पश्चिम बंगाल भाजपा नेता रूपा गांगुली ने सवाल किया है कि ममता बनर्जी को इस बात का जवाब देना चाहिए कि वे राजीव कुमार को बचाने की कोशिश क्यों कर रही हैं। राजीव कुमार ही वह अधिकारी थे, जिन्होंने सारदा घोटाले की शुरूआती जांच की थी। उनके कब्जे में इस मामले से जुड़े अहम सबूत मौजूद हैं। आरोप हैं कि वे इन सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में धरना के बहाने ममता बनर्जी जांच को नहीं रोक सकती हैं।
पश्चिम बंगाल भाजपा की अध्यक्ष रह चुकी रूपा गांगुली ने बताया कि आज भारतीय जनता पार्टी गवर्नर से मिलकर इस मुद्दे पर अपनी राय रखेगी। पार्टी राजीव कुमार के खिलाफ हो रही जांच को रोकने की किसी भी कोशिश को लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ मानती है। रूपा गांगुली ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से ममता बनर्जी परेशान हो गई हैं। वे भाजपा नेताओं की रैलियों को अलोकतांत्रिक तरीके से रोकने की कोशिश कर रही हैं। हेलिकॉप्टर नहीं उतरने दे रही हैं। लोगों को रैली स्थल पर नहीं आने दे रही हैं। लेकिन खुद एक जमीनी नेता रह चुकी ममता बनर्जी को समझना चाहिए कि इस तरह की हरकतों से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले को भाजपा के गलत इरादों का एक और उदहारण बताया है। प्रशांत भूषण ने कहा कि सीबीआई के पास इस मामले की जांच करने का पूरा अधिकार है और कानूनन इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, लेकिन जिस तरह से जांच की जा रही है, वह लोगों के इरादों पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि अब जब कि नये सीबीआई चीफ आजकल में ही अपना कामकाज संभालने वाले हैं, यह जांच नहीं होनी चाहिए थी। वह भी ऐसे सीबीआई अधिकारी के द्वारा जिसकी अपनी नियुक्ति ही सवालों के घेरे में हो, उसे द्वारा ऐसी जांच करने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। इसके अलावा मुकुल रॉय जैसे सारदा घोटाला के उन आरोपियों को इसी मामले में आरोप मुक्त बता दिया जाता है जिन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में सीबीआई की जांच के तरीके पर सवाल उठना लाजिमी है।