मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक की ‘जनता की महाभियोग मुहिम’ से पहले भाजपा ने कांग्रेस पर हिंसा भड़काने की कोशिश का आरोप लगाया है। कांग्रेस 30 अक्तूबर को खरगे के आवास पर कार्यक्रम और एक नवंबर को रामलीला मैदान में रैली करने वाली है। भाजपा ने इसे न्यायिक व्यवस्था का अपमान क्यों बताया? कांग्रेस इस अभियान को मताधिकार और लोकतंत्र की लड़ाई क्यों कह रही है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों की प्रस्तावित ‘जनता की महाभियोग मुहिम’ को लेकर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस अभियान के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही है। यह विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ है। कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित मुहिम के लिए 30 अक्तूबर की तारीख तय की है। यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास पर होगा। इसके बाद विपक्षी गठबंधन एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एसआईआर के खिलाफ संयुक्त रैली करेगा। भाजपा ने इस अभियान को न्यायिक व्यवस्था का मजाक उड़ाने वाला कदम बताया है, जबकि कांग्रेस इसे मताधिकार और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बता रही है।
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भाजपा ने कांग्रेस के अभियान पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने विपक्ष की इस पहल को ‘नकली न्यायिक अभियान’ बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एसआईआर से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तो कांग्रेस इस तरह का सार्वजनिक अभियान क्यों चला रही है। चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत में अपना हलफनामा दाखिल किया है और अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 10 दिन का समय दिया है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस को देश की न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और क्या वह देश में समानांतर अदालतें चलाना चाहती है। सिन्हा ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह की मुहिम से उनके विरुद्ध हिंसा भड़काने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। ये सभी आरोप भाजपा प्रवक्ता ने लगाए हैं।
पश्चिम बंगाल के भाजपा विधायक ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल से भाजपा विधायक रुद्रनील घोष ने भी विपक्ष के अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी बात रखने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है, लेकिन साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया।
घोष ने दावा किया कि विपक्ष जनता का समर्थन हासिल करने में नाकाम रहा है, इसलिए अब इस तरह के कदम उठा रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को संवैधानिक व्यवस्था के तहत अपनी बात रखनी चाहिए।
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भाजपा नेता प्रातुल शाह देव ने एसआईआर पर क्या दावा किया?
भाजपा नेता प्रातुल शाह देव ने कांग्रेस पर भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवस्था का मजाक बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस को लगने लगा कि वह अपने दम पर चुनाव नहीं जीत सकती, तो वह वोट चोरी के आरोप लगा रही है। देव ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में भी एसआईआर की प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन उस समय इस तरह की आपत्तियां नहीं उठाई गई थीं।
उन्होंने विपक्ष की प्रस्तावित ‘जनता की महाभियोग मुहिम’ और ‘नकली संसद’ जैसी गतिविधियों को गलत बताया। देव ने कहा कि अगर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई कार्रवाई करना चाहता है, तो उसे संविधान में तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। उन्होंने एसआईआर का बचाव करते हुए दावा किया कि इसके जरिए अवैध घुसपैठियों को बाहर किया गया है। यह दावा भी भाजपा नेता की ओर से किया गया है।
कांग्रेस ने रैली और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर क्या कहा?
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया ब्लॉक की एसआईआर विरोधी रैली का समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि रैली में देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 10 लाख लोग शामिल होने आ रहे हैं। लांबा ने रैली का नारा ‘वोट बचाओ, देश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ बताया। उन्होंने कहा कि अब इस रैली को होने से नहीं रोका जा सकता। लांबा के मुताबिक, अगर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार इस कार्यक्रम को रोकना चाहती है, तो राहुल गांधी पहले ही सुझाव दे चुके हैं कि 30 अक्तूबर से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा स्वीकार किया जाए। इस तरह एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। एक ओर भाजपा इस अभियान को न्यायिक व्यवस्था का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक इसे मतदाता सूची और लोकतंत्र से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।