देश में एक बार फिर रेल और आम बजट एक होने परंपरा जिंदा हो सकती है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि वह रेल मंत्रालय के उस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसमें रेल और आम बजट एक करने की बात कही गई है। अगर ऐसा होता है तो करीब 92 साल बाद दोनों एक ही बजट में मिल जाएंगे।
वित्त सचिव अशोक लवासा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा है, 'हम इस प्रस्ताव (रेल मंत्री सुरेश प्रभु के ) पर विचार करेंगे और देखेंगे। इसकी प्रक्रिया रेल मंत्रालय की सलाह से शुरू की जाएगी।' 1924 में ब्रिटिश राज के समय ही रेल बजट को आम बजट से अलग कर दिया गया था। ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान देने के मकसद से किया गया था। तब कुल बजट में रेलवे की हिस्सेदारी 70 फीसदी थी और अब औसत करीब 15 फीसदी है।