पुलिस की लापरवाही पर न्ययाधीश
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मामले में जांच के दौरान पुलिस की लापरवाही को लेकर कहा कि ताला पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने पहले मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे मामला जटिल हो गया। अगर पुलिस शुरुआत में सही कदम उठाती तो यह मामला इतनी समस्याओं में नहीं फंसता। साथ ही उचित कार्रवाई में देरी के लिए न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाया।
अस्पताल अधिकारियों की भूमिका
न्यायाधीश ने अस्पताल अधिकारियों की भी आलोचना की, जिन्होंने पहले इस अपराध को आत्महत्या के रूप में पेश करने की कोशिश की थी, ताकि अस्पताल को किसी भी परिणाम से बचाया जा सके। यह भी कहा गया कि जब अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने इसका विरोध किया और प्रिंसिपल को शिकायत दी, तब पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। इससे पीड़िता के माता-पिता को अपनी बेटी को देखने का मौका नहीं मिला।
साथ ही न्यायाधीश ने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल के अधिकारियों ने मामले की जानकारी पुलिस से छिपाने की कोशिश क्यों की और इस कृत्य से अस्पताल के प्रशासन की मंशा पर संदेह पैदा हुआ। इस तरह, न्यायाधीश ने पुलिस और अस्पताल दोनों की लापरवाही और अपराध की शुरुआत में हुई गलतियों की आलोचना की।