फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Chandrayaan-3: विक्रम ने दोबारा लैंडिंग क्यों की, रोवर और लैंडर के स्लीप मोड में जाने के बाद क्या होगा?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 04 Sep 2023 04:50 PM IST

सार

Chandrayaan-3 Update: चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर स्लीप मोड में चले गए हैं। सोमवार सुबह इसरो ने बताया कि लैंडर ने 'किक-स्टार्ट' की प्रक्रिया पूरी की। इसके तहत लैंडर ने एक जंप टेस्ट करते हुए दोबारा चंद्र सतह पर उतरा। इससे पहले रविवार को रोवर स्लीप मोड में चला गया था। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
चंद्रयान-3 - फोटो : AMAR UJALA
चंद्रयान-3 चांद की सतह पर अपने मिशन पर है। इस बीच, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार सुबह बताया कि विक्रम लैंडर ने 'किक स्टार्ट' की प्रक्रिया पूरी की। इसके तहत लैंडर ने एक जंप टेस्ट करते हुए दोबारा चंद्र सतह पर लैंडिंग की। इससे पहले इसरो ने बताया था कि रोवर 'प्रज्ञान' अपना काम पूरा कर स्लीप मोड में चला गया। 

आखिर विक्रम लैंडर में हुई 'किक स्टार्ट' की प्रक्रिया क्या है? इसका महत्व क्या है? रोवर 'प्रज्ञान' की क्या स्थिति है? इसके स्लीप मोड में जाने का क्या अर्थ है? आइये समझते हैं...
विज्ञापन

चंद्रयान-3 - फोटो : AMAR UJALA
चंद्रयान-3 चांद की सतह पर अपने मिशन पर है। इस बीच, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार सुबह बताया कि विक्रम लैंडर ने 'किक स्टार्ट' की प्रक्रिया पूरी की। इसके तहत लैंडर ने एक जंप टेस्ट करते हुए दोबारा चंद्र सतह पर लैंडिंग की। इससे पहले इसरो ने बताया था कि रोवर 'प्रज्ञान' अपना काम पूरा कर स्लीप मोड में चला गया। 

आखिर विक्रम लैंडर में हुई 'किक स्टार्ट' की प्रक्रिया क्या है? इसका महत्व क्या है? रोवर 'प्रज्ञान' की क्या स्थिति है? इसके स्लीप मोड में जाने का क्या अर्थ है? आइये समझते हैं...

चंद्रयान-3 - फोटो : ISRO
विक्रम लैंडर में हुई 'किक स्टार्ट' की प्रक्रिया क्या है?
सोमवार को एक एक्स पोस्ट में इसरो ने जानकारी दी कि विक्रम फिर से चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंड हुआ। विक्रम लैंडर ने अपने मिशन के उद्देश्यों को पूरा कर लिया। यह सफलतापूर्वक एक हॉप प्रयोग यानी जंप टेस्ट से गुजरा।



आगे अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि कमांड पर विक्रम लैंडर ने इंजन चालू किए। उम्मीद के मुताबिक इसने खुद को लगभग 40 सेमी ऊपर उठाया और फिर 30 से 40 सेमी की दूरी पर सुरक्षित रूप से उतर गया। इस प्रक्रिया को एजेंसी ने किक स्टार्ट बताया है। 

चंद्रयान-3 - फोटो : ISRO
इसका महत्व क्या है?
राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने किक स्टार्ट प्रक्रिया के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह भविष्य में चांद की सतह से नमूने भेजने में सहायक होगी। इसके साथ ही इसरो ने बताया कि किक स्टार्ट से मानव मिशनों को भी मदद मिलेगी। 

विक्रम लैंडर - फोटो : ISRO
विक्रम लैंडर भी स्लीप मोड में 
इसरो ने बताया कि विक्रम लैंडर भी सोमवार सुबह आठ बजे स्लीप मोड में चला गया। इससे पहले, ChaSTE, RAMBHA-LP और ILSA पेलोड ने नई जगह पर इन-सीटू प्रयोग किए। इसरो के अनुसार, एकत्र किया गया डाटा पृथ्वी पर प्राप्त हो चुका है।

