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Adipurush: क्या बार-बार देश के लोगों की परीक्षा लेंगे, आदिपुरुष पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों की तल्ख टिप्पणी?

Thu, 29 Jun 2023 08:57 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की अवकाशकालीन खंडपीठ ने आदिपुरुष मामले पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि अगर इस पर भी हम आंखें बंद कर लें, क्योंकि कहा जाता है कि इस धर्म के लोग बड़े सहिष्णु हैं, तो क्या इसकी परीक्षा ली जाएगी? मामले में कोर्ट ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव, फिल्म सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी और फिल्म निर्माता ओम राऊत से जवाब मांगा है। 
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आदिपुरुष - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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हाल ही में रिलीज फिल्म आदिपुरुष में श्रीराम की कथा को बदलकर निम्नस्तरीय दिखाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि देश के लोग सहिष्णु हैं, तो क्या बार-बार सहिष्णुता की परीक्षा ली जाएगी। पीठ ने फिल्म के संवाद लेखक मनोज मुंतशिर को पक्षकार बनाने की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की अवकाशकालीन खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा, अगर इस पर भी हम आंखें बंद कर लें, क्योंकि कहा जाता है कि इस धर्म के लोग बड़े सहिष्णु हैं, तो क्या इसकी परीक्षा ली जाएगी? पीठ ने कहा कि जिस रामायण के किरदारों की पूजा की जाती है, उसे एक मजाक की तरह कैसे दिखाया गया। ऐसी फिल्म को सेंसर बोर्ड ने कैसी मंजूरी दे दी। यह बहुत बड़ी गलती है। फिल्म निर्माताओं को सिर्फ पैसे कमाने हैं।

पीठ ने कहा, अगर कोई नरम है तो क्या उसे दबाया जाएगा? अच्छा है कि यह ऐसे धर्म के बारे में है, जिसके अनुयायियों ने कानून-व्यवस्था के लिए समस्या खड़ी नहीं की। हमें इसके लिए शुक्रगुजार होना चाहिए। हमने खबरों में देखा है कि कुछ लोग फिल्म देखने गए और वहां उन्होंने सिर्फ सिनेमा हॉल को बंद कराया। वे और भी ज्यादा कर सकते थे। 
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allahabad high court - फोटो : social media
कोर्ट ने कहा- क्या लोगों व युवाओं को बेदिमाग समझते हैं?
केंद्र के वकील ने डिसक्लेमर का उल्लेख किया, तो कोर्ट ने कहा, फिल्म में आप भगवान राम, लक्ष्मण, सीताजी, हनुमान जी, रावण व लंका को दिखा रहे हैं। फिर डिसक्लेमर में कहते हैं, यह रामायण नहीं है। क्या लोगों व युवाओं को बेदिमाग समझते हैं? कोर्ट ने बुधवार को फिल्म निर्माताओं से सभी तरह के धार्मिक धार्मिक ग्रंथों और महाकाव्यों से दूर रहने को कहा और उनसे उनके बारे में फिल्में नहीं बनाने की बात कही। कोर्ट ने केंद्र के वकील से जवाब पेश करने को कहा कि सिनेमा कानून के तहत इस पर क्या कारवाई की जा सकती है? कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि ये सिर्फ मामले से जुड़ी मौखिक टिप्पणियां हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने यह टिप्पणियां क्यों की?
एक याची के वकील प्रिंस लेनिन ने बताया कि आदिपुरुष मामले में दाखिल याचिकाओं पर कोर्ट ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव, फिल्म सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी और फिल्म निर्माता ओम राऊत से जवाब मांगा है। इनको निजी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। 

फिल्म सर्टिफिकेशन नियम के तहत संबंधित समिति फिल्म का पुनरीक्षण करे। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की खंडपीठ ने मामले में दाखिल याचिकाओं पर दिया। याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी व अन्य ने इस फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की गुहार की है।

याची की वकील रंजना अग्निहोत्री ने फिल्म में दिखाए गए सीन के फोटो को आपत्तिजनक कहकर पेश किया। इसे सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए कार्रवाई का अनुरोध किया है। उधर, सरकारी वकील भी पेश हुए। उनके जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और मामले को गंभीर सरोकार वाला कहकर पक्षकारों से जवाब तलब किया।
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आदिपुरुष - फोटो : सोशल मीडिया
आदिपुरुष के खिलाफ नई याचिका दाखिल
फिल्म आदिपुरुष के खिलाफ मंगलवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में नई याचिका दायर हुई है। इसमें सेंसर बोर्ड से जारी फिल्म का प्रमाणपत्र रद्द करने का आग्रह किया गया है। कोर्ट ने इस याचिका को पहले से विचाराधीन पीआईएल के साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। नवीन धवन व एक अन्य व्यक्ति ने यह याचिका दायर की है।
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