फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्यों आनन-फानन जारी हुआ सीबीआई निदेशक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का आदेश?

Thu, 25 Oct 2018 10:14 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार के बड़े अफसरों को भी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजने, उनके अधिकार लेने का आदेश आनन-फानन क्यों जारी हुआ? विधि एवं कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी लंबे समय तक सीबीआई को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

विज्ञापन


उन्हें भी केंद्र सरकार के इस तरह से निर्णय लेने पर आश्चर्य हो रहा है। सीबीआई में डेप्युटेशन पूरा करने के बाद उ.प्र. पुलिस को सेवाएं देने वाले सूत्र का भी कहना है कि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी। उ.प्र. के पूर्व डीजीपी, बीएसएफ के डीजीपी रहे और आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ प्रकाश सिंह को भी यह हजम नहीं हो रहा है।

केंद्र सरकार ने ऐसा निर्णय क्यों लियाः प्रकाश सिंह

प्रकाश सिंह का कहना है कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि केंद्र सरकार ने ऐसा निर्णय क्यों लिया। उनका मानना है कि सरकार को सलाह किसी कमजोर दिमाग के आदमी ने दी होगी। सरकार को ऐसा निर्णय बिल्कुल भी नहीं लेना चाहिए था।
विज्ञापन


आनन-फानन दिल्ली पुलिस का घेरा बढ़ाकर कवच के रूप में इस्तेमाल करना, दफ्तर सील कराना, निदेशक को जबरी छुट्टी पर भेजना, स्पेशल डायरेक्टर को छुट्टी पर भेजना, सीबीआई निदेशक के घर की जासूसी कराना आखिर यह सब क्या है? प्रकाश सिंह का कहना है कि यह सरकार के बदहवासी से भरे निर्णय को दर्शाता है।

विज्ञापन

कोई तख्तापलट या संसद पर कब्जा तो कर नहीं रहे थे

पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह का कहना है कि सीबीआई निदेशक और उनके अधिकारी सादी वर्दी वाले अफसर हैं। इनके साथ चार-पांच लोग ही होते हैं, कोई सुरक्षा का बड़ा तामझाम नहीं होता। यह कोई सरकार का तख्तापलटने या संसद पर कब्जा करने नहीं जा रहे थे। सरकार के पास इस तरह की कोई आपात स्थिति नहीं थी कि आनन-फानन ये निर्णय लिया जाये। मुझे समझ में नहीं आता कि सरकार इतनी हड़बड़ी में क्यों एक के बाद एक गलत निर्णय ले रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने(सरकार) किसी मुसीबत को भांपकर दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेजा है।

दो स्थान पर हुई गफलत

सीवीसी(केंद्रीय सतर्कता आयोग) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सीबीआई के दोनों अफसरों को जबरिया छुट्टी पर भेजने को लेकर सीवीसी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट उसकी(सीवीसी) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रही है। सीवीसी, सीबीआई की निगरानी करती है। यह सीवीसी को पता है कि सीबीआई के निदेशक और अंतरिम निदेशक में ठनी हुई है। सालभर से इसी तरह के हालात हैं। इसके बाद भी सीवीसी चुप बैठी है। अंतिम समय में सीवीसी रिपोर्ट दे रही है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ठीक ढंग से सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह तो पूरा मजाक है।

दूसरी गफलत लोक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग(डीओपीटी) ने की है। आखिर यह विभाग कर क्या रहा था। सीबीआई में स्थिति दिन प्रतिदिन खराब हो रही थी और यह विभाग किनारे खड़ा होकर तमाशा देख रहा था। इसे सबकुछ करने की आधी रात को ही समझ आई। सचमुच यह बड़ा ही हास्यास्पद मामला है। यह केंद्र सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

राकेश अस्थाना को क्यों बचा रही सरकार

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नियुक्त हो गए हैं। निदेशक ने राकेश अस्थाना के खिलाफ मामले की जांच कर रहे अफसरों में किसी को नागपुर तो किसी को पोर्ट ब्लेयर भेज दिया। यह किसी की भी समझ में नहीं आया। विपक्ष का कहना है कि इससे तो यही संदेश जा रहा है कि जैसे सरकार सीबीआई निदेशक के आरोप को दरकिनार करके एजेंसी के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को बचाना चाह रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें