड़े लोगों के रोजगार भी प्रभावित हुए।
योगी सरकार 2.0 में वह मॉडल खोजना पड़ेगा, जिससे किसानों की यह समस्या खत्म हो। पशुओं को रखने के बाड़े अवैध कमाई का दूसरा केंद्र बन गए हैं। आरोप हैं कि बेसहारा पशुओं के पालन-पोषण के लिए मिलने वाला 30 रुपये दैनिक का भत्ता ग्राम प्रधानों-ठेकेदारों की जेब में जा रहे हैं, भत्ता लेने के बाद भी पशुओं को खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे वे बाहर से चरकर अपना पेट भरते हैं। सरकार को इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ ही अन्य उपाय भी करने होंगे जिससे यह समस्या खत्म हो।
भ्रष्टाचार रोकने की चुनौती
केंद्र सरकार ने जिस तरह ज्यादा से ज्यादा सेवाओं को डिजिटलीकरण कर भ्रष्टाचार रोकने की पहल की है, यूपी सरकार अभी इस मामले में पीछे है। उसे भी केंद्र सरकार से सीख लेते हुए ज्यादा से ज्यादा सेवाओं को डिजिटलाइज करने की आवश्यकता है। इससे जनता का समय-पैसा बचेगा, पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार रुकेगा।
शिक्षा-स्वास्थ्य बने प्राथमिकता
भाजपा को ध्यान रखना चाहिए कि आने वाले समय में उसका मुकाबला अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से हो सकता है। केजरीवाल सभी सेवाओं को डिजिटलाइज करने, शिक्षा-स्वास्थ्य में बेहतर प्रयोग कर गरीब छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध होते जा रहे हैं। यूपी सरकार पहले ही हर एक-दो जिलों पर एक बड़ा सरकारी अस्पताल खोलने का काम शुरू कर चुकी है। यदि यूपी की गरीब आबादी को महंगे इलाज से छुटकारा दिलाया जा सके, आयुष्मान योजा के जरिए सबको पूर्ण मुफ्त इलाज के दायरे में लाया जा सके तो यह एक बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। लेकिन क्या सरकार यह कर पाएगी, यह बड़ा सवाल है?
किसानों के लिए क्या होगा
भाजपा ने यूपी के किसानों को मुफ्त बिजली देने का बड़ा वादा किया है। सभी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना और इसके साथ ही किसानों को मुफ्त बिजली देना सरकार के लिए काफी कठिन कार्य होगा। विशेषकर यह देखते हुए कि राज्य का बिजली बोर्ड पहले से ही घाटे में है और सरकार को सबको बिजली देने में भारी सब्सिडी देनी पड़ती है। गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और इस मूल्य को समय से किसानों को दिलाने के उचित फैसले लेकर योगी सरकार एक बड़ी राजनीतिक लकीर खींच सकती है।
रोजगार की समस्या
भाजपा का दावा रहा है कि योगी सरकार आने के बाद यूपी का आर्थिक आधार बढ़ा है। मूलभूत ढांचे में निवेश से भारी संख्या में रोजगार पैदा हुए हैं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने से राज्य की बेरोजगारी दर में भारी गिरावट आई है। सरकार का दावा रहा है कि उसने पहले कार्यकाल में 4.5 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं। लेकिन करोड़ों की आबादी वाले राज्य में इतने को काफी नहीं कहा जा सकता। भारी संख्या में बेरोजगार युवा तुरंत परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए संघर्ष-प्रदर्शन करते रहे हैं। सरकार को एक पारदर्शी नीति बनाकर परीक्षाओं को समय से कराने और ज्यादा रोजगार सृजन पर ध्यान देना पड़ेगा।
किसानों, युवाओं, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं से सरकार ने बड़े वादे किये हैं। इन्हें यथाशीघ्र पूरा किये जाने की आवश्यकता है। इससे सरकार के त्वरित कार्रवाई करने और समाज के हर वर्ग तक सुविधाओं को पहुंचाने की छवि मजबूत होगी।
क्या कार्यकर्ताओं का सम्मान होगा
भाजपा कार्यकर्ताओं के सम्मान का मुद्दा हमेशा पार्टी के लिए परेशानी का कारण साबित हुआ है। कार्यकर्ता लगातार इस बात की शिकायत करते रहे हैं कि योगी सरकार में उनका कोई काम नहीं होता, उनके कहने पर किसी वोटर को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। क्या योगी सरकार 2.0 में आदित्यनाथ सरकारी मशीनरी पर ज्यादा भरोसा करने की बजाय अपने कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा कर पाएंगे? आखिरकार यही कार्यकर्ता उसके लिए जीत की राह खोलते आए हैं। इनका सम्मान केवल शब्दों से ही नहीं होना चाहिए, बल्कि इनका जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए ठोस कार्य किया जाना चाहिए।