देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चले अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी (आप), जिसने अपने पहले और दूसरे चुनाव में मिले एक एक पैसे के चंदे का हिसाब जनता के बीच रखा था। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल लोगों से कहते थे कि दूसरी पार्टियां अपने चंदे की जानकारी छिपाती हैं, लेकिन 'आप' ने अपनी वेबसाइट पर चंदे से जुड़ी तमाम सूचनाएं सार्वजनिक कर रखी हैं। 2015 के चुनाव में आप को प्रतिदिन जितना डोनेशन मिलता था, वह सूचना अपने आप ही वेबसाइट पर अपलोड हो जाती थी।
बहुत से लोगों ने ऑन लाइन एक रुपया चंदा भी दिया। वह जानकारी भी तुरंत सार्वजनिक हो रही थी। इस बार 'आप' की वेबसाइट पर डोनेशन लेने का प्रावधान तो है, मगर किस व्यक्ति ने कब और कितना चंदा दिया है, यह जानकारी अब नहीं मिल सकती। पिछले विधानसभा चुनाव में चंदा जुटाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने एक खास रणनीति अख्तियार की थी। जैसे ही वे लोगों से अपील करते थे, उनकी पार्टी के खाते में अच्छा खासा चंदा आ जाता था। केजरीवाल ने डिनर के जरिए भी चंदा जुटाया। उनके साथ साथ आप के सभी प्रत्याशी भी चंदा जुटाने के लिए लंच-डिनर कार्यक्रम आयोजित लगे।
इसके पीछे आप का मकसद यह रहा कि जब सभी प्रत्याशी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में लंच-डिनर आयोजित करेंगे तो उससे पार्टी को दोहरा फायदा होगा। पहला, चंदा एकत्रित होगा और दूसरा लोगों से मेल जोल बढ़ेगा। इसके अलावा पार्टी को अपनी भावी योजनाओं पर जनता की राय व सुझाव भी मिल सकेंगे। हालांकि सबसे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने डिनर कार्यक्रम शुरू किया था। इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेने वालों से प्रति प्लेट के हिसाब से एक तय राशि ले ली जाती थी। उस दौरान आप के मुख्य प्रवक्ता रहे योगेंद्र यादव और दूसरे नेताओं ने भी ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित कर चुनाव के लिए फंड जुटाया था। भले ही आप नेता यह कहते रहे कि इससे आप द्वारा तय चंदे का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, लेकिन पार्टी कोष में अच्छी-खासी राशि एकत्रित हो जाती थी।
इस तरह के कार्यक्रमों में ज्यादातर उद्योगपति, बैंकर, शिक्षक और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उच्चे पदों पर काम करने वाले व्यक्ति शामिल होते थे। गत विधानसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर चुनाव के लिए फंड जुटाया था। लंच-डिनर कार्यक्रम के कूपन का रेट सभी क्षेत्रों में अलग-अलग रखा गया। 2015 के चुनाव में आप को विदेशों से जो चंदा मिलता रहा है, उसमें सबसे ज्यादा योगदान अमेरिका में रहने वाले भारतीयों का देखने को मिलता था। चंदा देने वाले पहले पांच देशों में आस्ट्रेलिया का नाम भी शामिल रहता था। संयुक्त अरब अमीरात से भी ठीक ठाक डोनेशन मिली थी।
चंदा जुटाने के मुद्दे पर भाजपा व 'आप' हो गई थी आमने-सामने
