साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने पूछा है कि उन्हें जेल में कैसे रखा जा सकता है? प्रज्ञा को 2008 में मालेगांव बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन एजेंसी कह चुकी है कि साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं है।
प्रज्ञा ठाकुर ने स्पेशल मकोका कोर्ट द्वारा 28 जून को उन्हें जमानत देने से इनकार करने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति एन एच पाटिल और पीडी नाईक की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को इस मामले से संबंधित पूर्व के सभी आदेश और फैसले का ब्योरा देने का निर्देश दिया है। एनआईए ने इस वर्ष के शुरू में ठाकुर को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट में दायर याचिका में अपनी याचिका में प्रज्ञा ने कहा है कि निचली अदालत ने हालात में हुए बदलाव को संज्ञान में नहीं लिया है।
नवंबर 2015 में विशेष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ कुछ सबूत हैं। हालांकि मई में एनआईए ने एटीएस से मामले को अपने हाथ में लेकर एक नया आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें प्रज्ञा ठाकुर को उसने क्लीन चिट दे दी थी। साध्वी की ओर से पेश वकील जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि ठाकुर के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं।