किसी भी सिनेमा प्रेमी के लिए अपने पसंदीदा हीरो, हीरोइन या डायरेक्टर की फिल्म सिनेमाघर में देखने जाने का रोमांच अलग ही होता है- खासकर फर्स्ट डे फर्स्ट शो का रोमांच लेकिन पिछले हफ्ते जब अमिताभ बच्चन की फिल्म गुलाबो सिताबो रिलीज हुई तो थिएटर के बाहर लाइन में कोई नहीं था। लोगों ने फिल्म रात को 12 बजे एमेजॉन प्राइम पर घरों पर बैठकर देखी।
कोरोना वायरस के दौर में सिनेमाघर कब खुलेंगे, इसका कोई जवाब नहीं है लेकिन ये तय है कि गुलाबो सिताबो की तरह कई और फिल्में ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लैटफॉर्म पर ही रिलीज की जा रही हैं।जल्दी ही विद्या बालन की फिल्म शकुंतला एमेजॉन प्राइम पर रिलीज होगी। तमिल-तेलुगू फिल्म पेंग्विन शुक्रवार को ही एमेजॉन पर रिलीज हुई है।
एमेजॉन प्राइम वीडियो के कंटेंट हेड (भारत) विजय सुब्रमण्यन का कहना है कि अपने ग्राहकों के रुझान को समझकर उसी हिसाब से रणनीति बनाई जा रही है और मकसद ये है कि ग्राहक को उसके घर की दहलीज के अंदर ही सिनेमा का बेहतरीन अनुभव दे सकें।
भारत में फिल्में शायद मनोरंजन का सबसे बड़ा जरिया है। थिएटर में साथ-साथ जाना, किसी कॉमेडी सीन पर लोगों का एक साथ हंसना, किसी उदास कर देने वाले सीन पर सिनेमा हॉल के अंधेरे में चुपके से रोना...एक हॉल में कितने ही अनजाने लोग एक साथ, एक ही तरह के जज्बात से गुजरते हैं।
अब कोरोना वायरस संक्रमण के बीच फिल्मकारों ने ही नहीं, दर्शकों ने भी मनोरंजन के नए साधन खोज लिए हैं। नेटफ्लिक्स पार्टी किसी भी सब्स्क्राइबर को ये सुविधा देता है कि कुछ दोस्त मिलकर कोई फिल्म या शो एक ही वक्त साथ-साथ अपने घरों पर देख सकते हैं।
लोगों का मानना है कि ये किसी दोस्त या परिवार के साथ बैठकर फिल्म देखने वाले अनुभव जैसा तो नहीं है लेकिन इस तरह नेटफ्लिक्स पार्टी पर साथ-साथ फिल्में देखने से अपने दोस्तों की कमी कम महसूस होती है। पहले दोस्तों के साथ उनकी मौजूदगी में हंसा जाता था लेकिन अब किसी कॉमिक सीन लाइव चैट में स्माइली डालकर हंस सकते हैं।
गुलाबो सिताबो के निर्देशक शूजित सरकार इसे मनोरंजन के नए दौर का आगाज बताते हैं हालांकि ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्में उस तरह का हाइप और क्रेज पैदा कर पाएंगी जो थिएटर में फिल्म रिलीज करने से होता है? और फिर कमाई का हिसाब कैसे होगा?
फिल्म समीक्षक शुभ्रा गुप्ता ने ट्विटर पर लिखा था ये 'ब्रेव न्यू बॉलीवुड है'। एक अन्य फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी अपने ट्वीट में सवाल करती हैं कि क्या कोरोना वायरस के बीच आने वाले समय में वाकई 'डिजिटल मनोरंजन' मल्टीप्लेक्स की दुनिया बदल देगा?
