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पूर्ण बजट पर भाजपा-कांग्रेस में घमासान, यशवंत सिन्हा बता रहे असंवैधानिक

Mon, 28 Jan 2019 09:47 PM IST
Amit Sharma अमित शर्मा, अमर उजाला 
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Congress Vs BJP
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अगले लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। इसी बीच, परंपरा से उलट सरकार अगले वर्ष के लिए एक फरवरी को संसद में पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। माना जा रहा है कि पूर्ण बजट के जरिए वह एक मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की कोशिश कर रही है। पूर्ण बजट के जरिए वह जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अगले चुनाव में अपनी वापसी के प्रति वह पूर्णतः आश्वस्त है, इसलिए वह अगले पूरे साल का पूरा ब्योरा पेश कर रही है। 

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हालांकि सरकार के इस फैसले की काफी आलोचना भी हो रही है। अब तक की 'परंपरा' के नाम पर विपक्ष सरकार के इरादे पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस इसे सरकार के द्वारा एक और 'परंपरा तोड़ना' बता रही है तो वहीं पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा इसे 'असंवैधानिक' बता रहे हैं। सिन्हा के मुताबिक बजट किसी भी सरकार के द्वारा अगले वर्ष अपनी आय को किस तरह से खर्च करना है और उसकी कितनी आमदनी किस सोर्स से होनी है, इसका लेखा-जोखा होता है। वह अगले वर्ष की लोक कल्याणकारी योजनाओं में अपनी प्राथमिकताएं भी बताती है। लेकिन चूंकि किसी भी चुनाव में किसी सरकार की वापसी की गारंटी नहीं दी जा सकती, ऐसे में सरकार के द्वारा पूर्ण बजट पेश करना एक गलत परंपरा का आगाज है।

सवाल यह भी है कि अगर सरकार पूर्ण बजट बनाती है और चुनाव में कोई अन्य सरकार केंद्र में आती है तो क्या उसे इस बजट को बदलना पड़ेगा, या संसद में एक ही वर्ष के लिए दूसरी बार बजट पेश करना पड़ेगा?  अगर ऐसा होता है तो यह पहली बार होगा कि एक ही साल के लिए संसद में दो बार पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। ऐसे में यह अब तक की परंपराओं के साथ 'खिलवाड़' करना होगा। 
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सरकार को अपना विचार पेश करने का अधिकार

भाजपा विपक्ष के इस आरोप को सिरे से खारिज कर रही है। पार्टी का कहना है कि बजट में 'अपूर्ण बजट' का कोई प्रावधान नहीं है। भाजपा प्रवक्ता गोपाल अग्रवाल का कहना है कि चूंकि सरकार अगले चुनाव में अपनी वापसी के लिए पूरी तरह आश्वस्त है, इसलिए पूर्ण बजट पेश करने में कुछ भी गलत नहीं है। अग्रवाल के मुताबिक बजट के जरिए सरकार देश के लिए अपना विचार प्रस्तुत करती है जिसका कि उसे पूरा  अधिकार है। 

इस तरह क्या सरकार एक स्थापित परंपरा नहीं तोड़ रही है, इस सवाल के जवाब में अग्रवाल का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी सभाओं में देश के लोगों को एक निश्चित आमदनी देने का वायदा कर रहे हैं। यह एक चुनावी वायदा से अधिक कुछ नहीं है। अगर विपक्ष का नेता होते हुए वे इस तरह के वायदे कर सकते हैं तो सरकार के पास अपना एजेंडा पेश करने का भी पूरा अधिकार है। 
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