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राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने से पहले अपनी पार्टी की जड़ क्यों खोद रहे हैं नेता?

Mon, 16 Nov 2020 03:28 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। अपने नेता हों या विरोधी सबको अपनी बात रखने का अधिकार देती है, लेकिन मेरा अपने वरिष्ठों से आग्रह है कि वह खुद का मूल्यांकन करने के बाद दूसरों पर सवाल उठाएं...
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cwc - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
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बिहार में कांग्रेस में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी और केवल 19 सीटें जीत पाई। पार्टी के इस प्रदर्शन से राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी बहुत खफा हैं। कुछ ऐसा ही हाल कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं का भी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल भी पार्टी के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। लेकिन पार्टी के ही कई नेताओं को कपिल सिब्बल जैसे नेताओं का सवाल उठाने का तरीका खल रहा है।

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पार्टी मुख्यालय के एक विभाग प्रमुख कहते हैं कि कपिल सिब्बल सीनियर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं। उन्हें बताना चाहिए कि बिहार में पार्टी चुनाव लड़ रही थी और चुनाव प्रचार में उनका क्या योगदान था? कांग्रेस महिला विंग की एक नेता ने कहा कि आप कभी भी और किसी पर भी अंगुली उठा सकते हैं। लेकिन इससे क्या होने वाला है। कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। अपने नेता हों या विरोधी सबको अपनी बात रखने का अधिकार देती है, लेकिन मेरा अपने वरिष्ठों से आग्रह है कि वह खुद का मूल्यांकन करने के बाद दूसरों पर सवाल उठाएं।

संक्रमण काल में ही यह सब होता है

पूर्व महासचिव का कहना है कि अपने कुछ वरिष्ठों के सवाल उठाने से वह बिल्कुल आश्चर्यचकित नहीं हैं। एक मायने में यह होना चाहिए और कामकाज की इससे समीक्षा हो पाती है, लेकिन इधर यह प्रवृत्ति कुछ ज्यादा बढ़ी है। सूत्र का कहना है कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि जब भी किसी संगठन का संक्रमण काल आता है तो वहां इस तरह की स्थिति आती है। वरिष्ठ नेता के मुताबिक संक्रमण काल में अपने लोगों की एकजुटता बहुत शक्ति देती है। फिलहाल अभी कांग्रेस पार्टी के भीतर यह शक्ति सीमित दिखाई दे रही है, लेकिन समय के साथ ठीक हो जाएगी।

राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की फिर शुरू हुई मुहिम 

पार्टी में एक धड़ा और है। वह मानकर चल रहा है कि अगले दो महीने के भीतर पार्टी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष को यह जिम्मेदारी पार्टी के नेता राहुल गांधी को देनी पड़ सकती है। मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके बाद अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इसलिए यही सबसे उपयुक्त समय है। सूत्र का कहना है कि कमाल संभालने के बाद नए अध्यक्ष को पार्टी में सांगठनिक बेहतरी के लिए अच्छा समय मिल जाएगा। इस लिहाज से यह एक बड़ी चुनौती है। इसलिए कुछ नेता इसको लेकर भी सशंकित हैं। उन्हें चाहिए कि धैर्य से काम लें।

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