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क्या घर वापसी करेंगे नवजोत सिंह सिद्घू? सिद्घू की विधायक पत्नी ने निकाला तिरंगा यात्रा

Sat, 20 Aug 2016 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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- फोटो : gettyimages
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क्या हाल ही में राज्यसभा की सदस्यता छोड़ कर भाजपा को झटका देने वाले स्टार क्रिकेटर रहे नवजोत सिंह सिद्घू की घर वापसी भी हो सकती है? हालांकि इस सवाल पर पार्टी फिलहाल चुप है, मगर हाल की दो घटनाओं ने कयासों का बाजार गरम कर दिया है। दरअसल सिद्घू की विधायक पत्नी नवजोत कौर ने न भाजपा की ओर से घोषित तिरंगा यात्रा में जोरशोर से भाग लिया। इसके अलावा अपनी वेबसाइट में सिद्घू अब भी खुद को भाजपा नेता ही बता रहे हैं। बताते हैं कि आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग ठुकराए जाने के बाद सिद्घू असमंजस में हैं। इसके अलावा भाजपा नेतृत्व राज्य में गठबंधन और सीटों के सवाल पर नवंबर महीने में राज्य इकाई के नेताओं के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू करने वाला है। ऐसे में माना जा रहा है कि सिद्घू भाजपा के भी भावी रुख का इंतजार कर रहे हैं।
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सिद्घू के लिए फिलहाल सियासी परिस्थितियां बदल गई हैं। वह चाहते थे कि आप उन्हें या उनकी पत्नी को विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे। इस आशय का ठोस आश्वासन न मिलने के बाद सिद्घू असमंजस में हैं। इसी बीच नवजोत कौर के तिरंगा यात्रा की अगुवाई करने के बाद यह सियासी संदेश भी गया है कि भाजपा में इस दंपति के बने रहने का मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 

राज्य के प्रभारी प्रभात झा ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह तो सिद्घू बताएंगे कि वह भाजपा में हैं या नहीं, वह भाजपा से नहीं बल्कि बतौर मनोनीत सदस्य राज्यसभा के सदस्य थे। उन्होंने प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष से बिना पूछे ही इस्तीफा दिया था। ऐसे में उनका यह कदम अनुशासनहीनता ही माना जाएगा। हालांकि उन्होंने इस दौरान सिद्घू से संपर्क साधे जाने या सिद्घू की ओर से पार्टी से संपर्क साधे जाने संबंधी सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की।
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कांग्रेस की भी है सिद्घू पर नजर

नवजोत सिद्धू - फोटो : ANI
असमंजस में घिरे सिद्घू पर कांग्रेस की भी निगाहें हैं। राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे के बाद राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर ने परोक्ष रूप से उन्हें आमंत्रित भी किया था। हालांकि यहां भी सिद्घू की मुख्यमंत्री बनने की चाहत पूरी नहीं होने वाली। इसके अलावा सिद्घू की अमरिंदर से रिश्ते भी सहज नहीं रहे हैं।

अकाली से गठबंधन पर आम राय नहीं
भाजपा में अब भी विधानसभा चुनाव में शिअद से गठबंधन जारी रखने पर आम राय नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठï नेता के मुताबिक इसके लिए राज्य इकाई से अगले महीने विमर्श का सिलसिला शुरू होगा। इसके अलावा मुख्य सवाल सीटों की संख्या पर है। भाजपा इस बार 40-45 सीटों से कम पर नहीं मानेगी। जाहिर है कि सीटों के सवाल पर खींचतान तय है। 
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