यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन होने के बाद अब ये चर्चा जोरों पर है कि मुलायम सिंह यादव पार्टी या गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करेंगे या नहीं ? क्योंकि मुलायम ने कांग्रेस और सपा के गठबंधन को गैरजरूरी बताते हुए कहा था कि वे इसके पक्ष में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे।
मंगलवार को संसद परिसर में पार्टी नेता रामगोपाल यादव से पत्रकारों ने सवाल पूछा, क्या मुलायम सिंह यादव पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करेंगे ? जवाब में रामगोपाल ने कहा कि कौन प्रचार करता है, कौन नहीं करता है, ये मायने नहीं रखता है।
Kaun prachaar karta hai kaun nahi karta hai it is immaterial :Ram Gopal Yadav on Mulayam Singh not to campaign for SP #uppolls2017 pic.twitter.com/0Dj76deg09
— ANI UP (@ANINewsUP) January 31, 2017
उधर अखिलेश यादव की अपनों से लड़ाई फिलहाल खत्म होती नजर नहीं आ रही। चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और चुनाव चिह्न की लड़ाई में तो अखिलेश बखूबी पास हो गए, पर असल परीक्षा तो अब होनी है।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश को विरोधियों की चुनौतियों के साथ ही ‘अपनों’ से भी जूझना होगा। अखिलेश-राहुल गांधी के साझा रोड शो वाले दिन ही पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन का विरोध और चुनाव प्रचार से अलग रहने की बात कहकर इसके साफ संकेत दे दिए हैं।
सपा की चुनौती मुलायम के गृह जनपद इटावा से ही शुरू हो गई है। यहां ‘मुलायम के लोग’ अलग दफ्तर चला रहे हैं, तो फिरोजाबाद, एटा में मुलायम के नजदीकी विधायक बागी होकर मैदान में हैं। सपा ने इटावा के विधायक रघुराज सिंह शाक्य का टिकट काट दिया है।