मथुरा में कथित सत्याग्रहियों के हमले में शहीद दो पुलिस अफसरों की शहादत पर दादरी में बदमाशों से मुठभेड़ में मारे गए दरोगा अख्तर खान की मां-बीवी ने चुप्पी तोड़ी है। सीधा-सीधा आरोप लगाया है कि इन दोनों को भी अख्तर की तरह साजिश के तहत मरवाया गया है। अख्तर की हत्या का आरोप साथी दरोगा पर मढ़ा, जबकि इन दोनों की हत्या में सरकारी लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। आज तक मुआवजा न मिलने से आहत मां-पत्नी की मानें तो परिवार तंगहाली से जूझ रहा है। बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे। हमें जांच से दूर रखा जा रहा है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत नगला पटवारी निवासी शहीद दरोगा अख्तर खान की पत्नी रजिया व मां रहीसन ने कहा कि अख्तर खान की हत्या में साथी दरोगा सलीम की भूमिका पहले ही दिन से संदिग्ध रही है। इस मामले की जांच अगर सीबीआई कराई जाए तो दूध का दूध पानी हो जाएगा। अख्तर को साजिश के तहत मरवाया गया है। उन्होंने कहा कि आज तक हमें सरकार के स्तर से हुई 20 लाख रुपये के मुआवजे की घोघणा के बाद एक रुपया नहीं मिला। हमने एक करोड़ मांग था। मगर घोषणा 20 लाख हुई और वह भी मिली नहीं है। हमें जांच से भी दूर रखा जा रहा है। हकीकत हमें नहीं बताई जा रही है। इसके चलते दिव्यांग बेटी सहित दोनों बेटों का लालन-पालन भी मुश्किल होने लगा है।
बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे। आर्थिक तंगी के चलते परिवार का हाल बेहाल है। मां ने कहा कि बड़े बेटे अनस की उम्र 11 साल है। सरकार पांच साल का समय दे रही है। हमें दस साल का समय दिया जाए। मां का तो यहां तक कहना है कि मथुरा की घटना भी लापरवाही और साजिश के तहत हुई है। अगर सरकारी मशीनरी की लापरवाही न होती तो दो मां के बेटे मुकुल द्विवेदी व संतोष कुमार की शहादत न होगी। बता दें कि 25 अप्रैल को दादरी में तैनात दरोगा की बदमाशों से मुठभेड़ में मौत हुई थी। पहले ही दिन इस मामले में इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन्हें हटाया गया था। परिवार तभी से प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।