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देश में बढ़ रहा हवाई यात्रियों का आंकड़ा, फिर भी छह साल में बंद हो गईं पांच एयरलाइंस

Tue, 23 Apr 2019 02:47 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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भारत में साल दर साल हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। लोग रेल यात्रा से ज्यादा फ्लाइट को तरहीज दे रहे हैं, फिर भी पिछले छह सालों में देश की पांच एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने के बावजूद आखिर एयरलाइंस के लगातार बंद होने की वजह क्या हैं। 

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हाल में ही जेट एयरवेज ने अपनी सभी व्यवसायिक उड़ानों को बंद कर दिया है। इससे पहले साल 2012 में माल्या की किंगफिशर भी बंद हो गई थी। घाटे में चल रही एयर इंडिया को कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। इसके लिए सरकार को हमेशा मियाद को बढ़ाना पड़ रहा है। केवल इंडिगो को छोड़ दिया जाए तो भारत की लगभग सभी एयरलाइंस को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन संगठन आईएटीए के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 10 फीसदी के दर से बढ़ रही है। इसके अलावा पिछले 54 महीनों से यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी का प्रतिशत लगातार दहाई में रहा है। डॉयरक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के अनुसार, साल 2018 में भारत में लगभग 1390 लाख यात्रियों ने यात्रा की। 
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सरकार की महत्वकांक्षी योजना 'उड़ान' के शुरू होने से भी विमान यात्रियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।  2017 में यह आंकड़ा 1172 लाख के आस-पास था। रीजनल कनेक्टिविटी योजना ‘उड़ान’ के शुरू होने के कारण एयरलाइंस को अपना प्रचालन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली है।

एयरलाइंंस के बंद होने के पीछे ये हैं कारण

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Indiatimes.com

महंगा जेट ईंधन

भारत में जेट ईंधन के दाम अन्य देशों की अपेक्षा 10 फीसदी ज्यादा है। एटीएफ की कीमत हर माह की पहली तारीख को पिछले महीने कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय कीमतों और विदेशी मुद्रा विनिमय दर के औसत के आधार पर संशोधित की जाती है।

हवाई यात्रा पर ज्यादा टैक्स

जीएसटी यानी गुड्स एवं सर्विस टैक्स लागू होने के बाद से एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन लागत 27 फीसदी बढ़ गई है। जीएसटी में हवाई यात्रा पर 5 फीसदी के टैक्स स्लैब में रखा गया है।

महंगा एयरपोर्ट चार्ज

दिसंबर 2018 से भारत में यात्रियों को यूजर डिवेलपमेंट फी की जगह पर पैसेंजर सर्विस फी (PSF) देना पड़ रहा है। पहले घरेलू उड़ान के लिए 10 रुपये और अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए 45 रुपये का शुल्क देना होता था लेकिन अब यह शुल्क 77 रुपये हो गया है। विदेशी मुद्रा से टिकट खरीदने पर यह चार्ज 1.93 डॉलर है। इसके अलावा एयरलाइन्स को एयरपोर्ट पर सुविधा लेने के लिए शुल्क देना पड़ता है। यह उस एयरपोर्ट के ग्रेड पर निर्भर होता है कि शुल्क कितना होगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसमें भी वृद्धि की है।  

कमजोर होती रुपये की ताकत

एयरलाइंस को विदेशों में ऑपरेट करने के लिए संबंधित देश को एक निश्चित शुल्क भी देना होता है। इस शुल्क का भुगतान डॉलर में होता है। लेकिन, रुपये की कमजोर होती ताकत एयरलाइंस को घाटे में ला रही हैं।
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छह साल में ये पांच एयरलाइन्स हुई बंद

किंगफिशर

किंगफिशर

विजय माल्या की किंगफिशर ने लगातार हो रहे घाटे के कारण साल 2012 में अपना कारोबार समेट लिया था। भगोड़ा घोषित हो चुके विजय माल्या पर भारतीय बैंकों के नौ हजार कोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। 

जूम एयर

इस एयरलाइन की स्थापना 2013 में सुरेंद्र कुमार कौशिक द्वारा जेक्सस एयर के रूप में की गई थी। साल 2014 में भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसे अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था।  3 फरवरी 2017 को जूम एयर ने अपने एयर ऑपरेटर का प्रमाण पत्र प्राप्त किया। लेकिन, जुलाई 2018 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने जूम एयर का लाइसेंस सुरक्षा मानकों में कोताही बरतने के कारण निलंबित कर दिया। तब से यह एयरलाइन बंद पड़ी हुई है।

एयर कार्निवल

इस एयरलाइन की स्थापना साल 2013 में की गई थी। जिसका बेस कोयम्बटूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को बनाया गया था। एयर कार्निवाल की पहली उड़ान 2016 में हुई। इस एयरलाइन ने 6 अप्रैल 2017 को संचालन बंद कर दिया। जिसका कारण बढ़ता कर्ज था। 

एयर कोस्ट

इस एयरलाइन ने दक्षिण भारत में अक्टूबर 2013 में एक क्षेत्रीय एयरलाइन के रूप में परिचालन शुरू किया। इसकी पहली उड़ान 16 अक्टूबर 2013 को चेन्नई से हुई। इस एयरलाइन को अक्टूबर 2016 में पूरे भारत में परिचालन के लिए परमिट मिला। लेकिन, घाटे के कारण 28 फरवरी 2017 एयरलाइन ने अपना परिचालन बंद कर दिया।

एयर पेगसास

इस भारतीय क्षेत्रीय एयरलाइन ने 12 अप्रैल 2015 को बंगलूरु और हुबली के बीच पहली उड़ान भरी थी। यह एयरलाइन डेकोर एविएशन की सहायक कंपनी थी। वित्तीय कठिनाइयों के कारण इस एयरलाइन ने 27 जुलाई 2016 को परिचालन बंद कर दिया।
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