जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बड़े आतंकवादी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई, जबकि दस से अधिक लोग घायल हुए हैं। केंद्र सरकार ने गुरुवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कहा, जम्मू कश्मीर में हालात सुधर रहे थे। वहां पर्यटन सहित दूसरे कारोबार में तेजी आ रही थी। 'सब कुछ ठीक चलने' के बावजूद पहलगाम में आतंकी हमला होना एक बड़ी 'चूक' थी। सरकार द्वारा चूक माने के बाद अब जम्मू कश्मीर में लोकल प्रशासन के अधिकारी रडार पर आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जेएंडके के एलजी मनोज सिन्हा ने इस बाबत मुख्य सचिव और डीजीपी सहित दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक की है। माना जा रहा है कि जल्द ही लोकल प्रशासन के अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। हालांकि अनंतनाग जिले के वरिष्ठ पुलिस कप्तान अमृतपाल सिंह 'आईपीएस' ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले से एक दिन पहले ही चार्ज संभाला था।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने इस मामले में 'चूक' मानी है। अब इसकी गाज कई लोगों पर गिर सकती है। भले ही किसी ने ऐसा सोचा नहीं था कि पहलगाम की 'बैसरन' घाटी में आतंकी हमला हो सकता है। इसे अमूमन जून के आसपास पर्यटकों के लिए खोला जाता है। उस वक्त जिला प्रशासन के पास यह सूचना रहती है कि वहां पर कब और कितने पर्यटक जा रहे हैं।
इसके बाद प्रशासन द्वारा वहां पर सुरक्षा का इंतजाम कर दिया जाता था। इस बार जिला प्रशासन को यह पता ही नहीं चला कि वहां पर पर्यटक पहुंच गए हैं। 20 अप्रैल से 'बैसरन' घाटी में पर्यटकों के समूह पहुंचने शुरु हो गए थे। यह बात, जिला प्रशासन को मालूम नहीं चली। अब यह पता लगाया जा रहा है कि वे कौन लोग थे, जो पर्यटकों को वहां पर ले गए, लेकिन उन्होंने जिला प्रशासन को सूचना देना आवश्यक नहीं समझा। सूत्रों ने बताया, पूरे जेएंडके में सालभर सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी रहती है। इस स्पॉट पर सीआरपीएफ भी तैनात रही थी। सीआरपीएफ की 116 वीं बटालियन अब भी पहलगाम सिटी में तैनात है। बल की तैनाती का निर्णय लोकल प्रशासन द्वारा लिया जाता है। जेएंडके में थ्रेट इनपुट आते रहते हैं। हैरानी की बात तो ये है कि हमले के दौरान इस स्पॉट पर एक भी सुरक्षा कर्मी नहीं था। पीड़ितों ने खुद प्रशासन को फोन पर हमले की जानकारी दी।
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एलजी, सीएस और डीजीपी की बैठक में इस प्वाइंट पर गौर किया गया है। लोकल प्रशासन को पर्यटकों के आने की बात क्यों नहीं पता चल सकी। क्या टूरिस्ट गाइड या होटल वालों ने प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया है। दरअसल, 'बैसरन' घाटी में पर्यटक आ रहे हैं, इसे लेकर कोई एसओपी बनाई ही नहीं गई। जेएंडके में अधिकांश जगहों पर क्यूआरटी रहती है। आपदा की स्थिति में यह टीम दस पंद्रह मिनट में घटना स्थल पर पहुंच जाती है। सूत्रोंं ने बताया, अनंतनाग के डीएम, एसएसपी, जिला आपदा कमेटी और पर्यटन विभाग आदि, रडार पर हैं। इन विभागों से जवाब मांगे जा रहे हैं। बहुत जल्द कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। इसके अलावा वे टूरिस्ट गाइड और होटल वाले भी रडार पर आ गए हैं, जो पर्यटकों को यहां लेकर आए थे।
सर्वदलीय बैठक में रक्षा मंत्री ने सभी नेताओं को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा गृह मंत्रालय और आईबी के अफसरों ने भी नेताओं को बताया कि कुछ वर्षों से वहां पर सब नॉर्मल हो रहा था। इसके बावजूद यह आतंकी हमला एक 'चूक' है। बैठक के बाद लोकसभा सांसद ओवैसी ने कहा था, वहां पर सीआरपीएफ क्यों नहीं तैनात की गई। जनवरी में सीआरपीएफ की टुकड़ियां क्यों हटाई गईं थी।
कांग्रेस कार्यसमिति ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय गणराज्य के मूल्यों पर सीधा हमला बताया है। बैठक के दौरान गंभीर सुरक्षा और खुफिया चूक पर सवाल उठाते हुए एक प्रस्ताव में कहा गया कि पहलगाम एक अत्यंत सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। वहां पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में हुए हमले की पृष्ठभूमि में सुरक्षा तंत्र की कमियों और व्यवस्थागत चूकों की विस्तृत व निष्पक्ष जांच की जाए। इन सवालों को जनहित में उठाना जरूरी है, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय होता हुआ स्पष्ट रूप से नजर आ सके।
आगामी दिनों में शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पुख्ता करने की मांग करते हुए कांग्रेस कार्यसमिति ने यह भी कहा कि देशभर से लाखों श्रद्धालु इस वार्षिक यात्रा में भाग लेते हैं। उनकी सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए ठोस, पारदर्शी और सक्रिय सुरक्षा उपाय तुरंत लागू किए जाने चाहिए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उन लोगों की आजीविका की भी रक्षा की जानी चाहिए, जिनका जीवन पर्यटन पर निर्भर करता है।