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सोनिया गांधी की किताब पर क्यों थमी बात?: पेंगुइन इंडिया ने आरोपों को किया खारिज; प्रकाशन रोकने की बताई वजह

Mon, 31 Aug 2026 08:51 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोनिया गांधी के संस्मरण को प्रकाशित नहीं करने के अपने फैसले को लेकर सफाई दी। प्रकाशक ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के पीछे किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं था। कंपनी के मुताबिक, किताब  को लेकर बातचीत के दौरान ‘एक खास मुद्दे’ पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद प्रकाशन का मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
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सोनिया गांधी की आत्मकथा पर विवाद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोनिया गांधी के संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारत में प्रकाशन को लेकर उठने वाले विवाद के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को किसी भी बाहरी दबाव से इनकार किया है। प्रकाशक के अनुसार, मैनुस्क्रिप्ट सामान्य संपादकीय प्रक्रिया से गुजरी, लेकिन एक खास मुद्दे पर लेखिका के साथ सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद सोनिया गांधी की टीम ने प्रकाशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। हालांकि, गोपनीयता और समझौते का हल देते हुए पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने उस मुद्दे का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन 10 नवंबर को प्रस्तावित है।

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विवादित मुद्दे का खुलासा करने से प्रकाशक ने किया इनकार
PRHI ने उस ‘खास मुद्दे’ के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार किया है। प्रकाशक ने इसके पीछे हुए समझौते और लेखक से जुड़ी गोपनीयता का हवाला दिया। कंपनी की यह ताजा सफाई ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के बहुप्रतीक्षित संस्मरण के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

10 नवंबर को दुनियाभर में रिलीज होगी किताब
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब अमेरिका स्थित अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो पेंगुइन रैंडम हाउस की एक इम्प्रिंट है, ने घोषणा की कि सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर को दुनियाभर में प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई।
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कांग्रेस नेताओं ने उठाए सरकारी दबाव के सवाल
कांग्रेस के कई नेताओं ने इस मामले में कथित सरकारी दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि पेंगुइन इंडिया पर दबाव डाला गया था कि किताब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे से जुड़े हिस्सों को हटा दिया जाए।

'बाहरी हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं'
अपने ताजा बयान में PRHI ने साफ तौर पर उन अटकलों को खारिज कर दिया कि किताब के प्रकाशन से पीछे हटने का फैसला किसी बाहरी हस्तक्षेप के कारण लिया गया। PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने पीटीआई को दिए विशेष बयान में कहा कि कंपनी सोनिया गांधी के संस्मरण को प्रकाशित करने के लिए बेहद उत्सुक थी, क्योंकि यह काफी प्रयासों के बाद हासिल की गई किताब थी।

‘किताब की सामग्री गोपनीय है, कोई बाहरी दबाव नहीं था’
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा, “हमें लगता है कि आगामी संस्मरण ‘Belonging’ को लेकर किए गए कुछ गलत प्रस्तुतियों को स्पष्ट करना जरूरी है। यह ऐसी किताब है, जिसे हम पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में प्रकाशित करने के लिए वास्तव में बेहद उत्सुक थे, क्योंकि इसे काफी प्रयासों के बाद हासिल किया गया था। प्रकाशक ने आगे कहा,'चूंकि किताब की सामग्री गोपनीय है और उस पर एम्बार्गो लगा हुआ है, इसलिए किसी भी तरह का बाहरी दबाव बिल्कुल नहीं था।'

सामान्य संपादकीय प्रक्रिया से गुजरी थी मैनुस्क्रिप्ट
पेंगुइन इंडिया के मुताबिक, सोनिया गांधी की मैनुस्क्रिप्ट प्रकाशन की उसकी सामान्य संपादकीय प्रक्रिया से गुजरी थी। इस दौरान कई बिंदु उठाए गए और लेखिका के प्रतिनिधियों के साथ उन पर चर्चा की गई। प्रकाशक ने बताया कि कुछ सुझावों पर लेखिका की टीम बदलाव के लिए तैयार हुई, जबकि कुछ अन्य मामलों में प्रकाशक ने लेखिका का पक्ष स्वीकार कर लिया।

‘एक खास मुद्दे’ पर नहीं बन सकी सहमति
PRHI ने कहा कि तमाम चर्चाओं के बावजूद अंततः एक खास मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद लेखिका की टीम ने प्रकाशक को सूचित किया कि वे किताब के प्रकाशन की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। PRHI ने कहा कि उसने लेखिका की इस इच्छा का सम्मान किया।

गोपनीयता के कारण विवरण साझा नहीं करेगा प्रकाशक
प्रकाशक ने कहा कि वह एक समझौते से बंधा हुआ है और उसके लिए लेखक की गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए वह यह जानकारी सार्वजनिक नहीं करेगा कि आखिर वह कौन-सा मुद्दा था, जिस पर गतिरोध पैदा हुआ और प्रकाशन की प्रक्रिया रुक गई।

मैनुस्क्रिप्ट की समीक्षा करना प्रकाशक की जिम्मेदारी
पेंगुइन इंडिया ने कहा कि एक प्रकाशक के तौर पर उसकी जिम्मेदारी और कर्तव्य है कि वह किसी भी मैनुस्क्रिप्ट का आलोचनात्मक मूल्यांकन करे, सवाल उठाए, सुझाव दे और स्वतंत्र संपादकीय निर्णय ले। कंपनी के मुताबिक, ‘Belonging’ के मामले में भी उसने यही प्रक्रिया अपनाई।

पहले भी प्रकाशन के लिए तैयार रहने की बात कह चुका है PRHI
सोमवार का बयान पेंगुइन की पहले कही गई बात को ही दोहराता है कि वह सोनिया गांधी के संस्मरण को प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और तैयार था। प्रकाशक ने यह भी स्पष्ट किया कि संपादकीय समीक्षा, तथ्य-जांच और जरूरी सुझाव प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।

राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
PRHI के किताब प्रकाशित करने से पीछे हटने की खबरों के बाद राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर विवाद और तेज हो गया। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि संपादकीय बदलावों को लेकर असहमति के बाद प्रकाशन संस्था ने संस्मरण प्रकाशित करने से कदम पीछे खींच लिए। इसके बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को सोशल मीडिया यूजर्स के साथ-साथ विपक्षी नेताओं की आलोचना का भी सामना करना पड़ा।

कमलनाथ ने भी उठाया था दबाव का सवाल
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सवाल उठाया था कि क्या प्रकाशक का रुख कहीं बाहरी दबाव से प्रभावित तो नहीं हुआ। इस तरह सोनिया गांधी की किताब का प्रकाशन राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया।

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सोनिया गांधी के जीवन के कई पहलुओं पर केंद्रित है संस्मरण
इस संस्मरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी उत्सुकता है। माना जा रहा है कि अपेक्षाकृत सार्वजनिक जीवन से दूर रहने वाली सोनिया गांधी इस किताब में युद्ध के बाद के इटली में अपने बचपन, नेहरू-गांधी परिवार में अपने विवाह, पति राजीव गांधी की हत्या और राजनीति में अपने प्रवेश जैसे जीवन के महत्वपूर्ण अध्यायों के बारे में लिखेंगी। अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन से पहले ही किताब को लेकर काफी ध्यान आकर्षित हो रहा है।

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