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Who Was Suresh Kalmadi: कॉमनवेल्थ खेलों के बाद सर्वाधिक चर्चा हुई, पूर्व सांसद, पायलट और खेल प्रशासक को जानिए

Tue, 06 Jan 2026 08:20 AM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे।

सार

Suresh kalmadi Profile: पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी का आज 81 साल की आयु में निधन हो गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सुरेश कलमाड़ी सियासत के अलावा सैन्य और खेल जगत में भी सक्रिय रहे। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के बाद उन्हें अधिक सुर्खियां मिलीं। जानिए कैसा रहा है कलमाड़ी का जीवन
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सुरेश कलमाड़ी के जीवन से जुड़ी खास बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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वर्ष 2010 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ खेलों से सर्वाधिक चर्चा बटोरने वाले पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी ने मंगलावर को पुणे में अंतिम सांस ली। पायलट और खेल प्रशासक के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले कलमाड़ी कभी एक पायलट के तौर पर आसमान की बुलंदियों को छूने में माहिर रहे थे। हालांकि, इनके जीवन में एक दौर ऐसा भी आया जब उन्हें विवादों से भी जूझना पड़ा। 
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कौन थे सुरेश कलमाड़ी?
सुरेश कलमाड़ी भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। वे लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे और खास तौर पर 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) के आयोजन से जुड़े विवादों के कारण चर्चा में आए। उनका जीवन राजनीति, प्रशासन और विवाद- तीनों का मिश्रण रहा है।

वायुसेना में रहे पायलट
सुरेश कलमाड़ी का जन्म 10 मई 1944 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पुणे में ही हासिल की और बाद में उच्च शिक्षा भी यहीं से पूरी की। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ काम किया, जिससे उन्हें जनसंपर्क और संगठनात्मक अनुभव मिला। राजनीति में आने से पहले कलमाड़ी ने 1964 से 1972 तक भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में सेवा की और 1974 में सेवा से सेवानिवृत्त हुए।
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1977 में रखा राजनीति में कदम
1977 में उन्हें पुणे के भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। अगले वर्ष ही उन्होंने महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष का पदभार संभाला, जिस पर वे 1978 से 1980 तक रहे। 1980 में महाराष्ट्र एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में कलमाड़ी ने मॉस्को ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली मैराथन टीम के चयन परीक्षण का संचालन किया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान 1995 से 1996 के बीच रेल राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने लंबे समय तक लोकसभा सांसद के तौर पर पुणे का प्रतिनिधित्व किया। 1982 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे और इसके बाद 1985 से 1995 तक लगातार चार बार संसद सदस्य रहे।

खेल प्रशासक की छवि पर कॉमनवेल्थ गेम्स से लगा दाग 
कलमाड़ी का नाम खेल प्रशासन से भी जुड़ा रहा। वे इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अध्यक्ष बने और अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसी भूमिका में रहते हुए उन्हें 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स की आयोजन समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उस समय यह आयोजन भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर माना जा रहा था।

हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का आयोजन भारी विवादों में घिर गया। आयोजन में देरी, घटिया निर्माण कार्य, लागत में भारी बढ़ोतरी और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि खेलों के आयोजन में सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इन आरोपों के चलते सुरेश कलमाड़ी को 2011 में गिरफ्तार किया गया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। यह उनके राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन का सबसे विवादास्पद अध्याय माना जाता है।
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