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क्यों नीतीश और शरद यादव के बीच आईं दूरियां, ये हैं पांच कारण

Thu, 10 Aug 2017 12:20 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
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कभी नीतीश कुमार के साथ हर लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले जेडीयू नेता शरद यादव अब उन्हें छोड़कर अपनी राह अलग करने की तैयारी कर चुके हैं। नीतीश के लालू को छोड़कर भाजपा के साथ हाथ मिलाने के बाद से ही नाराज चल रहे शरद यादव ने अब पूरी तरह बगावती रुख अख्तियार कर लिया है।
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नीतीश के फैसले के खिलाफ शरद यादव ने अब बिहार के सात जिलों में जनसंवाद यात्रा निकालने की घोषणा कर दी है। दूसरी ओर नीतीश कुमार भी अब किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं, इसका अंदाजा उस समय लगा जब उन्होंने शरद के करीबी और प्रदेश प्रभारी अरुण श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया।

हालांकि अरुण पर आरोप तो गुजरात राज्यसभा चुनावों में पार्टी लाइन से अलग चलने का था लेकिन साफ इशारा शरद यादव के लिए ही था। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि कभी एक दूसरे की बाहें पकड़कर और हर फैसले में एक दूसरे के साथ खड़े रहने वाले नीतीश और शरद ने अपनी राहें जुदा करने का फैसला कर लिया। क्या मामला सिर्फ आपसी विश्वास खत्म होने का है या कुछ और, आइए डालते हैं उन्हीं कारणों पर एक निगाह।
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शरद यादव को हटाकर खुद जेडीयू अध्यक्ष बन गए थे नीतीश कुमार

फाइल फोटो - फोटो : Getty images
शरद यादव और नीतीश कुमार में दूरियों की नींव उसी समय पड़ चुकी थी जब सालभर पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शरद यादव को अध्यक्ष पद से हटाकर खुद पूरी तरह पार्टी की बागडोर संभाल ली थी। इसके बाद से ही शरद पार्टी और बिहार में अलग थलग से पड़ गए थे। हालांकि राज्यसभा में वह जेडीयू का चेहरा थे लेकिन बिहार में उनकी दखलअंदाजी काफी कम हो गई थी।

शरद से बिना बातचीत के लिया लालू से अलग होने का फैसला
शरद यादव की सबसे बड़ी टीस ये भी रही कि नीतीश ने एक झटके में लालू यादव से अलग होने का फैसला भी कर लिया लेकिन इसकी कानों कान खबर शरद यादव को नहीं दी गई। नीतीश ने इस फैसले से शरद यादव को पूरी तरह दूर रखा जबकि शरद लालू यादव के साथ मिलकर देश में भाजपा के खिलाफ तीसरे मोर्चे की मुहिम को बढ़ाए हुए थे। 
लालू परिवार के किसी भ्रष्टाचार पर शरद ने नहीं दिया कोई बयान
ऐसा नहीं है कि सिर्फ शरद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज थे, बल्कि नीतीश कुमार भी शरद यादव से नाराज चल रहे थे। इसकी बड़ी वजह थी लालू परिवार के भ्रष्‍टाचार के मुद्दे पर एक बार भी मुंह न खोलना जबकि खुद नीतीश कुमार खुलकर इस पर अपनी बात रख रहे थे। वहीं शरद यादव ने लालू परिवार के मुद्दे से दूरी बना कर रखी। यहां तक की वह राज्यसभा में कई बार लालू परिवार पर हो रही कार्रवाई का बचाव करते भी दिखे। शरद का यही रुख नीतीश कुमार को अखर गया, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति लेकर चल रहे थे।
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भाजपा के साथ जाने के इसलिए भी खिलाफ हैं शरद

- फोटो : amar ujala
नीतीश के भाजपा के साथ आने से शरद यादव के खफा होने की एक और बड़ी वजह है, वो है केंद्र की राजनीति में लगातार शरद यादव भाजपा के खिलाफ तीसरे मोर्चे की वकालत कर रहे थे। इस मुद्दे पर वह लगातार सक्रिय बने हुए थे, जिसमें वह दूसरे दलों के नेताओं को भी जोड़ रहे थे। इसके अलावा राज्यसभा में होने के कारण भाजपा के खिलाफ अपनी पार्टी और विपक्ष की तरफ से सबसे ज्यादा विरोध वह ही करते थे। कई बड़े मुद्दों पर वह खुलकर भाजपा और केंद्र सरकार की मुखालफत कर चुके हैं ऐसे में अब उसी पार्टी के साथ बैठकर उसका समर्थन करना शरद के लिए असहज करने वाला था।

गुजरात राज्यसभा चुनाव ने तय कर दी जुदाई की राह
नीतीश और शरद यादव के रिश्तों में सबसे बड़ी खटास की वजह बना गुजरात चुनाव। जहां पार्टी के एकमात्र विधायक छोटू भाई वासवा ने पार्टी व्हिप के विरुद्ध जाकर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वोट किया, जबकि दिल्‍ली में बैठे जेडीयू महासचिव केसी त्यागी यही दावा करते रहे कि उनकी पार्टी का वोट भाजपा उम्‍मीदवार को ही गया है। ऐसे में वसावा के दावे के बाद पार्टी की काफी किरकिरी हुई। इस मुद्दे पर पार्टी ने सख्त एक्‍शन लेते हुए पार्टी प्रभारी अरुण श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया। श्रीवास्तव को शरद यादव का करीबी माना जाता है, जिसके बाद अंदेशा जताया जा रहा था कि शरद के इशारे पर ही वसावा ने कांग्रेस उम्‍मीदवार को वोट दिया। इस आशंका को तब भी बल मिला जब शरद ने अहमद पटेल के चुने जाने के बाद पार्टी के खिलाफ जाकर उन्हें बधाई दी। 
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