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सेहत: स्तनपान से हर साल बच सकती है आठ लाख बच्चों की जान, डब्ल्यूएचओ ने कहा- मोटापा और मधुमेह से भी बचाता है

Mon, 11 Aug 2025 05:12 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूएचओ के अनुसार शून्य से छह माह तक केवल स्तनपान कराने से शिशु को संपूर्ण पोषण, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और जीवन की बेहतर शुरुआत मिलती है। यह सांस संक्रमण, दस्त और शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसइईडीएस) से लेकर मोटापा व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), यूनिसेफ और विश्व स्तनपान कार्रवाई गठबंधन के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जन्म से 23 माह तक सभी बच्चों को उचित स्तनपान कराया जाए तो हर साल पांच साल से कम उम्र के 8.2 लाख से अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

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वैश्विक संस्थानों ने सरकारों, समुदायों और कार्यस्थलों से ऐसी स्थायी संरचनाएं बनाने का आग्रह किया है जो माताओं को स्तनपान कराने की सुविधाएं दे। डब्ल्यूएचओ के अनुसार शून्य से छह माह तक केवल स्तनपान कराने से शिशु को संपूर्ण पोषण, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और जीवन की बेहतर शुरुआत मिलती है। यह सांस संक्रमण, दस्त और शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसइईडीएस) से लेकर मोटापा व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है।

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स्तनपान कराने से माताओं के लिए भी अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं जैसे प्रसवोत्तर रक्तस्राव में कमी, स्तन और डिम्बग्रंथि कैंसर का कम खतरा और तेज स्वास्थ्य पुनर्प्राप्ति।

स्तनपान न सिर्फ शारीरिक वृद्धि, बल्कि बौद्धिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। - डब्ल्यूएचओ

भारत में स्तनपान की दर औसत से अधिक...लेकिन लक्ष्य दूर
भारत में शून्य से छह माह तक केवल स्तनपान कराने की दर 58% है जो वैश्विक औसत से अधिक है, लेकिन लक्ष्य 90% से काफी दूर है।

विशेषज्ञ मानते हैं, मातृत्व अवकाश बढ़ाना, कार्यस्थलों पर स्तनपान-अनुकूल सुविधाएं और गांवों में प्रशिक्षण इस दर को और बढ़ा सकते हैं। -राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार

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केवल 44% शिशुओं को ही जन्म से छह माह तक स्तनपान कराया जाता है।

  • दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के 14.9 करोड़ बच्चे बौनेपन से, 4.5 करोड़ बच्चे दुबलापन से और 3.7 करोड़ बच्चे मोटापे से जूझ रहे हैं।
  • हर साल कुपोषण से लगभग 27 लाख बच्चों की मौत होती है जो कुल बाल मृत्यु का 45% है। -वर्ष 2022 के आंकड़ों के मुताबिक
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