बुधवार को संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान दिए 88 मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने 11 करोड़ किसानों को साल में तीन बार मिलने वाली पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) का जिक्र किया। उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द ही इस राशि में बढ़ोतरी का एलान होगा। वहीं संसद के बजट सत्र में 14 लोकसभा सांसदों ने भी इस निधि को लेकर सवाल पूछे। सांसदों ने पूछा, क्या सरकार का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को भूमिहीन मजदूरों और कृषि श्रमिकों के लिए विस्तारित करने का कोई विचार है। क्या सरकार इस योजना के तहत 6000 रुपये की वर्तमान राशि को बढ़ाने की योजना बना रही है, क्योंकि मुद्रास्फीति कई गुना बढ़ गई है। मंगलवार को पूछे गए इस सवाल का जवाब तो मिला, लेकिन उसमें स्पष्ट तौर से केंद्र सरकार ने यह नहीं बताया कि वह 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' की राशि में इजाफा करने पर विचार कर रही है या नहीं।
इन लोकसभा सांसदों ने पूछा था सवाल
लोकसभा में 'पीएम किसान सम्मान निधि योजना' को लेकर सवाल पूछने वाले सांसदों में रंजीत सिन्हा, हिंदूराव नाईक निम्बालकर, उन्मेश भैय्यासाहेब पाटिल, जनार्दन सिंह सीग्रीवाल, डॉ. हिना विजय कुमार गावीत, दिलीप शइकीया, देवजी पटेल, रीता बहुगुणा जोशी, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, वाई देवेंद्रप्पा, एससी उदासी, डॉ. सुजय विखे पाटील, सुधाकर तुकाराम श्रंगारे, सुनील कुमार सिंह और कृष्णपाल सिंह यादव शामिल हैं।
क्या हर साल राशि में वृद्धि करने की योजना है
लोकसभा सांसदों ने पूछा, सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के माध्यम से किसानों की सहायता के लिए विशेष रूप से महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, कर्नाटक और झारखंड में क्या कदम उठाए गए हैं। क्या सरकार का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को भूमिहीन मजदूरों और कृषि श्रमिकों के लिए विस्तारित करने का कोई विचार है। यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और नहीं तो इसके क्या कारण है। क्या सरकार इस योजना के तहत 6000 रुपये की वर्तमान राशि को बढ़ाने की योजना बना रही है, क्योंकि मुद्रास्फीति कई गुना बढ़ गई है। यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है। क्या सरकार की पीएम किसान योजना को मुद्रास्फीति सूचकांक से जोड़ने और मुद्रास्फीति में वृद्धि के अनुसार हर साल राशि में वृद्धि करने की योजना है। उक्त योजना के शुरू होने के बाद से प्रतिवर्ष कुल कितनी राशि खर्च की गई है। इसके अंतर्गत लाभार्थियों की राज्यवार संख्या कितनी है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिया ये जवाब
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा सांसदों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकारों, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के विचारों और अन्य संगत कारकों पर विचार करने के बाद 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) एवं गन्ने के लिए उचित व लाभकारी मूल्य (एफआरपी) निर्धारित करती है। एमएसपी का निर्धारण पूरे देश के लिए किया जाता है न कि क्षेत्र या राज्य विशेष के लिए। हालांकि एमएसपी की सिफारिश करते समय सीएपीसी द्वारा राज्यों के लिए विशिष्ट मापदंडों पर विचार किया जाता है।
किसानों के परिवारों की वित्तीय जरुरतों को पूरा करना
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, पीएम किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) का उद्देश्य उचित फसल स्वास्थ्य और उचित पैदावार सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न वस्तुओं की खरीद में सभी भू-धारक किसानों के परिवारों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करना है। यह अनुमानित कृषि आय के साथ-साथ घरेलू जरूरतों के अनुरूप हो। यह सभी किसान परिवारों, जिनके पास कृषि योग्य भूमि है, को उनके भू-धारिता के आकार पर ध्यान दिए बिना कतिपय बहिष्कार मानदंडों के अध्यधीन तीन सम्मान किस्तों में प्रति वर्ष 6000 रुपये की आय सहायता प्रदान करता है। योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए, कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व बुनियादी मानदंड है। इसके अलावा, सरकार की कृषि मूल्य नीति एमएसपी के माध्यम से भी किसानों का समर्थन करती है, जिसे वार्षिक रूप से खरीफ और रबी मौसम के लिए घोषित किया जाता है। इसमें किसानों को प्रतिकूल मुद्रा स्फीति के प्रभाव से बचाने के लिए अंतर्निहित तंत्र है।