महिलाओं में स्तन कैंसर के सबसे अधिक मामले देश की राजधानी दिल्ली में दर्ज किए गए हैं। हालांकि ऑन्कोलॉजिस्ट इसकी कोई साफ वजह नहीं खोज पाए हैं। वे अनुमान लगाते हैं कि दिल्ली में स्तन कैंसर के बारे में ज्यादा जागरुकता है और इसलिए यहां ज्यादा मामले निगाह में आ जाते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रीवेंशन एंड रिसर्च के निदेशक और कैंसर पर हुए शोध के एक लेखक डॉक्टर रवि मेहरोत्रा कहते हैं कि स्तन कैंसर की बड़ी वजह वसायुक्त खानपान, मोटापा, देर से शादी करना, कम बच्चे, गलत तरीके से स्तनपान करवाना हो सकता है, कुल मिलाकर वे शहरीकरण को स्तन कैंसर के बढ़ते आंकड़ों की एक बड़ी वजह मानते हैं।
डॉक्टर रवि मेहरोत्रा का यह भी मानना है कि कई महिलाओं को स्तन कैंसर के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं है, महिलाएं इस बारे में डॉक्टर के पास जाने से कतराती भी हैं। अमेरिका में 80 प्रतिशत स्तन कैंसर के मामले उसके पहली या दूसरी स्टेज में ही पकड़ में आ जाते हैं जबकि भारत में आमतौर पर तीसरी या चौथी स्टेज होने पर स्तन कैंसर का पता लगता है।
ऑन्कोलॉजिस्ट बताते हैं कि भारत में स्तन कैंसर के 60 प्रतिशत मामलों में महिलाएं पांच वर्ष तक जीवित रहती हैं।
हालांकि डॉक्टर मेहरोत्रा भारतीय महिलाओं में इतने ज्यादा स्तन कैंसर के मामले सामने आने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बता पाते। सबसे आसानी से पकड़ में आने वाला कैंसर होता है सर्वाइकल कैंसर, इसका प्रमुख कारण ह्यूमन पपिलोमा वायरस (एचपीवी) होता है। भारत में 23 प्रतिशत महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित बताई जाती हैं। साल 2008 से ही 11 से 13 साल तक की लड़कियों को एचपीवी के टीके लगाए जा रहे हैं, इससे दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर के आंकड़े तेजी से गिरे हैं। भारत में सिर्फ पंजाब और दिल्ली में ही एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम होता है।
इस कैंसर का इलाज संभव है
भारत में महिलाओं को होने वाले कैंसर में सर्वाइकल कैंसर का प्रतिशत दूसरे नंबर पर आता है। कैंसर पीड़ित महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की वजह से एक चौथाई महिलाओं की मौत होती है। डॉक्टर मेहरोत्रा बताते हैं, ''तमाम तरह के कैंसर में सर्वाइकल कैंसर का इलाज सबसे आसान है, इसकी वजह से किसी भी महिला की मृत्यु नहीं होनी चाहिए।'' भारत में प्रजनन और यौन स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करने की जरूरत है। इसके अलावा सरकार को
एचपीवी टीकों की मुफ्त व्यवस्था भी करनी चाहिए। लैंसेट पेपर के मुताबिक भारत जैसे देश में जहां 100 करोड़ से ज्यादा की आबादी है और चार हजार से अधिक मानव विज्ञान के अलग-अलग समूह हैं, यहां वंशानुगत शोध की आवश्यकता है।
इसके साथ ही कैंसर से बचाव के लिए उचित कार्यक्रम बनाने की जरूरत भी है। उदाहरण के लिए लैंसेट ने सुझाव दिया है कि भारत में पंजाब क्षेत्र की कैंसर पीड़ित महिलाओं और ब्रिटेन में रहने वाले पंजाबी समुदाय की कैंसर पीड़ित महिलाओं के बीच एक शोध करवाया जा सकता है। इस सुझाव के अनुसार, ''इस शोध से यह मालूम चल पाएगा कि क्या कैंसर होने में अनुवांशिकता का हाथ होता है या फिर जगहों के आधार पर भी कैंसर हो सकता है, क्योंकि दो अलग-अलग जगहों पर एक ही समुदाय की महिलाओं पर यह
शोध किया जाएगा।''