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NDA vs INDIA: नए गठबंधन का नाम 'इंडिया' कैसे पड़ा, आखिर क्यों बिखर गया था यूपीए, अब कौन सा फ्रंट कितना मजबूत?

Wed, 19 Jul 2023 03:07 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

NDA vs INDIA: बंगलूरू में हुई बैठक में विपक्षी दलों के महागठबंधन को नया नाम मिल गया। इसे अब INDIA यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलना कांग्रेस का यूपीए की छवि को दोबारा बनाने का तरीका भी हो सकता है, जिस पर भाजपा ने अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
 
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इंडिया बनाम एनडीए - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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2024 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के 26 विपक्षी दलों ने भाजपा नीत एनडीए को चुनौती देने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी पर रणनीति बनाने के लिए इन दलों द्वारा बंगलूरू में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई। इस जमावड़े की सबसे बड़ी हाइलाइट गठबंधन का नया नाम 'INDIA' रहा। 

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गठबंधन को नाम के रूप में नई पहचान दशकों पुराने 'यूपीए' की जगह मिली है। इस बीच हमें जानना जरूरी है कि विपक्षी दलों के नया गठबंधन क्या है? इस पर राजनीतिक दलों ने क्या प्रतिक्रिया दी? यूपीए से इंडिया तक गठबंधन का सफर कैसा रहा? नाम बदलने की वजह क्या हो सकती है? 'इंडिया' बनाम 'एनडीए' में किसकी कितनी ताकत? 

INDIA: Mamata Banarjee with Rahul Gandhi - फोटो : Agency
विपक्षी दलों के नया गठबंधन क्या है?
सोमवार और मंगलवार को बंगलूरू में हुई बैठक में विपक्षी दलों के महागठबंधन को नया नाम मिल गया। इसे अब INDIA यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस के नाम से जाना जाएगा। हिंदी में इसे भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन नाम दिया गया है। 26 दलों के नेता इस नाम पर सहमति बना चुके हैं। 



बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान खरगे ने कहा, 'हर कोई गठबंधन के लिए एक नाम रखने पर सहमत हुआ है। पहले हमें यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) कहा जाता था। अब हमें भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) कहा जाएगा।'

उद्धव ठाकरे। - फोटो : Social Media
नए नाम पर विपक्षी दलों ने क्या कहा? 
विपक्ष के महागठबंधन के नाम पर भी मुहर लगी, तो अलग-अलग दलों ने इसको लेकर प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता माणिक टैगोर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जीतेगा इंडिया। वहीं टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने ट्वीट किया 'चक दे इंडिया'। शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम सभी INDIA के लिए लड़ रहे हैं। हमारी लड़ाई तानाशाही के खिलाफ है, इसलिए हम साथ आए हैं। यूपी की पार्टी आरएलडी ने कहा कि हमारा INDIA जीतेगा। 

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : Himanta Biswa Sarma/Twitter
नाम पर भाजपा ने क्या कहा? 
विपक्षी दलों के गठबंधन के नए नाम 'INDIA' पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कटाक्ष किया। उन्होंने दावा किया कि अंग्रेजों ने देश का नाम ‘इंडिया’ रखा था। हमें औपनिवेशिक विरासतों से राष्ट्र को मुक्त करने के लिए लड़ना चाहिए। 

वहीं भाजपा ने एक ट्वीट किया, 'जिस 'INDIA' को दुनियाभर में बदनाम करते फिरते हैं, अपने अस्तित्व और परिवारों को बचाने के लिए उसके नाम का ही सहारा लेना पड़ा।'

विपक्षी पार्टियों के नेता - फोटो : सोशल मीडिया
आखिर गठबंधन का नाम 'यूपीए' से 'इंडिया' कैसे हुआ?
जून में पटना बैठक के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने संकेत दिया था कि समूह के लिए एक नया नाम सामने आने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 'देशभक्त लोकतांत्रिक गठबंधन' या पीडीए नाम पर विचार किया जा रहा था।

इससे पहले कांग्रेस दो बार यूपीए की छत्रछाया में केंद्र में सरकार बना चुकी है। हालांकि, 2014 के बाद गठबंधन टूट गया और पार्टी के अपने कई पूर्व सहयोगियों के साथ संबंध खराब हो गए।

दिसंबर 2021 में, भाजपा के खिलाफ सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट होने की आवश्यकता पर जोर देते हुए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा था 'यूपीए क्या है? कोई यूपीए नहीं है।' पश्चिम बंगाल सीएम की टिप्पणी इसलिए भी अहम थी कि क्योंकि वह खुद एक समय यूपीए का हिस्सा थीं। उस वक्त उनके बयान के एक संकेत के रूप में देखा गया था कि कांग्रेस अपने दम पर भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकती। 

