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भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय वार्ता पर अमेरिका समेत दुनिया की निगाहें

Fri, 14 Oct 2016 10:40 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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vladamir putin
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रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच शनिवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता का दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन पर असर पडने की पूरी संभावना है। अमेरिका, पाकिस्तान, चीन समेत दुनिया के कई देशों की इस वार्ता पर निगाह है। दोनों देशों के बीच 18 दस्तावेजों पर सहमति और समझौते के आसार हैं। इसमें भारत और रूस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोकार्बन पर बनने वाली सहमति पर दुनिया की निगाहें हैं।
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सूत्र बताते हैं कि 15 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में दोनों शिखर नेताओं के बीच तमाम क्षेत्रीय, आपसी हित के और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान भारत और रूस का मुख्य फोकस रक्षा, परमाणु ऊर्जा तथा हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में सहयोग के अलावा द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर जोर रहेगा। रूस में दुनिया का सबसे उन्नत हीरा मिलता है। 

भारत में उच्च गुणवत्ता के स्तर पर इसे तराशने का काम होता है। इस क्षेत्र में भी दोनों देश आगे आएंगे। इसके अलावा कुछ और क्षेत्रों में भी सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर रूस से हरी झंडी नहीं

- फोटो : Reuters
रक्षा
-रक्षा क्षेत्र में भारत और रूस के बीच अहमति सहमति बनने के आसार हैं। रूस भारत की पांच एस-400 प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली की मांग पर करीब-करीब राजी है और माना जा रहा है कि 30-32 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे पर काफी कुछ तय हो जाएगा। इस मिसाइल प्रणाली की तकनीक के हस्तांतरण और कीमत पर अभी कुछ गतिरोध है, लेकिन सैद्धांतिक रुप से दोनों देश इस सौदे को लेकर करीब-करीब सहमत हैं और अगले एक-दो महीने में इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
-200कामोव-228 हेलीकाप्टर सौदे और हिन्दुस्तान एरोनाटटिक्स लिमिटेड के साथ संयुक्त उत्पादन पर सहमति को अंतिम रुप दिया जाएगा।
-तीन तलवार क्लास के फ्रिगेट पर भी रूस के साथ सौदा होगा। इस फ्रिगेट पर भी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तैनात होगी।
-सुखोई-30 एमकेआई विमानों की गुणवत्ता तथा इसके अपग्रेडेशन को लेकर भारत और रूस के बीच में सहमति बन जाने के पूरे आसार हैं।
-ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के मिनी वर्जन और हाइपरसोनिक वर्जन को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति संभव है। इसके अलावा मित्र देशों को मौजूदा ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का निर्यात किए जाने पर चर्चा तथा सहमति के आसार हैं।

बात बनने के आसार कम
-पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को विकसित करने के क्रम में भारत और रूस के बीच वर्तमान में गतिरोध की स्थिति बनी है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस पर बात बनने के आसार कम हैं, लेकिन गतिरोधों को जरूर कम किया जा सकता है।

क्यों बदलेगा द.एशिया का सैन्य संतुलन

- फोटो : Getty
परमाणु ऊर्जा
रूस परमाणु ऊर्जा में गहरी साझेदारी चाहता है। वह कोंडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र 3 और 4 की परियोजना को लेकर उत्सुक है। कुंडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र 2014 से बिजली का उत्पादन कर रहा है और इसे नेशनल ग्रिड से जोड़ा जा चुका है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बनने वाली इस सहमति पर अमेरिका, फ्रांस जैसे देशों की निगाह है। रूस और चीन के बीच में गहरा रिश्ता है। कूटनीति और एनएसजी में चीन के समर्थन के लिहाज से भारत के लिए कोंडनकुलम पर आगे बढ़ाना सुविधाजनक है। रूस 8-9 परमाणु बिजली संयंत्रों को भारत में स्थापित करने का इच्छुक है। इस दिशा में वार्ता के पूरे आसार हैं।  ऐसे में इस समझौते पर सहमति के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कुछ और सहमति बनने की भी संभावना है।

