भारत और अमेरिका ने एक दूसरे की सैन्य सुविधाओं और साजो-सामान के इस्तेमाल से जुड़े एक अहम समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। ये समझौता दोनों ही देशों को एक दूसरे के सैन्य ठिकानों पर फ़ौजी साज़ो-सामान की मरम्मत, आपूर्ति और ईंधन भरने का रास्ता खोल देगा। इस समझौते का एलान अमरीका के दौरे पर आए भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमरीकी रक्षा मंत्री ऐश कार्टर की मुलाक़ात के बाद जारी एक साझा बयान में किया गया। हांलाकि सैद्धांतिक रूप से इस समझौते पर अप्रैल में ही सहमति हो गई गई थी जब अमरीकी रक्षा मंत्री ऐश कार्टर भारत के दौरे पर गए थे।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ऐश कार्टर का कहना था कि इस समझौते से दोनों ही देशों की फौज के लिए साथ मिलकर काम करना बेहद आसान हो जाएगा लेकिन ये हमेशा दोनों की रजामंदी ही होगा।
कार्टर और भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर दोनों ही ने स्पष्ट किया कि इस समझौते से किसी भी पक्ष को एक दूसरे के ठिकानों पर सैनिकों की तैनाती की इजाजत नहीं मिलेगी। भारत में ये मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील रहा है और इस समझौते की कोशिश लगभग एक दशक से भी ज़्यादा से चल रही थी। वामपंथी दल इसके ख़िलाफ़ रहे हैं और यूपीए सरकार भी इसे टालती रही है. कई गुटों का मानना है कि इस समझौते से भारत अपनी गुट-निरपेक्ष नीति से हट रहा है।