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राफेल डील में 'चालाक आदमी' कौन है, जो सामने नहीं आ रहा है...

Fri, 18 Jan 2019 09:11 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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Rafale
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राफेल डील में 'चालाक आदमी' कौन है। वह सामने नहीं आ रहा है, फिर भी अप्रत्यक्ष तौर पर उसकी ओर इशारा हो जाता है। सत्ता पक्ष 'चालाक आदमी' को लेकर कुछ नहीं बोलता। विपक्ष है कि लगातार कुछ न कुछ विस्फोटक सामग्री (यानी आरोप, कोई तथ्यात्मक बात आदि) चालाक आदमी का नाम लेकर सत्ता पक्ष पर फेंकता रहता है। खास बात यह है कि चालाक आदमी को सब पता है कि उसे लेकर कौन क्या कह रहा है। कुछ मजबूरी रही होगी, जिसके चलते वह मौन है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में विपक्ष ही कुछ ऐसा करे कि वह 'चालाक आदमी' खुद-ब-खुद दुनिया के सामने आए जाए। 
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बता दें कि ये 'चालाक आदमी' शब्द पहले नहीं था, इस शब्द को इजाद करने का श्रेय कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम को जाता है। उन्होंने शुक्रवार को इस शब्द का इस्तेमाल पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिए किया है। चिदंबरम का कहना था कि राफेल सौदे को जब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी मिली तो तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर क्या कर रहे थे। उन्होंने कहीं भी अपनी भूमिका का जिक्र नहीं किया है। राफेल डील के दस्तावेज बताते हैं कि उन्होंने न विरोध किया और न समर्थन किया। आखिर ये कैसा खेल चल रहा था। राफेल विमान सौदे के लिए सात सदस्यों की 'इंडियन नेगोशिएशन टीम' बनाई गई थी।

इस टीम ने जो रिपोर्ट दी थी, उसकी समीक्षा कानून मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और रक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने की है। खास बात है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल सौदे बाबत जो नोट दिया है, उसमें रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की किसी भूमिका का कहीं कोई जिक्र नहीं है। चिदंबरम का कहना है कि यह कैसे हो सकता है। रक्षा ख़रीद प्रक्रिया के तहत डीएसी को ही फैसले लेने का अधिकार है। अब आप इसे क्या कहेंगे। चालाक आदमी नहीं तो क्या है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में अपनी तरफ से राफेल डील का ऐलान कर रहे थे और रक्षा मंत्री खुद को अनजान बता रहे थे। हम उस चालाक आदमी की भूमिका पर आज कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। 
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'चालाक आदमी' पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं 

पिछले सत्र में राफेल पर लोकसभा में हुई जोरदार चर्चा के दौरान रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सवालों का एक-एक कर जवाब दिया, लेकिन एक सवाल बिना जवाब के रह गया। पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, जिनका नाम राफेल मामले में कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं द्वारा अक्सर उठाया जाता रहा है। राहुल गांधी ने मनोहर पर्रिकर के कथित ऐसे ऑडियो टेप का भी जिक्र किया था, जिसमें वे यह कहते हुए सुनाई पड़ रहे हैं कि राफेल डील की फाइलें उनके बैडरुम में हैं।  राहुल का कहना था कि राफेल मामले में पर्रिकर की कोई बात नहीं मानी गई। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने दो घंटे से अधिक समय के अपने भाषण में एक बार भी मनोहर पर्रिकर का नाम नहीं लिया। राफेल डील में पीएम मोदी ने रक्षामंत्री, कानून मंत्रालय और डिफेंस अक्विजीशन विंग को किनारे कर दिया था। राहुल गांधी खुद कई बार कह चुके हैं कि राफेल की बेंच मार्क प्राइस की फाइल पर मोदी ने किसी की नहीं सुनी। 

रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सचिव ने भी सवाल उठाया 

कांग्रेस पार्टी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के वित्तीय हेड सुधांशु मोहन्ते ने राफेल सौदे को लेकर सवाल उठाए थे, मगर उनकी बात भी नहीं सुनी गई। इसके बाद वह फाइल तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के पास गई। उन्होंने भी उस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। नेगोसिएशन कमेटी ने भी इस पर ऐतराज जताया। जहाज का बैंच मार्क प्राइस तय होने के बाद बैंक गारंटी या सोवरेन गारंटी का नम्बर आता है। कानून मंत्रालय ने 9 दिसंबर 2015 को सलाह दी कि राफेल सौदे में बैंक गारंटी जरूरी है। मंत्रालय की दलील थी कि यह सौदा दूसरे देश के साथ हो रहा है। पैसा एडवांस में दिया जा रहा है, अगर बीच में सौदा रद्द हो गया तो पैसे फंस जाएंगे। 7 मार्च 2016 को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी कानून मंत्रालय की सलाह पर अपनी सहमति जताई और फ़ाइल में कोई बदलाव नहीं किया।  पर्रिकर ने 7 मार्च 2016 को फ्रांस सरकार द्वारा बैंक गारंटी के नाम पर भेजे गए 'लैटर ऑफ कम्फर्ट’ को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था।  राहुल गांधी ने एक प्रेसवार्ता में कहा, गोवा में पूर्व रक्षा मंत्री बैठे हुए हैं, वे कह रहे हैं मेरे पास फाइल हैं, मैं प्रधानमंत्री जी को सीधा कर दूंगा। 
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