असम में केंद्र सरकार के सिटीजनशिप बिल को लेकर विरोध जारी है। इसी कड़ी में सरकार से वार्ता कर रहे युनाइटेड लिबरेशन फ्रॉन्ट ऑफ असम (उल्फा) के गुट ने बिल पास होने पर वार्ता तोड़ने की धमकी दे दी है। गौरतलब है कि विवादों में घिरा यह बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुका है मगर इसे अभी राज्यसभा से हरी झंडी नहीं मिली है।
उल्फा नेता मृणाल हजारिका ने कहा कि अगर केंद्र सरकार इस बिल को लेकर आगे बढ़ती है तो हमारे बीच चल रही वार्ता प्रभावित हो सकती हैं। इस बिल को लेकर पूरे असम में विरोध हो रहे हैं, ऐसे में केंद्र से वार्ता जारी रखना बहुत मुश्किल होगा अगर वह इसके प्रावधानों को लेकर आगे बढ़ती है। हजारिका ने कहा कि यह बिल राज्य के अस्तित्व पर सवाल उठाता है और इससे वार्ता को नुकसान होगा। वार्ता कर रहे उल्फा के इस गुट से केंद्र की बातचीत 2011 हुई थी।
उल्फा नेताओं ने पहले भी चेतावनी दी थी कि बिल युवा हथियार उठाने को मजबूर होंगे अगर इस बिल के अनुसार बांग्लादेश, पकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को धार्मिक आधार पर अपनाया गया। असम के अलावा उत्तर पूर्व के दूसरे भाजपा शासित राज्यों में भी इस बिल को लेकर विरोध हो रहा है।
मेघालय सरकार ने विधानसभा में इस बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है, वहीं मणिपुर ने जरुरी बदलाव करने को कहा है। शनिवार को मृणाल हजारिका और उल्फा वार्ता गुट के दूसरे नेता अनूप छेतिया को पुलिस ने 6 जनवरी को भाजपा कार्यालय का घेराव करने के मामले में समन देकर बुलाया था।