अहमदाबाद में जून 2025 में हुए विमान हादसे के बाद से ही एअर इंडिया उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रही है। इस भीषण हादसे के असर के साथ साथ एयरलाइन कंपनी की संचालन और वित्तीय चुनौतियां बढ़ गई है। टाटा ग्रुप के हाथों में आ जाने के बाद भी कंपनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो सकी है। इस बीच एयरलाइन कंपनी के टॉप मैनेजमेंट में बदलाव का दौर शुरु हो गया है। टाटा ग्रुप ने एयरलाइन के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तलाश तेज कर दी है। टाटा ग्रुप एयर इंडिया के मौजूदा सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) कैंपबेल विल्सन का कार्यकाल कई चुनौतियों से भरा रहा है। इस दौरान एयर इंडिया को तकनीकी खामियों के साथ साथ सर्विस क्वालिटी को लेकर भी लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। साथ ही टाटा ग्रुप अपनी लो कॉस्ट सब्सिडियरी एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए भी नेतृत्व बदलने पर विचार कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि, टाटा ग्रुप का लक्ष्य एअर इंडिया को एक बार फिर दुनिया की शीर्ष एयरलाइंस की कतार में खड़ा करना है। इसलिए ग्रुप ऐसे सीईओ की तलाश में है जो भारतीय एविएशन मार्केट की गहरी समझ रखता हो, या फिर इंटरनेशनल एविएशन सेक्टर में बड़े स्तर पर बदलाव और ट्रांसफॉर्मेशन का अनुभव रखता हो। ग्रुप इस बात पर भी खास ध्यान दे रहा है एअर इंडिया और विस्तारा के इंटीग्रेशन के बाद कर्मचारियों और यात्रियों के बीच किसी तरह की असंतुष्टि न पैदा हो। इसके लिए मैनेजमेंट सर्विस क्वालिटी और आंतरिक समन्वय को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एअर इंडिया के मौजूदा सीईओ का कॉन्ट्रैक्ट साल 2027 में खत्म होना है, ऐसे में प्रस्तावित नई नियुक्ति को आपसी सहमति से अलग होने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। एअर इंडिया ने 31 मार्च तक ब्रेक ईवन पॉइंट, यानी जितनी कमाई उतना खर्च, हासिल करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए इस टारगेट को पूरा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से टाटा ग्रुप ने लीडरशिप में बदलाव का फैसला लिया है। जून 2025 में अहमदाबाद में हुआ बोइंग 787 ड्रीमलाइनर हादसा एअर इंडिया के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इस दुर्घटना ने न सिर्फ एयरलाइन की छवि को प्रभावित किया, बल्कि इसके रिवाइवल प्लान पर भी असर डाला है।
एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है, एअर इंडिया और विस्तारा के हालिया मर्जर के बाद टाटा ग्रुप एयरलाइन के संचालन को और अधिक प्रोफेशनल और सुचारू बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। इसी क्रम में कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। किसी बड़े मर्जर के बाद मैनेजमेंट स्ट्रक्चर में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे में टाटा ग्रुप अब ऐसे लीडर की तलाश में है जो एअर इंडिया के वैश्विक विस्तार को मजबूती दे सके और साथ ही कस्टमर सर्विस में आई गिरावट को भी प्रभावी ढंग से संभाल सके।
हालिया सीईओ कैंपबेल विल्सन न्यूजीलैंड के रहने वाले है। वे जून 2022 में एअर इंडिया से जुड़े थे। उस दौरान एयर इंडिया सरकार के स्वामित्व से निकलकर टाटा ग्रुप के हाथों में आई थी और एयरलाइन के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू हुई थी। विल्सन के एविएशन सेक्टर में लंबे अनुभव को देखते हुए टाटा ग्रुप ने उन्हें एयर इंडिया के बदलाव की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके कार्यकाल के दौरान एयरलाइन ने 470 नए विमानों का रिकॉर्डतोड़ ऑर्डर दिया, जिसे कंपनी के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना गया। हालांकि इस दौरान एयर इंडिया कई विवादों में भी घिरी रही। पेशाब कांड जैसी घटनाओं और विमानों की खराब केबिन स्थिति जैसे टूटी सीटें और काम न करने वाली एंटरटेनमेंट स्क्रीन ने एयरलाइन की छवि को नुकसान पहुंचाया। वहीं, सोशल मीडिया पर यात्री लगातार फ्लाइट में देरी और कमजोर सर्विस को लेकर कैंपबेल विल्सन के नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं।