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बीजेपी को 2019 में सत्ता में लौटने नहीं देंगे, समान विचारधारा वाले दल एकजुट हों : सोनिया

Sat, 10 Mar 2018 03:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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सोनिया गांधी
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2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटीं कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने शुक्रवार को केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। देश में सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों से देश के व्यापक हित में आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की अपील की। 
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एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन के रूप में वह और राहुल तथा अन्य नेता नियमित रूप से समान विचारधारा वाले दलों के साथ बैठक कर रहे हैं। हमने पहले भी मिलकर काम किया है और संसद खासकर राज्यसभा में यह सामंजस्य देखने को मिला भी है।

सोनिया गांधी कांग्रेस या कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन के 2019 लोकसभा चुनावों में सत्ता में वापसी के बारे में आश्वस्त दिखीं। गांधी ने कहा, "हम वापस लौट रहे हैं। हम उन्हें सत्ता में लौटने नहीं देंगे।" कांग्रेस नेता ने गठबंधन के संबंध में अपनी पार्टी के भीतर प्रतिरोध की ओर इशारा किया, जो भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को चुनौती देने के लिए एक बड़ा गठबंधन हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि ऐसे दलों का एक साथ आना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ मुद्दों पर हम एकजुट हो सकते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर हम खिलाफ हैं। पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में कांग्रेस समेत सभी दलों पर बहुत दबाव है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सोनिया ने भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए विपक्षी दलों को 13 मार्च को दिल्ली में रात्रि भोज पर आमंत्रित किया है।

क्या विकास सिर्फ पिछले चार साल में हुआ

एक सवाल के जवाब में कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या 26 मई 2014 से पहले देश पूरी तरह से एक ब्लैक होल था। क्या देश में विकास और तरक्की केवल चार साल पहले ही हुई। क्या यह कहना देश के हजारों करोड़ों लोगों की बुद्धिमता का अपमान नहीं है। 

भाजपा ने मुस्लिम पार्टी का ठप्पा लगाया

सोनिया ने आरोप लगाया कि भाजपा ने देशभर में कांग्रेस को मुस्लिमों समर्थक पार्टी होने का ठप्पा लगाया और वह अपने इस काम में सफल भी रही। लेकिन हकीकत यह है कि वह, राहुल सभी मंदिर जाते रहे हैं। राजीव गांधी के साथ भी मंदिर गईं लेकिन हमने कभी इसका प्रचार नहीं किया। 

सोनिया ने की अटल बिहारी वाजपेयी की सराहना

सोनिया गांधी
मनमोहन बेहतर पीएम साबित हुए

वर्ष 2004 में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने पर सोनिया ने कहा कि वह अपनी सीमाएं जानती थीं। उन्हें पता था कि मनमोहन सिंह उनसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें स्वाभाविक रूप से भाषण देना नहीं आता था इसलिए उन्हें लीडर की बजाय रीडर कहा गया। 

जांच एजेंसियों से डराया जा रहा 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस की खुली छूट होनी चाहिए। मौजूदा समय में देश में अलग ढंग की राजनीति हो रही है। संवैधानिक संस्थानों पर हमला हो रहा है। सत्तासीन लोग भड़काऊ बयान दे रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बढ़ रहा है। दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए जा रहे हैं। चुनाव के लिए देशभर में लोगों को बांटा जा रहा है। आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले बढ़ रहे हैं। बेरोजगारी, किसानों की समस्या विकराल है लेकिन इनकी आवाज उठाने वाले दलों को जांच एजेंसियों से डराया जा रहा है।  

अटल बिहारी की सराहना

कांग्रेस नेता ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को बोलने भी नहीं दिया जाता है। हम कई मुद्दों पर बहस भी नहीं कर पाते हैं। सरकार न जाने क्यों चर्चा से भागती है। उन्होंने कहा कि विचारों के मामले पर भले ही उनकी पार्टी अटल बिहारी वाजपेयी से सहमत न हो, लेकिन उनकी सरकार में संसदीय परंपराओं के लिए काफी सम्मान था। इस मामले में मोदी सरकार नाकाम साबित हुई है।
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2जी मामले में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने वाले को नौकरी दी गई

सोनिया गांधी - फोटो : The Indian Express
2जी मामले में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया

सोनिया ने कहा कि 2014 के आम चुनावों में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा था। सीएजी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आंकड़ों को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया। अब सभी लोगों को यह अहसास हो गया होगा कि किस तरह से राशि को अधिक बताया गया। सीएजी के पूर्व चेयरमैन विनोद राय पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उस समय जो व्यक्ति इंचार्ज था, उसे अब एक आरामदायक नौकरी दी गई है। 

लोगों से जुड़ने के लिए नए तरीके की जरूरत

उन्होंने कहा कि संगठन स्तर पर लोगों से जुड़ने के लिए पार्टी को नए तरीके विकसित करने की जरूरत है। राहुल पार्टी को फिर से मजबूत बनाने के लिए युवाओं और वरिष्ठ लोगों का संतुलन चाहते हैं और यह आसान काम नहीं है। प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने के सवाल पर कहा कि इस समय वह अपने बच्चों के साथ व्यस्त हैं। इस बारे में उन्हीं को ही फैसला लेना है और भविष्य में क्या होगा, यह कोई भी नहीं जानता है।
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