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शिक्षा के मंदिर में असुरक्षित हमारे देश का भविष्य

Wed, 11 Jul 2018 03:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा स्कूल में जाए और पढ़-लिखकर एक महान आदमी बने। लेकिन बीते दिनों हुई कई घटनाओं ने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल अभी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में 50 से ज्यादा बच्चों को भूखा-प्यासा एक कमरे में बंद रखा गया वजह थी अभिभावकों द्वारा फीस जमा न करवाना। 

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इस घटना में यह भी सामने आया कि बच्चों को टॉयलट तक नहीं जाने दिया गया। एक बंद कमरे में बच्चों को जानवरों की तरह बंद रखना क्या हमारी शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े नहीं करते। और सवाल यह है कि बच्चें स्कूलों में सुरक्षित क्यों नहीं है और क्यों उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आखिर क्या वजहें हैं जिसकी वजह से आय दिन स्कूलों में बच्चों के साथ रेप, हत्या और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं।

हम आपको हाल ही में हुई उन तमाम घटनाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने पूरे देश को और स्कूल की व्यव्स्था पर सवाल खड़े किए हैं। अगर स्कूल में होने वाली घटनाओं का जिक्र किया जाए तो सबसे पहले 8 सितंबर 2017 को गुरुग्राम के एक प्राइवेट स्कूल का प्रिंस हत्याकांड मामला सबसे पहले जहन में आता है। 
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इस घटना ने पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि मोटी फीस वसूलने वाले स्कूल बच्चों को सुरक्षा देने में विफल क्यों हैं। इस केस में 7 वर्षीय बच्चे की स्कूल के बॉथरूम में धारदार चाकू से गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया था कि स्कूल में ही 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया था। बच्चे को इसलिए मार दिया गया था ताकि एग्जाम और पेरेंट-टीचर्स मीटिंग टल जाए।

प्रिंसिपल टीचर करते रहे महीनों तक रेप

शिक्षा के मंदिर में प्रिंसिपल, शिक्षकों और छात्रों ने हैवानियत की हद पार कर देने वाली इस घिनौनी घटना को अंजाम दिया। घटना है बिहार के सारण की जहां महीनों तक 10वीं की एक छात्रा से रेप होता रहा। इसमें प्रिंसिपल शिक्षक और छात्रों समेत कुल 18 लोग शामिल हैं।

छात्रा के साथ सबसे पहले बाथरूम में पांच छात्रों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। सात माह पहले छात्रा को छात्रों ने अपना शिकार बनाया, जिसके 17 दिनों बाद प्रिंसिपल ने भी दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इसके बाद छात्रा के साथ दो शिक्षकों ने दुष्कर्म किया। इन घटनाओं के बाद छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म का सिलसिला ही चल पड़ा। हद तो तब हो गयी, जब प्रिंसिंपल के बेटे मोहित अरुण चार पांच छात्रों के साथ प्रत्येक एक दो दिन बाद सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने लगा। 

प्ले स्कूल में 2 साल के मासूम का यौन उत्पीड़न

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक प्ले स्कूल में पढ़ने वाले दो साल के मासूम बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न की मामला सामने आया था।

मामला 1 जुलाई (चिकित्सक दिवस) का है जब स्कूल में इस अवसर पर समारोह आयोजित किया गया था। समारोह खत्म होने के बाद बच्चे की मां उसे लेने आई तो उसके के चेहरे पर अजीब तरह की परेशानी देखी। इस दौरान मां ने देखा की उसके कपड़ों पर खून के निशान हैं। वह बच्चे को तुरंत अस्पताल लेकर गई और वहां डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है।  मेडिकल रिपोर्ट में भी यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। जिसके बाद पुलिस ने इस संबंध में पोस्को कानून के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

इन मामलों से साफ है कि किसी भी उम्र के बच्चे स्कूलों में सुरक्षित नहीं हैं। छोटे बच्चों को बहला-फुसला कर उनका यौन उत्पीड़न किया जाता है तो वहीं परीक्षा टालने के लिए बच्चे अपने साथियों की हत्या तक करने पर उतारू हैं। लेकिन आय दिन होती इन घटनाओं ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कैसे स्कूलों को सुरक्षित बनाया जा सकता  है और कैसे स्कूलों में होने वाली यौन उत्पीड़न की घनटाओं पर लगाम लगाई जा सकती है। 

हमें इन घनटनाओं से सबक लेना होगा क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते तो इसकी सीधा मतलब यह होगा कि हम अगली घनटा को आमंत्रित कर रहे हैं।

हर विद्यालय को यह फिर से सोचना होगा कि उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या प्रोटोकॉल बनाया है और उसे किस स्तर पर लागू किया जा रहा है। अभिभावक आएं और स्कूलों में आकर सवाल पूछें। उन्हें खुद को आश्वस्त करना चाहिए।

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