प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा और उसके त्वरित संदेश मंच व्हाट्सएप ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वे अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी के उस निर्देश का पालन करेंगे, जिसमें प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा तय गोपनीयता एवं सहमति संबंधी मानकों को विज्ञापन से जुड़े डेटा पर भी लागू करने को कहा गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ दिसंबर, 2025 में आए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। शीर्ष अदालत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की उस अपील पर भी विचार कर रही है जिसमें एनसीएलएटी द्वारा व्हाट्सएप और मेटा को विज्ञापन उद्देश्यों के लिए उपयोगकर्ताओं का डेटा साझा करने की अनुमति दिए जाने को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्थगन की मांग वाली याचिकाएं एनसीएलएटी के 15 दिसंबर, 2025 के आदेश के उस हिस्से पर रोक चाहती हैं, जिसमें सीसीआई के निर्देशों का पालन करने को कहा गया था। व्हाट्सएप का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि अपीलकर्ता कंपनियों ने 16 मार्च तक न्यायाधिकरण के निर्देशों को लागू करने का फैसला किया है।
इस पर पीठ ने स्थगन याचिकाएं खारिज करने के साथ यह स्पष्ट किया कि मुख्य अपील में उठाए गए मुद्दों पर इससे कोई असर नहीं होगा। अदालत ने कंपनियों से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी।
शीर्ष अदालत इन कंपनियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति के मामले में 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने को चुनौती दी गई है।
शीर्ष अदालत ने तीन फरवरी को इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि नागरिकों के निजता के अधिकार से ‘डेटा साझा करने’ के नाम पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है।
एनसीएलएटी ने चार नवंबर, 2025 को सीसीआई के उस आदेश के एक हिस्से को निरस्त कर दिया था, जिसमें व्हाट्सएप को पांच वर्ष तक मेटा के साथ विज्ञापन के लिए डेटा साझा करने से रोका गया था। हालांकि, 213 करोड़ रुपये का दंड बरकरार रखा गया था।
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