भारत के पास एक दरोगा ऐसा है, जिससे पाकिस्तान घबराता है तो चीन के रणनीतिकार भी सावधान रहते हैं। चाहे देश की आंतरिक सुरक्षा का संकट हो या बाहरी, इस दरोगा को अंतिम इलाज के रूप में देखा जाता है। कोई और नहीं देश के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बात हो रही है। अजीत डोभाल देश की वह शख्सियत बन चुके हैं, जिन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय से रक्षात्मक दृष्टिकोण की परंपरा को रक्षात्मक आक्रामक नीति में बदलकर मोदीवाद के सूत्रधार का दर्जा पा लिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत डॉक्टरीन में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर अजीत डोभाल ने कामकाज में काफी इजाफा कर लिया है। वह देश के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं जो आंतरिक से लेकर सुरक्षा के हर मामले में सक्रिय हैं। चाहे पूर्वी दिल्ली में दंगे के बाद लोगों के बीच में जाकर विश्वास बहाली का प्रयास हो या जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने, राज्य की वैधानिक स्थिति में बदलाव के बाद लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास। इराक के तिकरित में आईएसआईएस के चंगुल में फंसी 46 भारतीय नर्सों का मामला हो या म्यांमार की सीमा में घुसकर सैन्य ऑपरेशन। 2016 में नियंत्रण रेखा पार करके पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक रही हो या फिर 2019 में ऑपरेशन बालाकोट। अजीत डोभाल सभी में सक्रिय रहे हैं।