विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रॉस अदनॉम गैब्रेयसस ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा का इतिहास बहुत प्राचीन है। भारत इसका केंद्र रहा है। करीब 3500 साल से इस चिकित्सा का लाभ लिया जा रहा है। आज भी करीब 40 फीसदी दवाओं और फार्मास्युटिकल उत्पादों का आधार प्राकृतिक उत्पाद हैं। अन्य देशों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
गुजरात के गांधीनगर में बृहस्पतिवार को शुरू हुए पारंपरिक चिकित्सा पर पहले वैश्विक शिखर सम्मेलन में डॉ. गैब्रेयसस ने कहा कि भारत ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा की ताकत बढ़ाने के लिए काफी बेहतर कार्य किए हैं। इन कार्यों को अपनाकर अन्य देशों को भी पारंपरिक चिकित्सा को आगे लाने का काम करना चाहिए। उन्होंने भारत सहित उन देशों से साक्ष्य आधारित कार्यों को लेकर सुझाव मांगे हैं, जहां पारंपरिक चिकित्सा पर सबसे ज्यादा कार्य किया जा रहा है। बाद में डब्ल्यूएचओ इन सुझावों को वैश्विक रणनीति में शामिल कर सकता है। उद्घाटन सत्र में डॉ. गैब्रेयसस ने कहा, मुझे उम्मीद है कि इस सम्मेलन में लिए गए फैसले राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक दवाओं के उपयोग को एकीकृत करेगी। साथ ही विज्ञान के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा की शक्ति बढ़ाने में मदद करेगी।
पारंपरिक चिकित्सा में ये शामिल
भारत की तरह एकीकृत चिकित्सा पर करें काम
डॉ. गैब्रेयसस ने कहा कि एकीकृत चिकित्सा को लेकर भारत ने अपने अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर काफी अच्छा मॉडल तैयार किया है, जिसे विकसित और विकासशील देश भी अपना सकते हैं। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसके जरिये सदस्य देश अपनी आबादी को एक ही छत के नीचे एलोपैथी और पारंपरिक चिकित्सा दोनों की सुविधा दे सकते हैं।
170 देश पारंपरिक औषधियों का कर रहे इस्तेमाल
टीबी के खिलाफ भारत के प्रयास उल्लेखनीय
डॉ. गैब्रेयसस ने कहा, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टीबी संक्रमण के खिलाफ भारत की लड़ाई और उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना करता हूं। टीबी मुक्त के लिए भारत के नवोन्मेषी दृष्टिकोण, बहु-क्षेत्रीय साझेदारी प्रयासों और फंडिंग की सराहना है। इससे अन्य देशों को प्रेरणा मिली है।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान अपनाएं : मांडविया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को अपनाकर, हम एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य लोकाचार को बढ़ावा देते हुए स्वास्थ्य संबंधी सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक रूप से काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, आधुनिक समय में प्राकृतिक और हर्बल आधारित फार्मास्यूटिकल्स व सौंदर्य प्रसाधनों की मांग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के स्थायी महत्व को रेखांकित करती है।
अब विदेशों में बढ़ेंगे भारतीय डॉक्टर-नर्स, विदेशी मरीज भी घर बैठे ले सकेंगे भारत आने की अनुमति
केंद्र ने डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर गांधीनगर से एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया पोर्टल की शुरुआत की है, जो न सिर्फ विदेशी मरीजों को घर बैठे भारत आकर इलाज कराने की अनुमति मुहैया कराएगा, बल्कि भारतीय डॉक्टर और नर्स को विदेशों में जाकर सेवा का अवसर भी देगा। विदेशी मरीजों के लिए सरकार ने देश के 23 राज्यों के 98 शहरों के 352 अस्पतालों को इस ऑनलाइन मंच से जोड़ा है, ताकि किसी भी देश का नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर इलाज के लिए अस्पताल का चयन कर सके। इन्हीं अस्पतालों में बेहतर प्रैक्टिस कर रहे 6,178 डॉक्टरों को भी मंच पर लाया है, ताकि उनकी केस स्टडी और अनुभव का लाभ दुनियाभर के मरीजों को मिल सके।
अमेरिका की तुलना में इलाज 80 फीसदी सस्ता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, विकसित देशों की तुलना में भारत की चिकित्सा बहुत सस्ती और गुणवत्ता व पहुंच के लिहाज से काफी आसान भी है। अध्ययन बताते हैं कि अमेरिका की तुलना में भारत में इलाज कराना एक विदेशी नागरिक को 70 से 80 फीसदी तक सस्ता पड़ता है।