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Explainer: जिस परियोजना से बुंदेलखंड का सूखा खत्म होने का दावा, उसका विरोध क्यों, केन-बेतवा लिंक का क्या असर?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 22 Jul 2026 05:46 PM IST

सार

देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर विवादों में है। सरकार का दावा है कि इससे बुंदेलखंड में सिंचाई, पीने के पानी और बिजली की समस्या दूर होगी, लेकिन मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर के प्रभावित परिवार भूमि अधिग्रहण, मुआवजे और पुनर्वास में खामियों का आरोप लगाकर लगातार विरोध कर रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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केन-बेतवा परियोजना - फोटो : Amar Ujala
केन-बेतवा लिंक परियोजना का मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में प्रभावित परिवार लगातार विरोध रहे हैं। करीब  उनका आरोप है कि पुनर्वास, मुआवजा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कई खामियां हैं। परियोजना के विरोध में बराना नदी के बीचों-बीच सांकेतिक चिता आंदोलन भी चला। जिसे बीते रविवार तड़के पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर समाप्त करा दिया। धरना खत्म कराए जाने के बाद भी कुछ प्रभावित परिवार अलग-अलग जगहों पर सांकेतिक विरोध कर रहे हैं। 

आखिर इस परियोजना का विरोध क्यों हो रहा है? प्रभावित लोगों की मांग क्या है? जिस केन-बेतवा लिंक परियोजना विरोध हो रहा है वो क्या है? परियोजना की कुल लागत कितनी है? इसका कितना काम पूरा हो चुका है? सरकार का इसे लेकर क्या कहना है? इस परियोजना से जुड़े क्या नुकसान होने का अनुमान जताया गया है? विरोध करने वालों का क्या कहना है? आइये जानते हैं...
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केन-बेतवा परियोजना - फोटो : Amar Ujala
केन-बेतवा लिंक परियोजना का मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में प्रभावित परिवार लगातार विरोध रहे हैं। करीब  उनका आरोप है कि पुनर्वास, मुआवजा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कई खामियां हैं। परियोजना के विरोध में बराना नदी के बीचों-बीच सांकेतिक चिता आंदोलन भी चला। जिसे बीते रविवार तड़के पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर समाप्त करा दिया। धरना खत्म कराए जाने के बाद भी कुछ प्रभावित परिवार अलग-अलग जगहों पर सांकेतिक विरोध कर रहे हैं। 

आखिर इस परियोजना का विरोध क्यों हो रहा है? प्रभावित लोगों की मांग क्या है? जिस केन-बेतवा लिंक परियोजना विरोध हो रहा है वो क्या है? परियोजना की कुल लागत कितनी है? इसका कितना काम पूरा हो चुका है? सरकार का इसे लेकर क्या कहना है? इस परियोजना से जुड़े क्या नुकसान होने का अनुमान जताया गया है? विरोध करने वालों का क्या कहना है? आइये जानते हैं...

विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है?

केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध करने वाले प्रभावितों का आरोप लगा रहे है कि भूमि अधिग्रहण के बदले उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि पुनर्वास की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि विस्थापन से पहले उनकी सभी मांगों का समाधान किया जाना चाहिए। इसी के खिलाफ जल सत्याग्रह, सूली सत्याग्रह और प्रतीकात्मक चिता-आंदोलन जैसे विरोध किए जा रहे हैं। आंदोलन में बड़ी संख्या में आदिवासी, किसान, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

राज्य सरकार क्या कह रही है?

मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि परियोजना का व्यापक स्तर पर विरोध नहीं हो रहा है। सरकार के मुताबिक विरोध मुख्य रूप से रनझ और मझगवां क्षेत्र के कुछ विस्थापित परिवारों तक सीमित है। सरकार का दावा है कि प्रभावित लोगों को पुनर्वास पैकेज के तहत प्रति व्यक्ति 12.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है और पुनर्वास की प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ रही है।

इसी विवाद और लगातार जारी आंदोलन को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राज्य सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब सरकार केंद्र को यह जानकारी भेजेगी कि विरोध किन कारणों से हो रहा है, कितने लोग प्रभावित हैं और पुनर्वास व मुआवजे की प्रक्रिया किस चरण में है।

केन-बेतवा परियोजना - फोटो : Amar Ujala

केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है?

केन-बेतवा लिंक परियोजना  मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बहने वाली बेतवा नदी तक पहुंचाने के लिए है, ताकि पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों को सिंचाई और पीने का पानी मिल सके। यह परियोजना राष्ट्रीय नदी जोड़ो कार्यक्रम के तहत लागू होने वाली पहली परियोजना है। 

भारत सरकार ने 1980 में राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (NPP) तैयार किया था। इसका मकसद देश की उन नदियों को आपस में जोड़ना है, जहां पानी अधिक है, ताकि उस अतिरिक्त पानी को उन क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके जहां हर साल सूखा और पानी की कमी रहती है।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

बुंदेलखंड देश के सबसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है।
  • यहां बारिश कम और अनियमित होती है।
  •  भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
  •  किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहते हैं।
  • कई इलाकों में पीने के पानी की भी कमी रहती है।
  • खेती प्रभावित होने से लोगों का पलायन भी होता है।
सरकार का कहना है कि केन नदी में मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी उपलब्ध होता है, जिसे बेतवा बेसिन तक पहुंचाकर पानी की कमी दूर की जा सकती है।

परियोजना में क्या बनाया जाएगा?

यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी।

पहला चरण
सबसे महत्वपूर्ण निर्माण होंगे-
  • केन नदी पर दौधन बांध
  • लगभग 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर
  •  करीब दो किलोमीटर लंबी सुरंग
  •  दो जलविद्युत स्टेशन
यही नहर केन नदी का पानी बेतवा नदी तक ले जाएगी।

दूसरा चरण
इसमें तीन प्रमुख संरचनाएं बनाई जाएंगी
  • लोअर ओर बांध
  • कोठा बैराज
  • बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना
इनका उद्देश्य बेतवा बेसिन में पानी का बेहतर वितरण करना है।

केन-बेतवा परियोजना - फोटो : Amar Ujala

परियोजना की लागत कितनी है और कब तक पूरा करने का लक्ष्य?

  • केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में परियोजना को मंजूरी दी थी।
  • कुल अनुमानित लागत: 44,605 करोड़ रुपये
  • केंद्रीय सहायता: 39,317 करोड़ रुपये
  • परियोजना पूरी करने का लक्ष्य: आठ वर्ष
  • इसके लिए एक विशेष संस्था केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण (KBLPA) बनाई गई है, जो परियोजना का निर्माण और निगरानी कर रही है।

केन-बेतवा परियोजना - फोटो : अमर उजाला

किन राज्यों और जिलों को फायदा मिलेगा?

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन जिलों को फायदा होगा। वहीं, उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा जिलों को लाभ होंगे।

परियोजना से क्या लाभ होंगे?

1. सिंचाई
करीब 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलेगी।
  • मध्य प्रदेश: 8.11 लाख हेक्टेयर
  • उत्तर प्रदेश: 2.51 लाख हेक्टेयर
 इससे खेती का क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होने की उम्मीद है।

2. पीने का पानी
लगभग 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
  • मध्य प्रदेश: 41 लाख
  • उत्तर प्रदेश: 21 लाख
3. बिजली उत्पादन
परियोजना से 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने की उम्मीद है।  यानी कुल 130 मेगावाट बिजली पैदा होगी।

4. रोजगार और विकास
सरकार का कहना है कि इससे,
  • खेती बढ़ेगी
  • रोजगार के अवसर बनेंगे
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
  • बुंदेलखंड से पलायन कम होगा

केन-बेतवा परियोजना - फोटो : अमर उजाला

परियोजना कहां तक पहुंची?

  • दौधन बांध का निर्माण 6 मार्च 2025 से शुरू हो चुका है और इसे 5 मार्च 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, केन-बेतवा लिंक नहर के निर्माण के लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया जारी है।
  • परियोजना से 1,913 परिवार प्रभावित होंगे। इनमें अनुसूचित जाति के 271, अनुसूचित जनजाति के 648 और अन्य वर्ग के 994 परिवार शामिल हैं।
  • प्रभावित परिवारों को भूमि मुआवजे का 88.25%, संपत्ति मुआवजे का 95.93% और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) पैकेज का 96.69% भुगतान किया जा चुका है। 
  • पन्ना जिले में भूमि मुआवजे का 89.58%, संपत्ति मुआवजे का 88.14% और R&R पैकेज का 99.84% भुगतान होने की जानकारी दी गई है।
  • इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण, पुनर्वास और पारिस्थितिकी संबंधी योजनाओं के लिए 6,303 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जिसमें से करीब 5,710 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 

केन-बेतवा परियोजना - फोटो : Amar Ujala

परियोजना के पर्यावरणीय नुकसान क्या हैं?

राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट में परियोजना से जुड़े नुकसान के बारे में बताया गया है।
  • पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा डूबेगा: दौधन बांध बनने से पन्ना टाइगर रिजर्व का एक हिस्सा पानी में समा जाएगा। इससे बाघों और दूसरे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होगा।
  • जंगल और पेड़ों का नुकसान: परियोजना के लिए करीब 6,017 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग होगा। इससे बड़े पैमाने पर जंगल प्रभावित होंगे और जैव विविधता पर असर पड़ेगा।
  • वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित होगी: जंगल का कुछ हिस्सा डूबने और नहर बनने से बाघ, तेंदुआ, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के आने-जाने के रास्तों पर असर पड़ सकता है।
  • नदी का प्राकृतिक प्रवाह बदलेगा: बांध बनने से केन नदी के बहाव में बदलाव आएगा, जिससे नदी की पारिस्थितिकी और जलीय जीवों पर प्रभाव पड़ सकता है। यह पहलू ईआईए में भी आंका गया है।
  • निचले इलाकों (डाउनस्ट्रीम) पर असर: बांध के बाद नीचे की ओर पानी का प्रवाह बदलने से वहां की खेती, आर्द्रभूमि वेटलैंड और नदी पर निर्भर जीव-जंतुओं पर असर पड़ सकता है।
  • लंबे समय तक निर्माण का असर: बांध और नहर निर्माण के दौरान शोर, धूल, भारी मशीनों और मानव गतिविधियों से आसपास का पर्यावरण प्रभावित हो सकता है।
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