2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की। कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव के बाद एक गठबंधन बनाया गया जिसमें 14 दल शामिल थे - राजद, डीएमके, एनसीपी, पीएमके, टीआरएस, जेएमएम, एलजेपी, एमडीएमके, एआईएमआईएम, पीडीपी, आईयूएमएल, आरपीआई (ए), आरपीआई (जी) और केसी (जे)। इसके अलावा चार वामपंथी दलों सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक ने बाहर से सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन का समर्थन किया।

हालांकि, गठबंधन में एकरूपता ज्यादा दिन नहीं चल सकी और कुछ सहयोगियों ने यूपीए का साथ छोड़ना शुरू कर दिया। इसे सबसे बड़ा झटका 2008 में लगा जब चार वामपंथी दलों ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। 2009 में कांग्रेस सत्ता में वापस आ गई, लेकिन यूपीए गठबंधन में कम पार्टियां थीं। इस बार केवल पांच पार्टियों टीएमसी, एनसीपी, डीएमके, नेशनल कॉन्फ्रेंस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने कांग्रेस के साथ सरकार में हिस्सा लिया। एआईएमआईएम, वीसीके, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यूपीए-2 का हिस्सा थे लेकिन इनके हिस्से केंद्र में कोई मंत्री पद नहीं आया। बाद में टीएमसी, डीएमके, एआईएमआईएम, झारखंड की जेवीएम-पी सभी ने एक-एक कर यूपीए से अपनी राहें जुदा कर लीं। 

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा और उसे केवल 44 सीटें मिलीं। भले ही गठबंधन को अभी भी यूपीए कहा जाता था, लेकिन तकनीकी रूप से 2014 के बाद कोई यूपीए नहीं था।

कांग्रेस ने घोषणा की है कि इस बार वह नए गठबंधन का नेतृत्व नहीं करना चाहती है। खरगे ने कहा कि उनकी पार्टी को सत्ता या प्रधानमंत्री पद में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम राज्य स्तर पर हममें से कुछ के बीच मतभेदों से अवगत हैं; ये वैचारिक नहीं हैं।'

नए समूह के नेतृत्व के सवाल पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 11 सदस्यीय समन्वय समिति गठित की जाएगी। मुंबई में उस बैठक में, तय किया जाएगा कि 11 कौन होंगे, संयोजक कौन होंगे, आदि।

इंडिया - फोटो : अमर उजाला
नाम बदलने की वजह क्या हो सकती है?
नाम बदलना कांग्रेस का यूपीए की छवि को दोबारा बनाने का तरीका भी हो सकता है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा अक्सर वंशवाद की राजनीति और भ्रष्टाचार को लेकर यूपीए का मजाक उड़ाती रही है। कल प्रधानमंत्री ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए इसे भ्रष्टाचार और वंशवाद की राजनीति कहा। पीएम ने बंगलूरू में विपक्ष की बैठक का जिक्र करते हुए कहा, 'जब वे सभी एक फ्रेम में दिखाई देते हैं, तो देश को केवल भ्रष्टाचार दिखाई देता है। लोग इसे भ्रष्टाचार का गठबंधन कहते हैं। 
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एनडीए बनाम इंडिया - फोटो : AMAR UJALA
कौन सा फ्रंट कितना मजबूत?
लोकसभा चुनाव से पहले उन दलों की भी पूछ बढ़ी है जिनका संसद के दोनों सदनों में कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं है। मंगलवार को एनडीए और विपक्ष के बीच हुए शक्ति प्रदर्शन में दोनों खेमों की बैठक में ऐसे 34 दल शामिल हुए जिनका लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व ही नहीं है। इसके अतिरिक्त दोनों खेमों में चार ऐसे भी दल हैं जिनका प्रतिनिधित्व बस उच्च सदन तक ही सीमित है।

विपक्षी खेमे के बिना प्रतिनिधित्व वाली पार्टियां 
विपक्षी दलों की बैठक में 10 दल ऐसे थे, जिनका संसद के दोनों सदनों में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इनमें पीडीपी, सीपीआईएमएल, एमएमके, एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, केरला कांग्रेस, केएमडीके, अपना दल कमेरावादी, एआईएफबी शामिल हैं। इसके अलावा राजद, रालोद का लोकसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

एनडीए के 24 दलों का एक भी लोकसभा सांसद नहीं
एनडीए की बैठक में शामिल हुए 24 दलों का निचले सदन में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। आरपीआई आठवले और तमिल मनीला कांग्रेस का प्रतिनिधित्व राज्यसभा तक सीमित है। दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व शून्य दलों में जेजेपी, आईपीएफटी, बीपीपी, पीएमके, एमजीपी, निषाद पार्टी, यूपीपीएल, एआईआरएनसी, अकाली दल ढींढसा, जनसेना, हम, आरएलएसपी, बीडीजेएस, केरल कांग्रेस थॉमस, जीएनएलएफ, जेआरएस, यूडीपी, एचएसडीपी, जनसुराज पार्टी, एसबीएसपी, राष्ट्रीय समाज पक्ष, हरियाणा लोकहित पाटी, कीपुथिया तमिलगम और प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल हैं।
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