अखबार में खाना लपेटना खतरनाक क्यों है?
अधिकांश लोगों को लगता है कि अखबार सिर्फ कागज है और उससे कोई नुकसान नहीं हो सकता। लेकिन असली समस्या कागज नहीं बल्कि उसकी छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही और रसायन हैं।
एफएसएसएआई के अनुसार अखबार की स्याही में विभिन्न प्रकार के रंग, पिगमेंट, बाइंडर, प्रिजर्वेटिव और अन्य रासायनिक पदार्थ मौजूद होते हैं। इनमें लेड (सीसा) और अन्य भारी धातुएं भी शामिल हो सकती हैं।
- लेड (Lead/सीसा)- यह एक भारी धातु है जो शरीर में जमा होकर तंत्रिका तंत्र, किडनी और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है।
- कैडमियम (Cadmium)- लंबे समय तक संपर्क में रहने पर किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- क्रोमियम (Chromium)- कुछ रूपों में यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।
- कोबाल्ट (Cobalt)- कुछ प्रकार की स्याही में रंगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
- मिनरल ऑयल (Mineral Oils)- अखबार की स्याही में मौजूद खनिज तेल भोजन में मिल सकते हैं।
- वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (Volatile Organic Compounds-VOCs)- ये रासायनिक पदार्थ लंबे समय तक संपर्क में रहने पर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
- रंग और पिगमेंट (Pigments and Dyes)- स्याही को रंग देने के लिए विभिन्न रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें कुछ हानिकारक तत्व हो सकते हैं।
जब गर्म या तेलयुक्त खाद्य पदार्थ अखबार के संपर्क में आते हैं तो यह स्याही और रसायन धीरे-धीरे भोजन में मिल सकते हैं। उदाहरण के लिए समोसा, कचौड़ी, पकौड़े, भटूरे, जलेबी या अन्य तली हुई चीजें अक्सर गर्म अवस्था में अखबार में लपेटी जाती हैं। गर्मी और तेल इन रसायनों को भोजन में पहुंचाने की प्रक्रिया को और तेज कर देते हैं। यानी जिस अखबार में आपका समोसा लिपटा हुआ है, उसी की स्याही के कुछ तत्व आपके शरीर में भी पहुंच सकते हैं।
कौन-कौन से स्वास्थ्य खतरे हो सकते हैं?
FSSAI और विशेषज्ञों के अनुसार अखबार की स्याही में मौजूद रसायनों के लगातार संपर्क से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
पाचन तंत्र पर असर
दूषित भोजन के सेवन से पेट दर्द, गैस, अपच, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों और बच्चों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
लीवर और किडनी को नुकसान
भारी धातुएं शरीर में धीरे-धीरे जमा होती रहती हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से लीवर और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव
लेड जैसी धातुएं मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकती हैं। बच्चों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है क्योंकि उनके शरीर का विकास अभी जारी होता है।
लंबे समय की बीमारियां
कुछ रसायनों को लंबे समय तक शरीर में जाने देने से गंभीर और पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रथा को बेहद खतरनाक मानते हैं।
...तो क्या केवल स्याही ही बड़ी समस्या है?
अखबार केवल प्रिंटिंग इंक की वजह से खतरनाक नहीं है। एक अखबार छपाई के बाद गोदामों, ट्रकों, वितरण केंद्रों और सड़कों से होकर पाठकों तक पहुंचता है। इस दौरान वह धूल, मिट्टी, नमी, बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषकों के संपर्क में आता है। यानी जिस अखबार में खाना लपेटा जा रहा है, वह पहले से ही कई तरह के रोगजनकों का वाहक हो सकता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों के दूषित होने की आशंका और बढ़ जाती है।
FSSAI का कानून क्या कहता है?
इस मामले में कानून बिल्कुल स्पष्ट है। एफएसएसएआई द्वारा अधिसूचित 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018' के तहत अखबार या इसी तरह की किसी सामग्री का खाद्य पदार्थों को रखने, लपेटने या परोसने के लिए इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है।
नियमों के अनुसार:
- भोजन के सीधे संपर्क में आने वाली हर सामग्री फूड ग्रेड गुणवत्ता की होनी चाहिए।
- पैकेजिंग सामग्री साफ, स्वच्छ और सुरक्षित होनी चाहिए।
- प्रिंटेड सतह का भोजन के सीधे संपर्क में आना नहीं चाहिए।
- अखबार या इसी प्रकार की सामग्री का उपयोग भोजन को रखने या लपेटने के लिए नहीं किया जा सकता।
यानी अगर कोई दुकानदार अखबार में समोसा, जलेबी या अन्य खाद्य सामग्री दे रहा है तो वह खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
क्या एफएसएसएआई ने पहली बार इस तरह की चेतावनी जारी की है?
यह पहली बार नहीं है जब एफएसएसएआई ने इस विषय पर चिंता जताई हो। सितंबर 2023 में एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जी. कमला वर्धन राव ने पूरे देश में उपभोक्ताओं और खाद्य विक्रेताओं से अपील की थी कि वे अखबार का इस्तेमाल भोजन को पैक करने, रखने या परोसने के लिए तुरंत बंद करें।
उन्होंने स्पष्ट कहा था कि अखबार में मौजूद रसायन और भारी धातुएं भोजन में मिलकर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। साथ ही अखबारों के अस्वच्छ संपर्क में आने के कारण खाद्य जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
किन-किन पर लागू होते हैं ये नियम?
यह नियम केवल बड़े रेस्तरां या होटल पर लागू नहीं होते। एफएसएसएआई के निर्देशों के अनुसार निम्न सभी को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- रेहड़ी और फेरी वाले
- चाट और स्नैक्स विक्रेता
- हलवाई
- रेस्तरां
- ढाबे
- क्लाउड किचन
- कैटरिंग सेवाएं
- मिठाई की दुकानें
- खाद्य पैकेजिंग करने वाले अन्य व्यवसाय
यानी कोई भी खाद्य व्यवसाय संचालक अखबार का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने क्या कहा?
सोमवार को हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। परिषद के अध्यक्ष जोगेंद्र कंवर और उपाध्यक्ष रणजीत सिंह धीमान ने कहा है कि प्रदेश में कई स्थानों पर अभी भी खाद्य सामग्री को अखबार में परोसा और पैक किया जा रहा है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
परिषद ने प्रशासन से विशेष निरीक्षण अभियान चलाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों, हलवाइयों और रेहड़ी-फड़ी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे अखबार में परोसा गया भोजन स्वीकार न करें।