RSS की आंध्र प्रदेश में हुई तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक में आबादी के असंतुलन, घटती प्रजनन दर और कुछ क्षेत्रों में इसके सामाजिक सद्भाव पर पड़ने वाले असर पर चर्चा हुई। इसके अलावा जंतर-मंतर के प्रदर्शनों से जुड़े सिस्टम की कमियों और युवाओं की चिंताओं, उनके भविष्य तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया।
आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिन तक चली ‘अखिल भारतीय समन्वय बैठक’ में आबादी के असंतुलन और उसके सामाजिक सद्भाव पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर चर्चा हुई। RSS नेता मुकुंद ने शुक्रवार को बैठक में हुई चर्चाओं की जानकारी देते हुए बताया कि कुछ इलाकों में अलग-अलग वर्गों और समुदायों की आबादी में तेजी से बदलाव का मुद्दा बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।
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कुछ समुदायों की आबादी में बढ़ोतरी पर चिंता
पत्रकारों से बातचीत में मुकुंद ने कहा कि कुछ वर्गों या समुदायों की आबादी में काफी बढ़ोतरी हो रही है, जबकि दूसरी ओर कुछ समुदायों की आबादी में कमी देखने को मिल रही है। बैठक में आबादी में इस तरह के बदलाव और उससे पैदा होने वाले असंतुलन को गंभीरता से लिया गया।
घटती प्रजनन दर भी चर्चा के केंद्र में
RSS नेता ने कहा कि देश में प्रजनन दर लगातार घट रही है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में आबादी के असंतुलन का असर सामाजिक ताने-बाने और आपसी सद्भाव पर भी दिखाई दे रहा है। बैठक में इस विषय को सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए इसके संभावित प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया।
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जंतर-मंतर के प्रदर्शनों पर भी हुई चर्चा
जंतर-मंतर पर हाल में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मुकुंद ने कहा कि बैठक में व्यवस्था और सिस्टम से जुड़ी कुछ कमियों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों के समाधान और व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत पर विचार किया गया।
युवाओं की चिंताओं और भविष्य पर मंथन
तीन दिवसीय बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई। मुकुंद के मुताबिक, युवाओं की चिंताओं, उनके बेहतर भविष्य के लिए जरूरी कदमों और देश के विकास में उनके योगदान को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमताओं का सकारात्मक तरीके से राष्ट्र निर्माण में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।