फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

एक्सप्लेनर: कौन हैं शक्ति शर्मा, गैर-चिकित्सा क्षेत्र में एयर वाइस मार्शल बन रचा इतिहास, ये उपलब्धि क्यों खास?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 02 Sep 2026 01:23 PM IST

सार

गैर-चिकित्सा क्षेत्र से एयर वाइस मार्शल बनने वाली पहली महिला अधिकारी बनकर शक्ति शर्मा ने इतिहास रच दिया है। उनकी यह उपलब्धि सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व की बदलती तस्वीर को भी सामने लाती है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा - फोटो : Amar Ujala

भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका के बीच एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने एक नया इतिहास रचा है। वह भारतीय सशस्त्र बलों में गैर-चिकित्सा क्षेत्र से एयर वाइस मार्शल या उसके समकक्ष रैंक तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।

ऐसे में आइए जानते हैं कि शक्ति शर्मा कौन हैं, वह यहां तक कैसे पहुंचीं, एयर वाइस मार्शल कितनी बड़ी रैंक है, प्रमोशन की प्रक्रिया क्या होती है, महिलाओं के लिए स्थाई कमीशन क्यों ऐतिहासिक और वायुसेना में महिलाओं की भूमिका कैसे बढ़ रही है?

विज्ञापन

एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा - फोटो : Amar Ujala
भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका के बीच एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने एक नया इतिहास रचा है। वह भारतीय सशस्त्र बलों में गैर-चिकित्सा क्षेत्र से एयर वाइस मार्शल या उसके समकक्ष रैंक तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।

ऐसे में आइए जानते हैं कि शक्ति शर्मा कौन हैं, वह यहां तक कैसे पहुंचीं, एयर वाइस मार्शल कितनी बड़ी रैंक है, प्रमोशन की प्रक्रिया क्या होती है, महिलाओं के लिए स्थाई कमीशन क्यों ऐतिहासिक और वायुसेना में महिलाओं की भूमिका कैसे बढ़ रही है?

कौन हैं एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा?

एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की एजुकेशन ब्रांच में कमीशन मिला था। तीन दशक से अधिक की सेवा के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमांड मुख्यालयों और एयर हेडक्वार्टर में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।

1 सितंबर को उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (एजुकेशन) का पदभार संभाला। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह नियुक्ति सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

शक्ति शर्मा ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण संस्थागत पहलों का नेतृत्व किया। इनमें आईआईटी कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में भारतीय वायुसेना चेयर्स ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना शामिल है। इनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के बीच शैक्षणिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना था। वह तीनों सेनाओं में सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी भी हैं। उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रिंसिपल के रूप में काम किया है।

एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा - फोटो : Amar Ujala

एयर वाइस मार्शल की रैंक का महत्व क्या?

एयर वाइस मार्शल भारतीय वायुसेना की दो सितारा रैंक है। भारतीय सेना में इसका समकक्ष मेजर जनरल और भारतीय नौसेना में रियर एडमिरल होता है। इस रैंक के अधिकारी एयरफोर्स स्टेशनों की कमान संभाल सकते हैं, एयर हेडक्वार्टर में महत्वपूर्ण निदेशालयों का नेतृत्व कर सकते हैं और कमांड मुख्यालयों में वरिष्ठ स्टाफ अधिकारी की जिम्मेदारी निभा सकते हैं। इसलिए एयर वाइस मार्शल की रैंक तक पहुंचना किसी अधिकारी के करियर में एक बड़ा पड़ाव माना जाता है।

एयर वाइस मार्शल की रैंक - फोटो : Amar Ujala

एयर वाइस मार्शल का प्रमोशन कैसे होता है?

एयर वाइस मार्शल का पद सामान्य समय पूरा होने पर अपने आप नहीं मिलता। यह चयन आधारित पदोन्नति है।
  • सबसे पहले अधिकारी को निर्धारित सेवा-अर्हता पूरी करनी होती है। एयर वाइस मार्शल के लिए विचार के दायरे में आने वाले अधिकारी आमतौर पर एयर कमोडोर रैंक के होते हैं।
  • इसके बाद उपलब्ध पदों की संख्या देखी जाती है। वरिष्ठ रैंकों में पद सीमित होते हैं, इसलिए सभी पात्र अधिकारियों को पदोन्नति नहीं मिलती।
  • पात्र अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें वर्षों के दौरान अधिकारी के प्रदर्शन की रिपोर्ट और उच्च जिम्मेदारियां संभालने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है।
  • इसके बाद चयन बोर्ड उपलब्ध रिक्तियों और अधिकारियों की योग्यता व प्रदर्शन के आधार पर मेरिट के अनुसार चयन करता है।
  • इस प्रक्रिया में केवल वरिष्ठता ही पर्याप्त नहीं होती। अधिकारी का प्रदर्शन, सेवा रिकॉर्ड, योग्यता और उपलब्ध पद सभी महत्वपूर्ण होते हैं।

महिलाओं के लिए परमानेंट कमीशन कब से शुरू हुआ?