हाइड्रोकार्बन
रूस की हाइड्रोकार्बन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी रॉसनेफ्ट  ने भारत की हाइड्रोकार्बन क्षेत्र की कंपनी एस्सार में 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदने में रुचि दिखाई है। यह सौदा कोई 12 अरब डॉलर का हो सकता है। अमेरिकी कंपनी भी एस्सार में हिस्सेदारी चाहती थी लेकिन अंतत: बाजी रूस की कंपनी के हाथ लगी है। भारत सरकार ने भी इसे करीब-करीब सहमति दे दी है और माना जा रहा है कि पुतिन-मोदी के बीच वार्ता के दौरान इस सौदे पर भी मुहर लगेगी।

क्यों बदलेगा द.एशिया का सैन्य संतुलन
भारत-रूस के बीच एस-400 ट्रायम्फ प्रतिरक्षी मिसाइल प्रणाली पर सहमति को काफी अहम माना जा रहा है। एस-ट्रायम्फ जमीन, हवा, समुद्र के रास्ते से आने वाले दुश्मन के हर वार को 400 किमी दूर ही ध्वस्त करने में सक्षम है। यह दुश्मन के फाइटर जेट, मानव रहित ड्रोन जैसे विमान, लो फ्लाइंग आब्जेक्ट, मिसाइल और यहां तक की पांचवी पीढ़ी के घातक फाइटरजेटों को भी रन -वे पर ही ध्वस्त कर सकती है।

मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की खासियत है कि यह एक साथ सभी दिशाओं से दुश्मन के 300 हमलावर लक्ष्यों को अपने रेडार प्रणाली से पहचानकर स्वत: उस पर हमला कर सकती है। यह बैलिस्टिक मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली है, इसलिए इसकी गति ध्वनि से भी तेज है और पलक झपकते ही निशाना भेदती है। खासियत यह भी है कि कदाचित एक वार चूक जाए तो स्वत: दूसरे वार में उसे दुश्मन की सीमा में ध्वस्त कर देगी।
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चीन-पाकिस्तान का खतरा टलेगा

दुनिया में है मांग
रूस की इस मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की दुनिया में भारी मांग है। मास्को ने इसे सीरिया की सुरक्षा में भी तैनात कर रखा है और नाटो तथा अमेरिकी हमले की संभावना को देखते हुए रूस के आसमान की भी रक्षा कर रही है।

चीन-पाकिस्तान का खतरा टलेगा
विशेषज्ञों का मानना है रूस की एस-400 ट्रायम्फ प्रतिरक्षा प्रणाली आने पर पाकिस्तान तथा चीन से खतरा काफी कम हो जाएगा। इस प्र्रणाली को सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात करके दुश्मन की परमाणु हथियारों से सुसज्जित मिसाइलों, फाइटर जेटों, यूएवी आदि को उनकी सीमा में ही ध्वस्त किया जा सकेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच ट्रायम्फ मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली को हरी झंडी मिलने के बाद दक्षिण एशियाई क्षेत्र का सैन्य संतुलन भी प्रभावित होने की पूरी उम्मीद है।

रूस है भारत का विश्वसनीय सहयोगी देश
 रूस भारत का विश्वसनीय सामरिक सहयोगी देश है। मास्को ने केवल भारत को लीज पर परमाणु पनडुब्बी दी है बल्कि इसकी तकनीकी साझेदारी भी की है। रक्षा सूत्र बताते हैं कि आईएनएस अरिहंत परमाणु पनडुब्बी विकसित करने में रूस का अच्छा खासा सहयोग रहा है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमान तैयार करने की तकनीक समेत तमाम दुर्लभ युद्धक साजो-सामान में रूस लगातार सहयोगी रहा है।
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