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'बेगुनाहों की जान लेने वालों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता'

Wed, 06 Apr 2016 04:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद (सहारनपुर)

सार

  • दहशतगर्दों के खिलाफ एकजुट हों: इमाम-ए-हरम
  • अमन का पैगाम लेकर देवबंद पहुंचे सऊदी अरब के इमाम-ए-हरम
  • बोले, दहशतगर्दी का इस्लाम से ताल्लुक नहीं 
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इमाम-ए-हरम - फोटो : Amar Ujala Bureau
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विस्तार
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सऊदी अरब मक्का मुकर्रमा के इमाम-ए-हरम डॉ. सालेह बिन मोहम्मद अल तालिब ने मंगलवार को रशीदिया मस्जिद से लाखों की भीड़ को अमन और इंसानियत का पैगाम दिया। इसके साथ ही दहशतगर्दी की पुरजोर तरीके से मुखालिफत भी की।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम एक अमन पसंद मजहब है। जिसका दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए बेगुनाहों की जान लेने वालों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता। दहशतगर्दी और इस्लाम के अलग-अलग पहलू हैं।

मंगलवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की दावत पर देवबंद पहुंचे इमाम-ए-हरम डा. सालेह बिन मोहम्मद अल तालिब ने रशीदिया मसजिद में अपने करीब 30 मिनट के संबोधन में कुरआन और सुन्नत के पैगाम को घर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया और कहा।
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उन्होंने कहा कि हमारे उलेमा एवं बुजुर्गों ने कुरआन-ओ-हदीस की नि:स्वार्थ सेवा की। हमारी जिम्मेदारी है कि हम भी कुरआन और हदीस के पैगाम को अवाम तक पहुंचाएं। इमाम-ए-हरम ने दहशतगर्दी की पुरजोर मुखालफत की। उन्होंने दुनिया के तमाम दहशतगर्दों से निपटने के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि सऊदी अरब ने दहशतगर्दी के खात्मे के लिए मुस्लिम मुल्कों में इत्तेहाद पैदा किया है और इसके लिए वो लगातार कोशिशें कर रहा है।
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