कर्नाटक बेंच के नजरिए के मुताबिक पराठा एचएसएन सिस्टम (हारमोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नॉमनक्लेचर) के किसी शीर्षक के तहत कवर नहीं होता है और इसे खाने योग्य बनाने के लिए और परिवर्तित किया जाता है। इसलिए पराठे पर 2106 शीर्षक के तहत जीएसटी लगाने की जरूरत है।
1905 शीर्षक के तहत केक, पेस्ट्री और ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं जो पहले से लगभग तैयार होते हैं और जो खाने के लिए एकदम तैयार होते हैं। खाखरा, सामान्य रोटी और प्लेन चपाती पूरी तरह से तैयार और सिकी हुई होती हैं। इंसान के लिए खाने योग्य बनाने के लिए ज्यादा तैयारी नहीं करनी होती हैं।
अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग का कहना है कि गेहूं पराठा और मालाबार पराठा जैसे खाद्य पदार्थ खाखरा, प्लेन चपाती और रोटी से अलग ही नहीं है बल्कि सामान्य बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल नहीं किए जाते और इन खाद्य पदार्थों को खाने योग्य बनाने के लिए अलग से तैयार करना पड़ता है।
खाने के ज्यादातर पदार्थ जो कि प्रोसेस्ड नहीं होते और आवश्यक हैं, उनपर जीएसटी की कोई दर नहीं लगती है। प्रोसेस्ड फूड पर पांच फीसद, 12 फीसदी और 18 फीसदी तक का टैक्स लगता है। उदाहरण के लिए समझें कि पापड़, ब्रेड पर कोई जीएसटी नहीं लगता लेकिन पिज्जा ब्रेड पर पांच फीसदी जीएसटी लगता है।
1905 शीर्षक के तहत हारमोनाइज्ड कमोडिटी डिस्क्रिप्शन और कोडिंग सिस्टम ने पिज्जा ब्रेड, खाखरा, प्लेन चपाती, रोटी, रस्क, टोस्टेड ब्रेड को पांच फीसदी जीएसटी वाली श्रेणी में रखा है। इसी की तरह खाने के लिए तैयार श्रेणी के तहत बिना ब्रांड वाली नमकीन, भुजिया, मिक्सर पर पांच फीसदी टैक्स लगता है। जबकि ब्रांडेड नमकीन, भुजिया, मिक्सर पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है।
हालांकि टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स स्लैब के कम नंबर और एक समान दर से खाद्य सामानों को वर्गों में बांटने की परेशानी थोड़ी कम हो जाएगी। सरकारी अधिकारी ने कहा कि खाद्य सामान को अलग-अलग वर्गीकृत करने का ये माननीय तरीका है और दूसरे देशों में भी ऐसे तरीकों को अपनाया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि फ्रीज में रखा हुआ पराठा संरक्षित, सील, पैकड और ब्रांडेड होता है, इसलिए यह ज्यादा ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मुख्य खाद्य पदार्थ भी नहीं है जिसे सिर्फ टैक्स भरने वाले लोग का समूह ही ग्रहण करता है।
हालांकि दूध जैसे खाने के पदार्थ टैक्स फ्री हैं लेकिन टेट्रापैक में मिलने वाला दूध जीएसटी के दायरे में आता है, इस पर पांच फीसदी टैक्स लगता है और घनीभूत किए हुए दूध पर 12 फीसदी टैक्स लगता है। एफएमसीजी कंपनियों ने प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री के संगठित क्षेत्र का शामिल कर लिया है और पैकेज्ड फूड की ज्यादा बिक्री कर उचित लाभ कमा रही हैं।