स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मणा थेवर की विधवा एल कथाई अम्माल पिछले 30 साल से पेंशन का इंतजार कर रही थी। आवेदनकर्ता के पति इंडियन नेशनल आर्मी के जवान थे जो मलयेशिया में आईएनए में शामिल हुए थे। बाद में उन्हें ब्रिटिश ने बंधक बना लिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद लक्ष्मणा थेवर ने तमिलनाडु और केंद्र सरकार से स्वतंत्रता सेनानी पेंशन की मांग की लेकिन आवेदन पर विचार से पहले ही 1969 में उनकी मौत हो गई।
इसके बाद उनकी विधवा ने पेंशन की अपील की लेकिन केंद्र ने 1973 से 2003 तक आवेदन लंबित रखा और 2003 में इसे खारिज कर दिया। आवेदन को खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए जज ने केंद्र सरकार को आवेदन करने की तिथि से स्वतंत्रता सेनानी पेंशन स्वीकृति करने का निर्देश दिया।
साथ ही एरियर की गणना कर सालाना 6 फीसदी ब्याज दर के साथ भुगतान का आदेश दिया। जज ने अधिकारियों के लापरवाहीपूर्ण रवैये के चलते गृह मंत्रालय पर 10000 रुपये का जुर्माना लगाया और आदेश की कॉपी मिलने के दो महीने के अंदर यह राशि आवेदनकर्ता को देने का निर्देश दिया।