संसद के वर्तमान शीत सत्र में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलेगा। सत्ता पक्ष की रणनीतकि सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को भी सत्ता संसद में राहुल को मौका न देने की है। बल्कनि कांग्रेस उपाध्यक्ष के आरोपों की धार कुंद करने के लिए भाजपा सांसद बेहद आक्रामक रहेंगे। यही वजह है कि संसद के शीत सत्र के आखिरी दिन भी सदन में कामकाज नहीं होगा। जिस वजह से यह सत्र कामकाज धूलने वाले सत्रों की गिनती में दर्ज हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि पीएम मोदी पर लग रहे आरोपों के बीच भाजपा ने अपने सांसदों और मंत्रियों से आक्रामक रूख अपनाने को कहा है। सदन में राहुल को मौका देकर भाजपा पीएम मोदी पर कोई दाग नहीं लगने देना चाहती है। सरकार के रणनीतकिरों को इस बात का अब तक भान नहीं हुआ है कि राहुल के हाथ ऐसा क्या लग गया है कि वे सीधे पीएम मोदी के खिलाफ आक्रामक हैं।
इसलिए पार्टी रणनीतिकार राहुल को ऐसा मौका नहीं प्रदान करना चाहते हैं। जिससे की वे सदन में पीएम पर आरोप लगाकर अपनी बात संसद की कार्यवाही के रिकार्ड में दर्ज करा सकें। और यदि राहुल सदन के बाहर पीएम पर कोई आरोप लगाते हैं तो उन्हें भाजपा की ओर से ढ़ेर सारे झमेलों का सामना करना पड़ सकता है। संसद में सत्ता पक्ष की ओर से किए जा रहे हंगामें को लेकर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह उनके संसदीय रणनीति का हिस्सा है। किसी भी हाल में वे राहुल के आरोंपों को सदन के रिकार्ड पर आने नहीं देंगे। आगे बजट सत्र की याद दिलाए जाने के सवाल पर उक्त नेता ने कहा कि आम बजट के सत्र में अभी दो माह का वक्त है। तब तक यूपी समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परवान पकड़ लेंगे।
उधर राहुल गांधी ने भी पीएम मोदी पर लगाए जाने वाले आरोपों को लेकर काफी सावधानी बरती है। बुधवार को साथ आए अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के पूछने पर भी उन्होंने मोदी के खिलाफ राज को साझा नहीं किया है। बुधवार को कांग्रेस महासचिवों की बैठक में एक महासचिव ने राहुल से जानने का प्रयास भी किया तो उन्होंने दो टूक कहा कि समय आने पर वे उचित मंच पर पुख्ता सबूतों के साथ अपनी बात रखेंगे।