उत्तर प्रदेश में किसानों की सबसे बड़ी समस्या चीनी मिलों से बकाया भुगतान की है, जो अब तक नहीं की गई है और इसका सीधा असर गन्ने की खेती पर भी पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जून तक गन्ना किसानों का बकाया लगभग 12,000 करोड़ रुपये है। अपने बकाया भुगतान के लिए यहां के किसान हमेशा आंदोलन करते रहते हैं, लेकिन फिर भी हालत जस की तस है।
मध्य प्रदेश
2000-01 और 2014-15 के बीच मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र में काफी उछाल आया है। इस दौरान किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है। बता दें कि प्रति व्यक्ति देश की मासिक आय 6,426 रुपये है और इन सालों के दौरान मध्य प्रदेश में किसानों की प्रति व्यक्ति मासिक आय इससे थोड़ा ही कम 6,210 रुपये थी। लेकिन इसके बावजूद यहां बड़ी तादाद में किसान आत्महत्या करते हैं और इसका सबेस बड़ा कारण है कर्ज, जो वो चुका नहीं पाते।
महाराष्ट्र
55 फीसदी ग्रामीण आबादी के साथ महाराष्ट्र देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। बता दें कि इस राज्य का एक बड़ा हिस्सा सूखाग्रस्त है, जबकि बाकी जगहों पर जो खेती होती है, उसका सही मूल्य किसानों को मिलता ही नहीं है। यहां भी किसानों के ऊपर भारी कर्ज है। यही कारण है कि यहां किसान हमेशा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रहते हैं।
वैसे आमतौर पर कर्नाटक के किसान बाकी राज्यों की अपेक्षा ज्यादा खुशहाल रहते हैं, लेकिन पिछले तीन सालों में यहां के कई जिलों में जिस तरह से सूखे ने दस्तक दी है, उससे किसानों का भारी नुकसान हो रहा है। 2014-15 और 2017-18 में ये स्थिति सबसे खराब थी। इसकी वजह से यहां के किसानों के ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ गया और आत्महत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया।
तमिलनाडु
कर्नाटक की तरह ही तमिलनाडु भी पिछले कुछ समय से सूखे से ग्रसित है। साल 2016 में यहां भयंकर सूखा पड़ा था, जिससे अब तक किसान उबर नहीं पाए हैंं। सूखे की वजह से यहां किसानों की आय में भारी कमी आई है और उनके ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ गया है।