एजेंसी ने आगे बताया कि पेलोड अब बंद कर दिए गए हैं। वहीं लैंडर रिसीवर चालू रखे गए हैं। एक बार सौर ऊर्जा और बैटरी खत्म होने पर विक्रम प्रज्ञान के बगल में सोएगा। इसरो के मुताबिक, 22 सितंबर के आसपास उनके जागने की उम्मीद है।

चंद्रयान-3 - फोटो : इसरो
रोवर 'प्रज्ञान' की क्या स्थिति है? 
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया था कि रोवर ने अपना काम पूरा कर लिया है और इसे अब सुरक्षित रूप से पार्क किया गया है। प्रज्ञान को स्लीप मोड में सेट किया गया है। इससे के मुताबिक, रोवर को सुलाने की प्रक्रिया इसलिए की गई क्योंकि चंद्रमा पर अब रात हो गई है। 

इससे पहले चांद की सतह पर घूमते हुए रोवर ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर एक अद्भुत घटना को रिकॉर्ड किया। इसे एक प्राकृतिक घटना माना जा रहा है और इसरो इस घटना के स्त्रोत के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, रोवर प्रज्ञान ने चांद पर एक खास कंपन को रिकॉर्ड किया है। 

चंद्रयान 3 - फोटो : सोशल मीडिया
स्लीप मोड में जाने का क्या अर्थ है, क्या अब रोवर दोबारा काम करेगा? 
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि फिलहाल बैटरी पूरी तरह से चार्ज है। सौर पैनल 22 सितंबर को अगले अपेक्षित सूर्योदय पर रोशनी हासिल करने की प्रतीक्षा में है। वहीं रिसीवर को भी चालू रखा गया है। 

एजेंसी ने आगे यह भी बताया है कि असाइनमेंट के दूसरे सेट के लिए रोवर के जागने की उम्मीद है। हालांकि, चंद्रयान-3 के रोवर 'प्रज्ञान' के न जागने  की स्थिति को समझाते हुए इसरो ने कहा कि यह हमेशा के लिए चांद पर भारत द्वारा भेजे गए एक दूत के रूप में वहां रहेगा।

लैंडर और रोवर को हमारी पृथ्वी के 14 दिन यानी चंद्रमा पर एक दिन तक कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि, दोनों 12वें दिन ही स्लीप मोड में चले गए। इसके बारे में चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट के प्रमुख वीरमुथुवेल ने कहा, 'हम पहले दो और आखिरी दो दिनों की गिनती नहीं कर सकते। चंद्र दिवस 22 अगस्त को शुरू हुआ और हमारी लैंडिंग लगभग दूसरे दिन के अंत में हुई थी। वहां से, विक्रम और प्रज्ञान दोनों ने हमारी उम्मीदों से बढ़कर असाधारण प्रदर्शन किया है। मिशन के सभी उद्देश्य पूरे हो गए हैं।

चंद्रमा पर अपने छोटे से जीवन में प्रज्ञान ने दो सितंबर तक 100 मीटर से अधिक की यात्रा पूरी कर ली थी। वीरमुथुवेल ने बताया, 'अगर हम विशेष रूप से रोवर को देखें, तो हम केवल 10 दिनों में 100 मीटर से अधिक की दूरी तय करने में कामयाब रहे। वहीं, कई अन्य मिशन जो लंबे समय तक चले, यहां तक कि छह महीने तक, केवल 100-120 मीटर की दूरी ही तय कर पाए।' 

Chandrayaan 3 - फोटो : Istock
क्या है चंद्रयान-3 मिशन ?
चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है, जिसने चंद्रमा की सतह पर उतरकर वैज्ञानिक परीक्षण किए। मिशन ने 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा केन्द्र से उड़ान भरी थी और योजना के अनुसार 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरा था। इस मिशन से भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके साथ ही चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बन गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next