भारतीय वायुसेना ने 2010 में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने का प्रावधान शुरू किया। इससे महिला अधिकारियों के लिए लंबे समय तक सेवा में बने रहने और वरिष्ठ पदों तक पहुंचने की संभावना बढ़ी।
इसके बाद वायुसेना में महिला अधिकारियों के प्रमोशन और करियर विकास के अवसरों को बढ़ाया गया। इसमें अलग-अलग करियर कोर्स में उनकी भागीदारी भी शामिल रही।

हालांकि, सेना और नौसेना में परमानेंट कमीशन से जुड़ी व्यवस्था अलग रही। दोनों सेनाओं में 2008 में चुनिंदा आर्म्स, सर्विसेज और ब्रांच में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देना शुरू किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों से इसका दायरा कई अन्य शाखाओं तक बढ़ा।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सशस्त्र बलों में महिलाओं को पुरुष अधिकारियों के बराबर करियर के अवसर देने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट के 2020 के दो फैसले महत्वपूर्ण रहे। पहला फैसला सेना से जुड़े बबीता पुनिया मामले में 17 फरवरी 2020 को और दूसरा नौसेना से जुड़े एनी नागराजा मामले में 17 मार्च 2020 को आया। दोनों मामलों में महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का मुद्दा था।

सेना में बबीता पुनिया मामला
सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए होती थी, लेकिन उन्हें पुरुष अधिकारियों की तरह स्थायी कमीशन का समान अवसर नहीं मिलता था। महिला अधिकारियों ने इस व्यवस्था को चुनौती दी। मामला दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

17 फरवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों को केवल उनके लिंग के आधार पर स्थायी कमीशन से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने महिलाओं की शारीरिक क्षमता, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक धारणाओं को उनके करियर के अवसर सीमित करने का आधार मानने वाली दलीलों को स्वीकार नहीं किया। फैसले से पात्र महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन के साथ कमांड और करियर में आगे बढ़ने का रास्ता भी मजबूत हुआ।

नौसेना में एनी नागराजा मामला
इसके करीब एक महीने बाद 17 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने नौसेना की महिला अधिकारियों से जुड़े एनी नागराजा मामले में फैसला दिया। इस मामले में 17 महिला अधिकारी शामिल थीं। इनमें लॉजिस्टिक्स, एजुकेशन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल शाखाओं की अधिकारी थीं।

इन अधिकारियों ने शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 14 साल की सेवा पूरी कर ली थी, लेकिन उन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया गया और उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया। उन्होंने इसे अदालत में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने नौसेना की उस व्यवस्था को चुनौतीपूर्ण माना, जिसके तहत 2008 की नीति का लाभ पहले से सेवा में मौजूद महिला अधिकारियों को नहीं मिल रहा था। कोर्ट ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन के लिए समान अवसर देने का रास्ता साफ किया। यानी सिर्फ इस आधार पर महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन से बाहर नहीं किया जा सकता था कि वह संबंधित नीति आने से पहले नौसेना में शामिल हुई थी।

दोनों फैसलों से क्या बदला?

इन दोनों फैसलों ने सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए लंबे करियर, स्थायी कमीशन, प्रमोशन और कमांड जैसी जिम्मेदारियों के अवसरों को मजबूत किया।

वायुसेना में महिलाओं की उपलब्धियां - फोटो : Amar Ujala

गैर-चिकित्सा क्षेत्र में शक्ति शर्मा की उपलब्धि क्यों खास है?

शक्ति शर्मा की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह गैर-चिकित्सा शाखा से एयर वाइस मार्शल बनने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों ने चिकित्सा और नर्सिंग सेवाओं में वरिष्ठ रैंक हासिल की थी।
  • एयर मार्शल पद्मा बंदोपाध्याय इसका प्रमुख उदाहरण हैं। वह 2002 में भारतीय वायुसेना की पहली महिला एयर वाइस मार्शल बनी थीं और बाद में पहली महिला एयर मार्शल भी बनीं।
  • शक्ति शर्मा की उपलब्धि इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने एजुकेशन ब्रांच से शुरुआत की और गैर-चिकित्सा क्षेत्र में सेवा करते हुए दो सितारा रैंक हासिल की।
  •  सशस्त्र बलों ने 1992 में चिकित्सा क्षेत्र के अलावा कुछ चुनिंदा शाखाओं में भी महिला अधिकारियों के लिए रास्ता खोला था। इसके बाद धीरे-धीरे महिलाओं की भूमिका बढ़ती गई।
आज महिलाएं तीनों सेनाओं की कई लड़ाकू और गैर-लड़ाकू शाखाओं में काम कर रही हैं। वे प्रशिक्षण, संचालन, प्रशासन और कमांड से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं। वायुसेना में हाल के वर्षों में महिला अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

2023 में ग्रुप कैप्टन शालिजा धामी को पश्चिमी क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर तैनात एक अग्रिम लड़ाकू इकाई की कमान संभालने के लिए चुना गया। वह वायुसेना में मिसाइल स्क्वाड्रन की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

अगस्त 2026 में स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट में प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स पूरा किया। वह यह कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। यह वायुसेना के कठिन उन्नत कॉम्बैट कोर्स में शामिल है और इसमें चुनिंदा फाइटर पायलट हिस्सा लेते हैं।

इससे पहले स्क्वाड्रन लीडर सान्या पहली महिला अधिकारी बनीं, जिन्होंने प्रतिष्ठित कैटेगरी-ए क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर योग्यता हासिल की।

शक्ति शर्मा की नियुक्ति का क्या महत्व है?

यह सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों और बदलती भूमिका को भी दिखाती है। 1994 में एजुकेशन ब्रांच से शुरू हुआ उनका करियर प्रशिक्षण संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमांड मुख्यालयों और एयर हेडक्वार्टर की अलग-अलग जिम्मेदारियों से होते हुए दो सितारा रैंक तक पहुंचा है।

उनकी नियुक्ति यह भी दिखाती है कि सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका अब केवल चिकित्सा या सीमित क्षेत्रों तक नहीं रह गई है। वे शिक्षा, प्रशिक्षण, संचालन, कमांड और वरिष्ठ नेतृत्व वाली जिम्मेदारियों में भी आगे बढ़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next