पूर्व प्रधान न्यायाधीश तथा राज्यसभा सदस्य रंजन गोगोई ने बुधवार को कहा कि 'एक्टिविस्ट न्यायाधीशों' और उन लोगों से सवाल क्यों नहीं पूछे जाते जो सेवानिवृत्ति के बाद वाणिज्यिक मध्यस्थता के कामकाज लेते हैं। गोगोई के इस बयान को इसलिये महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा में उनके मनोनयन की विभिन्न सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने आलोचना की थी।
गोगोई 'समकालीन चुनौतियों का सामना करते हुए हमारे संविधान के तहत एक स्वतंत्र न्यायपालिका सुनिश्चित करना' विषय पर एक कानूनी समाचार पोर्टल के सहयोग से आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है, लेकिन एक ईमानदार, बौद्धिक और सार्थक आलोचना होनी चाहिये।
उन्होंने कहा, 'व्यवस्था (न्यायिक) आलोचना के खिलाफ नहीं है और इसमें सुधार के लिए गुंजाइश है, लेकिन जहां तक किसी निर्णय का संबंध है तो उसपर ईमानदार, बौद्धिक और सार्थक बहस होनी चाहिये। किसी मकसद की बात न थोपें। यह विनाशकारी है।'