गत विधानसभा चुनाव में भाजपा ने आप को मिले चंदे की पारदर्शिता पर कई तरह के सवाल उठाए थे। यह भी आरोप लगा था कि आम आदमी पार्टी अपने चंदा दाताओं के नामों का खुलासा नहीं कर रही है। हालांकि भाजपा ने यह सवाल अरविंद केजरीवाल के उस डिनर कार्यक्रम के बाबत उठाया था, जिसमें दिल्ली के लोगों ने उनकी पार्टी को चंदा दिया था। उस वक्त आप के नेता रहे योगेंद्र यादव ने कहा था कि भाजपा ने चंदा मिलने के मामले में आप पर जो आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। वे भाजपा को चुनौती देते हैं कि वह अपने प्रेरित और बेखबर आरोपों को साबित करे। आम आदमी पार्टी ही देश में एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके चंदे का विवरण उसकी वेबसाइट पर है। इसे कोई भी व्यक्ति देख सकता है। आप को मिलने वाले चंदे की जांच पहले भी कराई जा चुकी है।
आप ने आरोपों वाली एक सूची भाजपा के सामने रखकर मांगा था जवाब
आप ने कहा, क्या यह सच नहीं है कि 2014 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम के उल्लंघन के एक मामले में विदेशी धन प्राप्त करने के लिए भाजपा को दोषी पाया था। दूसरा, भाजपा ने गोवा स्थित टिम्बलो प्राइवेट लिमिटेड की मालकिन राधा टिमब्लो से 1.18 करोड़ रुपए दान स्वरूप स्वीकार किए थे। उस दौरान इस कंपनी को केद्र सरकार ने विदेशों में काला धन खाता धारकों की सूची में नामित किया था। तीसरा आरोप, भाजपा ने डाउ केमिकल्स से दान स्वीकार किया है। डाउ केमिकल्स वही कंपनी है जिसने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने से मना कर दिया था। चौथा, भाजपा को वर्ष 2004 और 2012 के बीच विदेशी चंदे के रूप में 19 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपए मिले हैं। पार्टी चंदा देने वाले लोगों के नामों का खुलासा करे। पांचवां, भाजपा को दान का 75 फीसदी हिस्सा अज्ञात स्रोतो से प्राप्त होता है। इस बाबत दोनों पार्टियों के बीच लम्बे समय तक आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
क्या इस वजह से केजरीवाल छिपा रहे हैं चंदे की जानकारी
आप नेताओं का कहना है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए राजनीति में आए थे। आज भी लड़ रहे हैं। रही बात चंदे की जानकारी देने की तो हम सभी तरह की सूचनाएं सरकार को दे रहे हैं। सरकार के पास आयकर विभाग है और दूसरी जांच एजेंसियां भी हैं। अगर कहीं उन्हें लगता है कि आप को गलत तरीके से चंदा मिला है तो वे जांच करा सकते हैं। चंदे की जानकारी सार्वजनिक करना इसलिए बंद किया गया था, क्योंकि चंदा देने वाले लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया था। जनता सब समझती है कि यह किसके इशारे पर हो रहा था। कोई भी व्यक्ति जो दस हजार या उससे ज्यादा चंदा आप को देता, उसी वक्त वह सरकारी एजेंसियों के रडार पर आ जाता।
कई लोगों के यहां छापे भी डलवाए गए, जबकि दूसरे ऐसे ही लोगों को एजेंसियों के नोटिस का सामना करना पड़ा। इन सब कारणों के चलते डोनेशन वेबसाइट से वह जानकारी हटाई गई थी। दूसरी ओर कभी अरविंद केजरीवाल के खास विश्वासपात्र रहे डॉ. मुनीष रायजादा जो कि अमेरिका से अपनी जॉब छोड़कर केजरीवाल की मदद करने दिल्ली पहुंचे थे, बताते हैं कि आप ने चंदे में बड़ा घालमेल किया है। उनका आरोप है कि केजरीवाल जानबूझ कर चंदे की जानकारी छिपा रहे हैं। उन्होंने कई साल पहले आप के कथित चंदा घोटाले के खिलाफ एक आंदोलन भी शुरू किया था। अब उन्होंने आप के चंदे को लेकर एक वेब सीरीज भी तैयार की है। इसमें बताया गया है कि आप ने किस तरह से लोगों का चंदा लेकर उनके साथ विश्वासघात किया है। जो पार्टी यह कह कर सत्ता में आई थी कि हम दूसरों से अलग हैं। हमारी पार्टी में सब कुछ सार्वजनिक है, लेकिन अब तीन साल से चंदे की जानकारी छिपाई जा रही है।