धीरे-धीरे मनोरंजन 'सामाजिक अनुभव' से एक 'निजी अनुभव' बनता जा रहा है, जहां सब कुछ आपके मोबाइल या लैपटॉप में कैद है। मनोरंजन का चेहरा बदल तो रहा है, लेकिन ये अच्छे के लिए है या बुरे के लिए, यह तो भविष्य ही बताएगा।
शूटिंग के बदलते नियम
सिनेमाघर के मालिक भी ऐसे भविष्य के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, जहां सीमित संख्या में ही लोग फिल्म देखने आ पाएंगे। कोरोना वायरस के बीच फिल्मों और टीवी से जुड़े लोग भी शूटिंग शुरू होने के इंतजार में हैं। उनके काम करने और शूट करने के तरीके में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
मसलन, दक्षिण अफ़्रीका में लॉकडाउन के दौरान लॉकडाउन हाइट्स नाम का ऑनलाइन सीरियल शूट किया गया है। सभी एक्टर्स ने अपने-अपने सीन अपने फोन पर घर में शूट किए और बाद में उन्हें एडिट कर सीरियल बनाया गया। ये सीरियल काफी लोकप्रिय भी हुआ।
बॉलीवुड में भी नए नियमों पर बात चल रही है, जिनमें संभवत 33 फीसदी क्रू सदस्यों को ही आने दिया जाएगा। एक्टर अपने साथ छोटी टीम ही ला पाएंगे, मेकअप आर्टिस्ट को पीपीई किट पहनकर ही मेकअप करना होगा। रियलिटी शो तो होंगे लेकिन उनमें तालियां बजाने वाले दर्शक नहीं होंगे।
इसकी एक झलक हमें अक्षय कुमार के ताजा विज्ञापन मे देखने को मिली जहां सेट पर सब मास्क पहने हुए हैं। सेट सैनेटाइज किया जा रहा है और सबका तापमान चेक हो रहा है।
कोरोना वायरस के कारण म्यूजिक कॉन्सर्ट करने वाले कलाकार भी खासे प्रभावित हुए हैं। कई कॉन्सर्ट कैंसल हो चुके हैं और दोबार कब होंगे ये भी पता नहीं है तो संगीत प्रेमियों के लिए मनोरंजन कैसे बदल सकता है? ताजा हालात के बावजूद, चिंतन उपाध्याय को उम्मीद है कि कोरोना वायरस से पैदा हुए हालात में कलाकार और संगीत प्रेमी के बीच नया और बेहतर रिश्ता बनेगा।
वो कहते हैं कि तकनीकी स्तर पर एक्सपेरिमेंट चल रहे हैं कि कैसे वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल कर दर्शकों को घर बैठे असल कॉन्सर्ट का एहसास दिलाया जाए। हालांकि भारत में ऐसा होने में वक्त लग सकता है। चिंतन कहते हैं कि दूसरी बात ये है कि अभी कलाकारों को अपनी कला पर काम करने के लिए ज्यादा समय मिल रहा है।
जहां तक कलाकारों को होने वाली कमाई की बात है तो साउंडक्लाउड जैसे माध्यम ये सुविधा दे रहे हैं कि कलाकार अपने प्रोफाइल पेज पर एक बटन लगा सकें, जहां फैन्स सीधे कलाकारों को आर्थिक योगदान दे सकते है। जीओ सावन अपने फेसबुक पेज पर कलाकारों की लाइवस्ट्रीम कर रहा है, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग से होने वाली कमाई वो कलाकारों को देगा।
कोविड-19 पर केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक टीवी, डिजिटल और ओटीटी प्लैटफॉर्म पर इस हालात में जबरदस्त विकास हो रहा है जबकि सिनेमाघर और थीम पार्क खाली पड़े हैं। भारत में कोरोना संक्रमण के साथ-साथ मजदूरों को लेकर एक मानवीय समस्या खड़ी हो गई है।
स्वास्थ्य सुविधों की हालत खराब है, ऐसे में मनोरंजन पर बात करना गैर-जरूरी लग सकता है लेकिन ये बात भी सच है कि जो लोग अपने-अपने घरों में महफूज है, सुविधाओं से लैस है, उनके पास अगर लॉकडाउन में फिल्मों, हॉटस्टार, नेटफ्लिक्स या एमेजॉन जैसे प्लैटफॉर्म का सहारा न होता तो उनका लॉकडाउन कैसा होता?