कोर्ट की सुनवाई का घटनाक्रम बताते-बताते घर-घर में बनी पहचान
निकम ने अपने कानूनी पेशे की शुरुआत 1979 में जलगांव की जिला अदालत से की। वहीं से धीरे धीरे वे सीखते रहे। बाद में उन्होंने करीब 14 साल तक टाडा अदालत में अपनी सेवा दी। उन्हें पहली बार प्रसिद्धि मिली, जब उन्हें 1993 के सीरियल ब्लास्ट मामले में लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया। 10 साल से अधिक समय बाद मामले में सौ आरोपियों को दोषी करार दिया गया। वहीं, 23 लोगों को मामले में बरी कर दिया गया। हर सुनवाई के बाद निकम कोर्ट के घटनाक्रम की जानकारी देते थे, टीवी के माध्यम से इस तरह वे घर-घर तक पहुंचे और धीरे-धीरे वे पहचाने जाने लगे।
उज्ज्वल को मिले यह सनसनी खेज मामले
हालांकि, उनके जीवन का महत्वपूर्ण केस वह रहा, जब उन्होंने 26/11 आतंकवादी हमले के एकमात्र गिरफ्तार आतंकी अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाया। उन्होंने देश के कई सनसनी खेज मामले में महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें गुलशन कुमार हत्याकांड और शक्ति मिल्स सामूहिक बलात्कार सहित अन्य मामलें शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, निकम अब 628 दोषियों को उम्रकैद तो 37 आरोपियों को फांसी की सजा दिलवा चुके हैं। 2016 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।