चाचा शरद पवार की छाया से निकलकर अजित पवार अब महाराष्ट्र में राजनीतिक हैसियत रखने लगे हैं। उनकी पार्टी एनसीपी के 41 उम्मीदवार चुनाव जीते हैं, लेकिन अजित पवार के मन एक कसक है। वह पांच बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे हैं। अजित पवार चाहते हैं कि छठवीं बार भाजपा के मुख्यमंत्री के राज में डिप्टी सीएम बनकर बड़ा रिकार्ड बनाएं।
अजित पवार गुरुवार को दिल्ली पहुंचे। एनसीपी(अजित) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के आवास पर अजित पवार का आत्मविश्वास देखने लायक था। डिप्टी सीएम बनने के सवाल पर उनके चेहरे पर गजब की चमक उभरी। पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में पांच बार के डिप्टी सीएम हैं। यह अपने आप में रिकार्ड है। दरअसल पवार की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकात के लिए दिल्ली आए हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे। इसमें महाराष्ट्र में सरकार के प्रारुप को लेकर चर्चा होगी। इस बैठक में एकनाथ शिंदे और भाजपा के नेता भी रहेंगे। टीम पवार को पूरी उम्मीद है कि इस चर्चा में एनसीपी(अजित) की महाराष्ट्र सरकार में भागीदारी का स्वरुप सामने आ जाएगा। टीम पवार चाहती है कि भाजपा के सीएम की अगुआई में बनने वाली सरकार में अजित पवार छठवीं बार डिप्टी सीएम बनने का रिकार्ड बनाएं।
देश में कोई नेता नहीं हो पाया इतनी बार डिप्टी सीएम
अजित पवार एनसीपी के ऐसे नेता हैं, जिन्हें महाराष्ट्र में पांच बार डिप्टी सीएम बनने का अवसर मिला है। उन्हें चार बार यह अवसर उनके चाचा और महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज शरद पवार ने दिलाया था। पांचवी बार अजित ने यह रुतबा चाचा शरद पवार की पार्टी एनसीपी से बगावत करके हासिल किया था। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में अब तक आठ बार उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। इसमें आधे से अधिक बार के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ही हैं। अजित पवार की पार्टी को एकनाथ शिंदे सरकार के विभाग बंटवारे में 10 मंत्रालय मिले थे। इस बार भी उन्हें भरोसा है कि भाजपा उनका पूरा मान रखेगी।
राजनीति के मौसम को पहचानते हैं अजित पवार
अजित पवार की राजनीतिक ट्रेनिंग उनके चाचा शरद पवार के निर्देशन में हुई है। पवार राजनीति के मौसम को बहुत अच्छी तरह पहचानते हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र की सरकार गठित होने से पहले ही अजित पवार ने समय का रुख देखकर एनसीपी छोड़ दी थी। हालांकि बाद में लौट आए। इसके बाद कयास लगाया जा रहा था कि अजित कभी भी चाचा के साथ बगावत कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने इंतजार किया। शिवसेना में फूट और एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के कुछ महीने बाद अजित पवार ने फिर चाचा का साथ छोड़ने का फैसला किया। इस बार उनके साथ चाचा शरद पवार के साथ बहुत करीब का राजनीतिक रिश्ता रखने वाले प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल समेत तमाम नेता आए। अब अजित पवार अपनी पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर निश्चिंत हैं।