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आखिर उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर क्यों लड़ लें भाजपा के टिकट पर?

Wed, 17 Apr 2019 06:08 AM IST
गौरव द्विवेदी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ओम प्रकाश राजभर (फाइल फोटो)
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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और उ.प्र. के मंत्री ओम प्रकाश राजभर बागी हो गए। उन्होंने 39 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। उ.प्र. के पूर्वांचल क्षेत्र में राजभर समाज कई जिलों में फैला है। गाजीपुर में इसकी संख्या ठीक-ठाक है और माना जा रहा है कि ओम प्रकाश राजभर की नाराजगी का असर गाजीपुर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को झेलना पड़ सकता है।

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क्यों नाराज हैं राजभर?

राजभर अपनी तुलना अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल से कर रहे हैं। अपना दल को भाजपा ने समझौते के तहत तीन सीटें दे दी हैं। इनमें मिर्जापुर और राबटर्सगंज की सीट से अनुप्रिया की पार्टी अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में है, जबकि प्रतापगढ़ की लोकसभा सीट से अपना दल के विधायक संगम लाल गुप्ता भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है। इसी तरह से भाजपा ने डा. संजय निषाद की निषाद पार्टी से भी एक सीट पर समझौता किया है। समझौते में निषाद पार्टी ने भाजपा में अपना विलय कर लिया है। 

संतकबीर नगर से डा. संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को भाजपा के टिकट पर मैदान में उतारा है।  राजभर का मानना है कि उनकी ताकत अपना दल और निषाद पार्टी की तुलना में काफी बड़ी है। उ.प्र. में राजभर समुदाय के लोग ठीकठाक मात्रा में हैं। कोहार, कुम्हार समेत अन्य जातियों के लोग राजभर की सुहेलदेव पार्टी से जुड़े हैं। ऐसे में राजभर की मांग पहले से ही कम से कम दो सीटों की रही है। इसके अलावा वह अपने उम्मीदवारों को अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़वाना चाहते हैं। ताकि भविष्य में भी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का रास्ता बने रहे।
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पहले भी बोलते रहे हमला

ओम प्रकाश राजभर उ.प्र. सरकार में मंत्री रहने के बाद भी राज्य सरकार के खिलाफ बोलते रहे हैं। वह कई बार अलग होने की चेतावनी भी दे चुके हैं। ओम प्रकाश राजभर का कहना है कि राजभर समाज और इससे जुड़ी जातियों जितनी हिस्सेदारी रखती हैं, उतना इन्हें सम्मान नहीं मिल पा रहा है। भर अन्य समाज पिछड़ी जातियों में आता है। इसके नेता ओम प्रकाश राजभर उ.प्र. से भाजपा से समझौते में कम से कम दो सीटों की उम्मीद कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी घोसी के अलावा एक और सीट सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को मिलेगी। इतना ही नहीं पार्टी के प्रत्याशी अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि सूत्र बताते हैं कि डैमेज कंट्रोल की कोशिश अभी भी जारी है।

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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इस समय भाजपा के गले की फांस बन गये हैं। वे इस लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए कम से कम दो सीटों की मांग कर रहे थे, लेकिन भाजपा उन्हें एक सीट से अधिक देने को तैयार नहीं हुई। अब भाजपा उनकी पार्टी के किसी उम्मीदवार को घोसी सीट पर अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाना चाहती है, लेकिन राजभर इसके लिए तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि यूपी की सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा हो जाने के बाद भी पार्टी ने अभी घोसी सीट पर किसी उम्मीदवार को नहीं उतारा है। 

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, यूपी की सभी सीटों के लिए आज उम्मीदवारों के नामों की अंतिम सूची जारी कर दी जानी थी। सीटों पर अंतिम राय बनाने के लिए रविवार देर शाम ओम प्रकाश राजभर को मनाने की कई दौर की कोशिशें हुईं। इस कोशिश में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए, लेकिन राजभर भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए। 

पूर्वी उत्तर प्रदेश में ठीक-ठाक सीटों पर अपनी उपस्थिति रखने वाली सुभासपा ने अभी से अपने बागी तेवर दिखाने शुरु कर दिये हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर भाजपा ने उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया तो सुभासपा पूर्वी यूपी की कम से कम दस सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इसके अलावा उसके कांग्रेसी खेमे में जाने की संभावना भी बनी हुई है। इस पर एक-दो दिन में ही फैसला हो जाएगा।  
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